23,200 फीट की ऊंचाई पर फहराया तिरंगा, उत्तर मध्य रेलवे की सोनिया कुशवाहा ने फतह किया माउंट कुन
खबर सार :-
उत्तर मध्य रेलवे की हॉकी खिलाड़ी और पर्वतारोही सोनिया कुशवाहा ने 7 सितंबर 2026 को 23,200 फीट ऊंचे माउंट कुन की चोटी फतह कर तिरंगा फहराया।
खबर विस्तार : -
झांसी: साहस, दृढ़ संकल्प और अदम्य हौसले की मिसाल पेश करते हुए उत्तर मध्य रेलवे की प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी एवं पर्वतारोही सोनिया कुशवाहा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सोनिया ने लद्दाख की जंस्कार रेंज में स्थित दुनिया की कठिन पर्वत चोटियों में शामिल माउंट कुन की 23,200 फीट यानी 7,077 मीटर ऊंची चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर लिया। उन्होंने 7 सितंबर 2026 को पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराकर उत्तर मध्य रेलवे और भारतीय रेल का नाम रोशन किया।
माउंट कुन की चढ़ाई के दौरान सोनिया को बेहद चुनौतीपूर्ण बर्फीले रास्तों, ग्लेशियर क्षेत्र और कठिन मौसम का सामना करना पड़ा। तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कदम पीछे नहीं खींचे और लगातार आगे बढ़ती रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत और हौसले ने रंग दिखाया और उन्होंने दुनिया की ऊंची पर्वत चोटियों में शामिल माउंट कुन के शिखर पर पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय से शुरू हुआ था अभियान
सोनिया कुशवाहा के इस साहसिक अभियान की शुरुआत उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय से हुई थी। 21 अगस्त 2026 को आयोजित विशेष समारोह में उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज सौंपकर अभियान के लिए रवाना किया था। इस अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे खेल संघ के पदाधिकारी और प्रधान विभागाध्यक्ष भी मौजूद रहे। अधिकारियों और रेल परिवार ने सोनिया को अभियान की सफलता के लिए शुभकामनाएं दी थीं। मुख्यालय से रवाना होने के बाद सोनिया ने पर्वतारोहण अभियान के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कीं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ीं।
29 अगस्त से शुरू की माउंट कुन की चढ़ाई
सोनिया ने 29 अगस्त 2026 से माउंट कुन की कठिन चढ़ाई शुरू की। जैसे-जैसे उनकी ऊंचाई बढ़ती गई, चुनौती भी कठिन होती चली गई। बर्फ से ढके रास्ते, ग्लेशियर क्षेत्र और बदलता मौसम पर्वतारोहण के दौरान बड़ी बाधा बने। इन परिस्थितियों के बीच सोनिया ने धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखा। कठिन रास्तों को पार करते हुए वह लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं। कई दिनों के चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद 7 सितंबर को उन्होंने माउंट कुन के शिखर पर कदम रखा और वहां तिरंगा फहराया।
हॉकी के मैदान के बाद पर्वतारोहण में भी बनाई पहचान
सोनिया कुशवाहा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह खेल के मैदान में हॉकी के जरिए अपनी पहचान बना चुकी हैं। अब पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी उन्होंने अपने साहस और क्षमता का परिचय दिया है। 23,200 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराना न सिर्फ सोनिया की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उत्तर मध्य रेलवे के लिए भी गर्व का विषय है। उनके इस अभियान ने महिला सशक्तिकरण और युवाओं के बीच साहस, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया है। सोनिया ने दिखाया कि खेल और पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में महिलाएं भी अपनी क्षमता के दम पर नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं।
वापसी पर ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत
माउंट कुन की चोटी पर सफलता हासिल करने के बाद जब सोनिया वापस लौटीं तो रेल परिवार और नागरिकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। स्वागत समारोह में ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच सोनिया का माल्यार्पण किया गया। उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी गई। स्वागत के दौरान लोगों ने उनके साहसिक अभियान की सराहना की और इसे उत्तर मध्य रेलवे के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। सोनिया की सफलता से उनके साथियों और रेल कर्मचारियों में भी उत्साह का माहौल रहा।
उत्तर मध्य रेलवे ने दी बधाई
सोनिया कुशवाहा की इस उपलब्धि पर उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह, उत्तर मध्य रेलवे खेल संघ के अध्यक्ष शशि प्रकाश द्विवेदी, उपाध्यक्ष बी.पी. सिंह और महासचिव गौतम जैन समेत पूरे उत्तर मध्य रेलवे परिवार ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने सोनिया की उपलब्धि को साहस और समर्पण का उदाहरण बताया। माउंट कुन की चोटी पर तिरंगा फहराकर उन्होंने न सिर्फ अपने संस्थान बल्कि देश का भी गौरव बढ़ाया है।
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सोनिया कुशवाहा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का संकल्प रखते हैं। ऊंचाई, मौसम और कठिन रास्तों की चुनौतियों के सामने डटे रहकर उन्होंने साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। माउंट कुन की 23,200 फीट ऊंची चोटी पर फहराया गया तिरंगा सोनिया के साहस, मेहनत और लक्ष्य के प्रति उनके समर्पण की पहचान बन गया है।
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