संसद की सीढ़ियों पर 'आरोप-प्रत्यारोप' का दंगल: BJP vs Congress की जुबानी जंग में उलझा देश

खबर सार :-

संसद परिसर में छात्रों के मुद्दों पर आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष। जानें कैसे BJP vs Congress का यह टकराव राजनीतिक रस्साकशी का नया केंद्र बन गया है।
संसद के बाहर छात्रों का 'दंगल': सत्ता पक्ष और विपक्ष में क्यों छिड़ी है जंग?

खबर विस्तार : -

New Delhi : संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन गलियारों की गर्माहट कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। मंगलवार का दिन संसद के मकर द्वार के लिए एक ऐसी तस्वीर का गवाह बना, जो यह बताने के लिए काफी है कि देश के दो प्रमुख राजनीतिक धड़े किस कदर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। यहाँ एक तरफ जंतर मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का शोर था, तो दूसरी तरफ झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के मसले पर NDA का आक्रामक रुख। इस पूरे घटनाक्रम में BJP vs Congress का संघर्ष अब छात्रों के कंधों से होकर गुजर रहा है, जहाँ दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को घेरेबंदी में फंसाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।

मकर द्वार पर शक्ति प्रदर्शन का नया फॉर्मूला

संसद का मकर द्वार अक्सर सांसदों के आने-जाने का रास्ता होता है, लेकिन मंगलवार को यह अखाड़ा बन गया। एनडीए के सांसद लाइब्रेरी की तरफ से मार्च करते हुए मकर द्वार पर पहुंचे। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जो सीधे तौर पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल खड़े कर रहे थे। दूसरी ओर, विपक्षी दल जंतर मंतर पर छात्रों के दमन का मुद्दा लेकर खड़े थे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर दोनों पक्षों को अलग करना इस बात का सबूत था कि संसद के भीतर चल रही वैचारिक लड़ाई अब बाहर सड़क की तरह आक्रामक हो चुकी है। यह मंजर साफ़ बयां करता है कि सत्ता पक्ष अब विपक्ष के 'जवाब मांगो' वाले नैरेटिव को उसी के पाले में धकेलने की रणनीति पर काम कर रहा है। BJP vs Congress के इस महासमर में अब हर राज्य की घटना एक हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही है।

झारखंड बनाम दिल्ली: क्या विपक्ष का 'डबल स्टैंडर्ड' पकड़ में आ गया?

बीजेपी सांसदों का बड़ा हमला इस बात पर है कि राहुल गांधी दिल्ली में छात्रों के साथ तो खड़े दिखते हैं, लेकिन झारखंड की जमीन पर जब लाठीचार्ज और आंसू गैस चलती है, तो उनकी आवाज क्यों दब जाती है? निशिकांत दुबे और अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं ने जिस तरह देवेंद्र नाथ महतो और झारखंड के छात्रों के मामले को संसद की दहलीज तक पहुंचाया, वह रणनीति स्पष्ट करती है। एनडीए का कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में तो नैतिकता की बात करते हैं, लेकिन अपने गठबंधन की सरकारों में पुलिसिया दमन पर वे 'सेलेक्टिव' हो जाते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्री के सीधे नियंत्रण में है, इसलिए जिम्मेदारी अमित शाह की है। लेकिन इस तर्क के बरक्स सत्ता पक्ष यह कह रहा है कि यदि आप 'लोकतंत्र के रक्षक' होने का दावा करते हैं, तो राज्य दर राज्य अपना रुख न बदलें। BJP vs Congress की इस खींचतान में वास्तव में छात्र पिस रहे हैं और राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं।

राम मंदिर चंदे की गूंज: पुराना मुद्दा, नई चुनौती

इस शोर-शराबे में राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी शामिल है। विपक्ष इसे एक बड़ा 'स्कैम' बताकर सरकार की घेराबंदी करना चाहता है। हालांकि, बीजेपी इसे पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की हताशा बता रही है। संसद के अंदर चर्चा की मांग और बाहर नारों की गूंज ने यह साफ कर दिया है कि मानसून सत्र का अंतिम सप्ताह किसी बड़े समझौते की उम्मीद नहीं जगा रहा। सत्ता पक्ष का स्पष्ट संदेश है कि यदि वे चर्चा के लिए तैयार हैं, तो विपक्ष भाग क्यों रहा है? वहीं विपक्ष का तर्क है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, BJP vs Congress के बीच का यह राजनीतिक दांव-पेच किसी भी समाधान तक पहुंचने के बजाय केवल सुर्खियों और टीवी डिबेट्स के लिए शोर पैदा कर रहा है। जब सत्ताधारी दल और प्रमुख विपक्षी दल दोनों ही अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से 'छात्रों के हितों' को ढाल बनाने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए एक चिंता का विषय है।

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