रामपुर में जैविक खेती जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 50 किसानों को उन्नत बीज वितरित
खबर सार :-
रामपुर में जैविक खेती जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही खेती की लागत कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
खबर विस्तार : -
सोनभद्रः ग्राम रामपुर में अविरल रस सोशल फाउंडेशन की ओर से ग्राम प्रधान की उपस्थिति में किसानों के लिए जैविक खेती जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान किसानों को जैविक खेती के लाभ, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपाय, फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों से कहा कि जैविक खेती न केवल भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखती है, बल्कि इससे तैयार होने वाली उपज की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों की आय में होगी बढ़ोत्तरी
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ संवाद करते हुए नकदी फसलों (कैश क्रॉप) की खेती के महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। किसानों को बताया गया कि अरहर, तिल और मूंगफली जैसी फसलों की वैज्ञानिक एवं जैविक पद्धति से खेती कर वे अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
इस अवसर पर 50 किसान साथियों को अरहर, तिल एवं मूंगफली की उन्नत किस्म के बीज निःशुल्क वितरित किए गए। संस्था का उद्देश्य इन बीजों के माध्यम से किसानों को जैविक पद्धति से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आय अर्जित करने में सहयोग देना है।
अविरल रस सोशल फाउंडेशन के निदेशक अभय प्रताप सिंह ने बताया कि संस्था पिछले एक वर्ष से लगातार रामपुर क्षेत्र के किसानों के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि संस्था केवल किसानों को जागरूक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में भी लगातार प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि यदि किसान जैविक खेती और नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ाते हैं तो उनकी आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
रस सोशल फाउंडेशन की सराहना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्राम प्रधान ने कहा कि वर्तमान समय में जैविक खेती किसानों के लिए केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार बढ़ते उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जिसका असर उत्पादन और पर्यावरण दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ जैविक खेती अपनाने की अपील की, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
ग्राम प्रधान ने अविरल रस सोशल फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों और ग्रामीणों ने भी संस्था के प्रयासों की सराहना की और मांग की कि भविष्य में भी जैविक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और बाजार से जुड़ी जानकारी देने वाले ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठाकर अपनी आय और खेती की गुणवत्ता में सुधार कर सकें।
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