बाराबंकी में घाघरा का रौद्र रूप! हेतमापुर गांव में 10 पक्के मकान नदी में समाए, कटाव रोकने में जुटा प्रशासन
खबर सार :-
बाराबंकी में घाघरा नदी उफान पर है। जलस्तर कम होने के बावजूद कटाव जारी है। हेतमापुर गांव में 10 पक्के घर नदी में समा चुके हैं। प्रशासन कटाव रोकने के लिए प्रयास कर रहा है।
खबर विस्तार : -
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में घाघरा नदी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। रामनगर तहसील इलाके के हेतमापुर गांव में मुश्किलें बढ़ रही हैं। नदी की तेज धारा अब एक-एक करके लोगों के घरों को निगल रही है। कुछ लोग बेबस होकर अपनी आंखों के सामने अपने घरों को ढहते हुए देख रहे हैं, तो कुछ अपनी जीवन भर की कमाई को बहते देख फूट-फूट कर रो रहे हैं।
अब सबसे बड़ा खतरा हेतमापुर के मशहूर श्री बाबा नारायण दास मंदिर और उसके पास बनी मस्जिद पर मंडरा रहा है। नदी के किनारे हो रहे लगातार कटाव के आगे लोग बेबस नजर आ रहे हैं, जबकि प्रशासन इस तबाही को रोकने की कोशिश कर रहा है।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा नदी
घाघरा नदी खतरे के निशान से लगभग 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और इसकी धारा बेहद खतरनाक बनी हुई है। जबरदस्त कटाव के कारण हेतमापुर गांव में घर तेज़ी से नदी में समाते जा रहे हैं। जहां कुछ लोग अपना सामान बाहर निकालने में कामयाब रहे हैं, वहीं कुछ लोग अपने कुछ सामान को बचाने की हताश कोशिश में अपने ही घरों को तोड़ने को मजबूर हैं।
मंदिर-मस्जिद पर भी कटाव का खतरा
इस भयावह मंजर ने ग्रामीणों को बुरी तरह झकझोर दिया है। अब मुख्य चिंता श्री बाबा नारायण दास मंदिर की सुरक्षा की है; खतरा इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि घाघरा की धारा मंदिर के और करीब पहुंच रही है। मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद पर भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
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ठोस उपायों की मांग कर रहे ग्रामीण
यह बताना नामुमकिन है कि नदी अगली बार जमीन के किस हिस्से को बहा ले जाएगी। पलक झपकते ही जमीन कट जाती है और लोगों के घर घाघरा में समा जाते हैं। इस लगातार हो रही तबाही को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा है और वे कटाव को रोकने के लिए प्रशासन से ठोस उपायों की मांग कर रहे हैं।
नदी की धारा को रोकने की कोशिश
इस बीच, जिला प्रशासन कटाव को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बचाव कार्य करने और कटाव को कम करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। उप-जिलाधिकारी (SDM) भी मौके पर पहुंच गए हैं और लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल, प्रशासन की मुख्य कोशिश घाघरा नदी की इस खतरनाक धारा को रिहायशी इलाकों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने से रोकना है।
प्रभावित ग्रामीणों को मिलेगी आर्थिक मदद
SDM आकांक्षा गुप्ता ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी और जिनके घर नदी के किनारे की कटान में बह गए हैं, उनके रहने-सहने का इंतजाम किया जा रहा है। अब तक नदी 10 पक्के घरों को निगल चुकी है। हालांकि पानी का स्तर कम हो गया है, लेकिन कटान जारी है और बाढ़ नियंत्रण विभाग इसे रोकने के लिए काम कर रहा है।
20 साल बाद नदी की धारा गांव की ओर मुड़ी
एसडीएम ने ग्रामीणों से घबराने की अपील की और भरोसा दिलाया कि प्रशासन कटान को रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है और घर क्षतिग्रस्त होने पर मदद भी देगा। मंदिर और मस्जिद को बचाने के लिए व्यापक उपाय किए गए हैं। लगभग 20 साल बाद नदी की धारा गांव की ओर मुड़ गई है और कटान से होने वाले नुकसान को कम करने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों में दुख और आक्रोश
बाढ़ से प्रभावित सुनीता ने कहा, "जिस घर में मैं पैदा हुई और पली-बढ़ी, वह अब घाघरा नदी में समा गया है। फिर भी, अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और कह रहे हैं कि वे तभी कार्रवाई करेंगे जब तटबंध टूटेगा। बाढ़ और प्रशासनिक लापरवाही के कारण गांव में चार लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार को हमारे घर फिर से बनाने के लिए जमीन और पैसे दोनों देने चाहिए।" स्थानीय निवासी शत्रुघ्न ने कहा, "भले ही नदी की धारा मंदिर और मस्जिद तक पहुंच गई है, लेकिन वे गिरेंगे नहीं; उन पर दैवीय कृपा है। गांव में मंदिर और मस्जिद बहुत पुराने हैं।"
सीएम के निर्देश पर राहत-बचाव कार्य जारी
राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दे रही है। राहत और बचाव कार्यों में लगी टीमों ने अब तक 21,350 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है; इसमें किसी इंसान या मवेशी की जान नहीं गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अमल करते हुए, जिला प्रशासन प्रभावित इलाकों में लगातार नजर रखे हुए है और साथ ही बचाव कार्य, खाना बांटना, राहत कैंप लगाना, मेडिकल सुविधाएं देना और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, गुरुवार को 8,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया, जिससे सुरक्षित जगहों पर पहुंचाए गए लोगों की कुल संख्या 21,350 हो गई है।
बाढ़ से प्रभावित जिले:
अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कौशाम्बी, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।
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