दुश्मन को एक बार माफ करो, दोस्त को दो बार, गद्दार को कभी नहीं: किरेन रिजिजू

खबर सार :-

लोकतंत्र की वकालत करने वाले देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहते हैं। वह इसमें युवाओं को आगे कर सत्ता तक पहुंचना चाहते हैं।
विपक्ष और प्रशांत भूषण के खिलाफ देशभर में आक्रोश, भाजपा का आरोप.दिमागी नक्सलवाद

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रिजीम चेंज की वकालत करने वालों पर निशाना साधा है। उन्होंने भारत के लोगों से अपील की है कि वे गद्दारों को कभी माफ न करें। यह बयान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के सरकार बदलने वाले बयान पर छिड़े सियासी विवाद के बीच आया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन हालातों को देखते हुए यह बयान दिया है, जो आंदोलन तो ले आए, लेकिन उनका मकसद साफ नहीं है। बांग्लादेश के उपद्रव को नेहा बोरा अच्छा बताती हैं।

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चुनावी प्रक्रिया को धोका देने की मंशा रखती हैं। किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, “प्यारे देशभक्त भारतीयों, याद रखें, अपने दुश्मनों को एक बार माफ करो, दोस्तों को दो बार, लेकिन गद्दारों को कभी नहीं। आज प्रशांत भूषण भूल रहे हैं कि संवैधानिक व्यवस्था में उनको क्या बोलना चाहिए? जिस पार्टी का काम उसके अनुसान न हो या चुनाव हार जाए, वह लोकतंत्र बचा रहा है। इनके ही इरादों पर केंद्रीय मंत्री का यह बयान आया है। उन्होंने प्रशांत भूषण की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक वीडियो शेयर किया।

भूषण का 2011 का एक बयान भी जारी किया गया

इसमें वरिष्ठ वकील ने खुलेआम रिजीम चेंज की मांग को स्वीकार किया था। हद तो तब कर दी, जब वह इसी बात को दो बार बोले। इस दौरान भूषण का 2011 का एक बयान भी जारी किया गया। यानी उनके पास विवादित बयानों के अलावा कुछ अच्छा नहीं रहता है। कश्मीर वाले बयान का वीडियो भी शेयर किया था। इसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था, “अगर कश्मीरी लोग अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें अलग होने दें। प्रशांत देश का मतलब नहीं जानते हैं? उनके बयान से तो यही लगता है। बहरहाल, आज देश के लाखों युवा प्रशांत को पानी पी पीकर कोस रहा है।

राजनाथ सिंह ने दिया करारा जवाब

एक अन्य पोस्ट में रिजिजू ने इस सियासी लड़ाई को तीखे शब्दों में बताया। संविधान का समर्थन करने वालों और अराजकता फैलाने वालों के बीच फर्क बताया। रिजिजू का कहना है कि लड़ाई की रेखा खिंच गई है। यह दिमागी नक्सल बनाम देशभक्त भारतीय है। देश का जो माहौल है, उसमें यह कैसा गठबंधन? देश का हाल खराब कर भला देश भक्त कैसे बना जा सकता हैं। अब जेन जी के सहारे के अलावा पार्टियों के पास कुछ भी नहीं बचा है। इस पूरे मामले ने रिजीम चेंज की मांग के अर्थ और असर को लेकर सियासी बहस छेड़ दी है।

राजनाथ सिंह का कहना था कि विपक्ष की लड़ाई का एकमात्र मकसद अव्यवस्था पैदा करके सत्ता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि ऐसा सोचने वाले देश को कमजोर करना चाहते हैं। बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि रिजीम चेंज की वकालत करने वालों को देश को जवाब देना पड़ेंगा। 

देश में एक नए विवाद को जन्म दे दिया

प्रशात के लिए कितने सवाल होंगे, वह जवाब देते थक जाएंगे। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने विपक्ष और प्रदर्शन के आयोजकों पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। राजनाथ सिंह भी आज खुलकर बोले। लखनऊ में उन्होंने प्रेस के बीच गंभीर बात कही। उन्होंने कहा कि रिजीम चेंज शब्द का इस्तेमाल दिखाता है कि प्रदर्शनकारियों का मकसद अराजकता फैलाकर सत्ता पर कब्जा करना है। राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी इस तरह रायबरेली भी नहीं जीत पाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष न तो चुनाव आयोग को हटाना है, न एसआईआर से नाराजगी है, उनका मकसद साफ है। जो वह बोल रहे हैैं। 

वैसे तो देश का जो माहौल चल रहा है, उसमें प्रशांत को इसमें नहीं बोलना चाहिए था। वह कोई राजनीतिक या समाज सुधारक नहीं हैं। उन्होंने देश में एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। इससे पहले भी वह कई मामलों में विवादित रहे हैं। आज देश का युवा उनसे यही पूछ रहा है, क्या प्रशांत इसी तरह की वकालत करते हैं? क्योंकि उनका एक मामला पुनर्विचार याचिका का था। रात में कोर्ट खुली थी। सत्ता परिवर्तन के लिए अगर यूं ही यही सिस्टम रहा, तो फिर चुनाव कराने की क्या जरूरत है। इन प्रश्नों का उत्तर शायद ही प्रशांत भूषण के पास हो। 

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