चेन्नई में 4 रंगों के डिब्बों में कचरा बांटना जरूरी, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

खबर सार :-

ग्रेटर चेन्नई काॅर्पोरेशन ने कचरे का प्रबंधन करने के लिए शहरभर में कचरे को 4 भागों में बांटना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम घर, दुकान, स्कूल सभी पर लागू होगा।
अब 4 रंगों के डिब्बों में अलग करना होगा कचरा, चेन्नई में नया नियम लागू

खबर विस्तार : -

चेन्नई: अब कचरे का बंटवारा केवल गीला और सूखा के आधार पर नहीं किया जाएगा। ग्रेटर चेन्नई काॅरपोरेशन ने शहर में कचरे का बंटवारा 4 भागों में करने करना अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत कचरे को गीला, सैनिटरी, खतरनाक और केमिकल की श्रेणियों में बांटा गया है। इस नियम को न मानने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने पूरे शहर में कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग-अलग करना अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना और लैंडफिल (कचरा डंपिंग साइट) तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा को कम करना है।

सभी पर लागू होंगे नियम

यह नियम सभी पर लागू होता है, जिसमें निजी घर, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, दुकानें, कमर्शियल संस्थान, शिक्षण संस्थान, सरकारी कार्यालय और बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वाले शामिल हैं। कॉर्पोरेशन ने चेतावनी दी है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लग सकता है और म्युनिसिपल कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

निवासियों और संस्थानों को सफाई कर्मचारियों को कचरा सौंपने से पहले उसे चार श्रेणियों में अलग-अलग करना होगा:

1- हरा डिब्बा- गीले कचरे के लिए।

2- नीला डिब्बा- रीसायकल होने योग्य सूखे कचरे (कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच) के लिए।

3- लाल डिब्बा- सैनिटरी कचरे—जैसे इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी नैपकिन के लिए। इन्हें फेंकने से पहले अच्छी तरह लपेटना जरूरी है।

4- काला डिब्बा- घरेलू खतरनाक कचरे—जैसे बैटरी, लाइट बल्ब, ई-वेस्ट, एक्सपायर्ड दवाएं और केमिकल के लिए ।

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अलग-अलग किया कचरा उठाया जाएगा

घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने वाली बैटरी-संचालित गाड़ियों में भी अलग-अलग किए गए कचरे को ले जाने के लिए चार रंगों वाले कंटेनर लगाए गए हैं। सभी 200 वार्डों में सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल वही कचरा इकट्ठा करें जिसे स्रोत पर ही ठीक से अलग-अलग किया गया हो।

जागरूकता मुहिम के बाद शुरू हुआ अभियान

यह निर्देश दक्षिण चेन्नई में शुरू की गई एक बड़ी जागरूकता मुहिम के बाद आया है। 22 अगस्त को, GCC ने 40 दिनों का 'कचरा अलग करें - कल बचाएं' (Segregate Waste - Save Tomorrow) अभियान शुरू किया, जिसमें लोगों को घर-घर जाकर कचरा अलग करने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। 

50,000 घरों को शामिल करने का लक्ष्य

शुरुआती चरण में, पांचों जोन में से प्रत्येक में 1,000 घरों को शामिल किया गया। भाग लेने वाले परिवारों को नॉन-बायोडिग्रेडेबल (जो आसानी से नष्ट नहीं होता) कचरे को अलग रखने के लिए बैग भी दिए गए। कॉर्पोरेशन की योजना इस अभियान को धीरे-धीरे सभी पांचों जोन में 50,000 घरों तक बढ़ाने की है।

रीसाइकलिंग प्रक्रिया बनेगी आसान

अधिकारियों का कहना है कि घर और संस्थान के स्तर पर कचरे को ठीक से अलग करने से रीसायकल होने योग्य सामग्री को आसानी से निकाला जा सकेगा, बायोडिग्रेडेबल कचरे की खाद बनाना आसान होगा और आगे की प्रोसेसिंग अधिक प्रभावी होगी। इससे चेन्नई के डंपिंग ग्राउंड पर बोझ भी कम होगा और रीसायकल होने योग्य व खतरनाक कचरे को सामान्य कचरे के साथ मिलने से रोका जा सकेगा।

सफाई कर्मचारियों का सहयोग करने की अपील

GCC ने निवासियों, संस्थानों और व्यापारियों से अपील की है कि वे सफाई कर्मचारियों का सहयोग करें और रंग-आधारित सिस्टम का लगातार पालन करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।

AI तकनीक से प्रभावी होगा कचरा प्रबंधन 

तमिलनाडु में मदुरै नगर निगम ने शहर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (ठोस कचरा प्रबंधन) को बेहतर बनाने के लिए AI, GPS-आधारित मॉनिटरिंग और विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण प्रणाली को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता में सुधार करना, अवैध रूप से कचरा फेंकने पर रोक लगाना और सफाई सेवाओं की दक्षता बढ़ाना है। इसके लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है, जिसमें "कचरा हॉटस्पॉट" (वे इलाके जहां अक्सर कचरा फेंका जाता है) की पहचान करना और सफाई कार्यों की निगरानी तथा जैविक कचरे के वैज्ञानिक निपटान को मजबूत करना शामिल है।

कचरे के ढेर लगने से पहले ही होगी कार्रवाई

इस योजना के तहत, AI तकनीक का उपयोग उन जगहों की पहचान करने के लिए किया जाएगा जहां नियमों का उल्लंघन करते हुए बार-बार कचरा फेंका जाता है। CCTV कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करके, AI स्वचालित रूप से इन संवेदनशील स्थानों का पता लगाएगा, जिससे नगर निगम के अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे और कचरे के ढेर लगने से पहले ही समस्याओं का समाधान कर सकेंगे।

जीपीएस बताएगा कचरा वाहनों की लोकेशन 

इसके अलावा, सफाई कर्मचारियों और कचरा उठाने वाले वाहनों की निगरानी के लिए GPS-आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। इससे वाहनों की लोकेशन, तय रूट का पालन, कर्मचारियों की उपस्थिति और कचरा उठाने के समय की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी। यह प्रणाली सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाएगी और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान में मदद करेगी।


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