गढ़चिरौली के भामरागढ़ में बाढ़ जैसे हालात, 525 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा

खबर सार :-

गढ़चिरौली के भामरागढ़ में लगातार पानी बरसने से यहां बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। यदि यूं ही और बारिश हुई तो आसपास के एरिया संपर्क से कट जाएंगे। प्रशासन ने 525 नागरिकों को निचले और जलभराव वाले स्थानों से हटा दिया है। उनको सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। इसी तरह कई और स्थानों में बाढ़ के चलते संकट गहराने लगा है।
निचली बस्तियों तक पहुंचा पानी, भामरागढ संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद

खबर विस्तार : -

गढ़चिरौली, छत्तीसगढ़ में हुई मूसलाधार बारिश का सीधा असर गढ़चिरौली जिले के दक्षिणी और अतिदुर्गम भामरागढ़ क्षेत्र दिखाई देने लगा है। यहां आवागमन पूरी तरह से बंद हो चुका है। प्रशासन के लिए इनसे संपर्क कर पाना भी कठिन हो रहा है। इसीलिए निचले और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर भेजा जा रहा है। 

बीजापुर में प्रशासन का ही सहारा बचा

एक ओर भामरागढ़ क्षेत्र में हालात खराब हैं, वहीं बीजापुर में भी बारिश से बाढ़ के हालात हैं। जिला कलेक्टर विश्वदीप के निर्देशों पर अधिकारी बराबर स्थानीय लोगों से संपर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दो दिनों से भारी बारिश के कारण यहां के हालात खराब हो रहे हैं। अगले दो दिनों में भी और बारिश होने की संभावना है। अगर किसी को किसी प्रेकार की परेशानी होती है तो उससे निपट पाना कठिन हो गया है। यद्यपि जिला प्रशासन ने बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए एक स्पेशल हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 

भामरागढ़ में आवागमन ठप होने से परेशान हैं लोग

गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ में आवागमन ठप है। पिछले दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते क्षेत्र की नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। इसका सीधा असर यहां के कई इलाकों में पड़ा है। बस्तियों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। इन हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल बचाव एवं राहत कार्य शुरू करा दिया है। इसके लिए उन्होंने अपने अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है।

शुक्रवार को बारिश देर रात तक जारी रही

बाढ़ से प्रभावित स्थानों में से 525 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। जिन क्षेत्रों में शुक्रवार को पानी बरसा, वहां यह कार्रवाई की गई है। इसका कारण है कि शुक्रवार दोपहर से शुरू होकर देर रात तक जारी रही। जहां कहीं खाली जमीन थी, वहां पानी भरा हुआ है। नदियों का पानी बाढ का रूप ले चुका है। तालाब पहले से ही भरे हुए हैं। बस्तियों के पानी को निकालने का और बंदोबस्त भी नहीं है।

यही कारण है कि बारिश के दौरान ही बाढ़ की स्थिति बन गई। जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा के मार्गदर्शन और तहसीलदार किशोर बागड़े के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन की टीमें बनाई गई। इन लोगों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। जहां कहीं उचित लगा, बाढ़ प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए सभी उपाय किए जाएंगे। 

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गढ़चिरौली जिले में डीएम ने बनवाई राहत टीम

डीएम की ओर से बनाई गई टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यही लोग जरूरत के अनुसार, राहत एवं बचाव कार्य पूरा करते हैं। बस्ती की एक छात्रा को बीमार होने की जानकारी पाकर प्रशासन की टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाया। इन दिनों रास्तों पर पानी होने से सबसे ज्यादा दिक्कत यही है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना कठिन हो गया।

बिनागोंडा आश्रमशाला में पढ़ने वाली एक बीमार छात्रा को एनडीआरएफ की टीम की मदद से गुंडेनूर नाला पार कराया गया। नाला पार करने के बाद परिजनों की सलाह पर उस छात्रा को लाहेरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। बाढ़ के कारण ज्यादातर रास्ते प्रभावित हैं। इसके बावजूद प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम लोगों की मदद कर रही है। किसी को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई है तो किसी को भोजन का बंदोबस्त कराया जा रहा है।

लगातार बारिश के कारण भामरागढ़ क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। उम्मीद है कि बारिश कम होने से धीरे-धीरे हालातों में सुधार हो जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से नदी-नालों और खाली इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन की ओर से की जा रही अपील

जिला प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि सरकारी सूचनाओं और निर्देशों का पालन करना होगा। यह परिस्थितियां किसी के लिए ऐसी नहीं हैं कि नदी-नालों को पार किया जाए। इनके किनारे जाने से भी बचें। पानी बह रहे रास्तों से यात्रा करना जोखिम भरा है। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर कम होने के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। इसलिए नागरिकों को सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है।

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