Congress Protest : लाठीचार्ज के विरोध में संसद से पीएम आवास तक विपक्ष का मार्च, कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये पांच मांगे
खबर सार :-
NEET में कथित धांधली और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने संसद से पीएम आवास तक मार्च निकाला। कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित धांधली और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद भवन से प्रधानमंत्री आवास की ओर पैदल मार्च निकाला। हालांकि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास के निकट रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी नेता और सांसद वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए।
प्रधानमंत्री मंत्री और गृहमंत्री से इस्तीफे की मांग
धरने के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का विषय बताते हुए कहा कि यह केवल कुछ छात्रों का मामला नहीं, बल्कि देश के हर परिवार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की मांग कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और सरकार इस पूरे मामले पर जवाब देने से बच रही है।
इससे पहले कांग्रेस ने लोक कल्याण मार्ग तक मार्च निकालकर भी विरोध प्रदर्शन किया था। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहां देर शाम तक धरना जारी रखा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी सहित कई सांसद जमीन पर बैठ गए और प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
धरने के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने के लिए पहुंचे। सूत्रों के अनुसार उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर प्रदर्शनकारियों की मांगों पर चर्चा की। हालांकि दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी और विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
कांग्रेस ने केंद्र के सामने रखीं पांच मांगे
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में इस पूरे मामले पर बयान दिए जाने, संसद में विस्तृत चर्चा कराने, छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुनकर समाधान निकालने तथा प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल है।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि चर्चा कराने के लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि जब लाखों छात्रों के भविष्य का सवाल हो, तब संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार इस संकट पर चुप्पी साधे हुए है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं और उन पर लाठीचार्ज किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और इस तरह की कार्रवाई को तत्काल रोकने की अपील की।
निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस का आरोप है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने सख्ती बरती। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों के खिलाफ बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग दोहराई।
विपक्ष के इस प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। संसद मार्ग, लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री आवास के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए। बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया, जिसके बाद विपक्षी नेता वहीं धरने पर बैठ गए।
NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है। वहीं सरकार की ओर से अब तक इन मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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