मप्रः कोसमी में मकान-खेत उजड़ने पर भड़का आक्रोश, 5,000 आदिवासियों का भोपाल कूच

खबर सार :-

भोपाल, मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्राम कोसमी में आदिवासियों पर कार्रवाई ने तो लोगों को दहला दिया है। मकान गिरा दिए,यही नहीं खेत की फसल भी खराब कर दी। इसक कार्य के विरोध में पांच हजार से ज्यादा आदिवासी भोपाल की ओर पैदल कूच कर रहे हैं।
एमपी के मुख्यमंत्री से सवाल करेंगे 5000 आदिवासी, पैदल पहुंचकर भोपाल में मांगेंगे जीने का हक

खबर विस्तार : -

भोपाल, 5000 से ज्यादा किसानों ने मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। यह लोग आदिवासी समाज के हैं। इनका आरोप है कि वन निगम के आदेश पर उनके मकान तोड़ दिए गए। पेट भरने के लिए केवल खेती एक सहारा थी, उसमें खड़ी फसल को भी कुचल दिया गया। इन आदिवासियों का सरकार से केवल एक मांग है कि मुख्यमंत्री यह बताएं कि इन्हें जीने का अधिकार है या नहीं?

हजारों की संख्या में आदिवासी पैदल  कूच कर गए

बहरहाल यह इस जवाब के लिए हजारों की संख्या में आदिवासी पैदल कुच कर गए हैं। ग्राम कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़ने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हो रहा है। यह कार्रवाई कई घरों में की गई है। इसलिए आसपास के ग्रामीण संगठित हो गए और अब करीब 5000 से ज्यादा लोगों ने पैदल ही मार्च करना शुरू कर दिया है। गुरुवार की रात उनक जत्था कोनाकझीर रुक। इनकी सरकार की कोई मांग नहीं है। यह केवल मुख्यमंत्री से पूछने जा रहे हैं कि उनके घरों को क्यों तोड़ा गया है? उनकी फसलों को क्यों कुचला गया है?

और यह अगर सब किया गया है तो सरकार बताए कि हमको जीने का अधिकार है या नहीं है? यह आदिवासी 17 अक्टूबर को भोपाल में प्रदर्शन भी करेंगे और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मिलेंगे। उनके हाथों में खेतों और मकान की जमीन से संबंधित कागज है। मध्य प्रदेश में कई सालों तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को इस बात की जानकारी हुई, तो वह गुरुवार की रात एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिलने के लिए गए। इसमें गांव के लोग भी पहुंचे हुए थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ बैठक हुई।

प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव सहित अनुसूचित जाति समुदाय की कई बुजुर्ग लोग भी मौजूद थे। किसानों ने कहना की सरकार की कार्रवाई उचित है या अनुचित? हमें इससे ज्यादा रुचि नहीं है लेकिन हम लोग यहां बचपन बिताए हैं। मकान को तोड़ दिया गया, हम कहां रहने के लिए जाएं? प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ यादव को सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कुसमी ग्राम में बीते दिन हुए घटनाक्रम की जानकारी दी और बताया कि जनजाति समुदाय के लोग यहां पर रहते हैं।

किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा

प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि वहां से आदिवासी समुदाय के लोगों का एक ज्ञापन आया है। वह लोग भी आपसे मिलने के लिए आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे प्रकरण की जांच करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। 12 परिवारों के मकान तहस-नहस कर दिए गए। उनके खेतों में खड़ी फसल को भी कुचल दिया गया। गांव में आक्रोश फैला तो लोगों की संख्या बढ़ती गई और उसके बाद धरना शुरू हो गया।

आदिवासियों के मकान तोड़े जाने की खबर जब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वर्तमान में केंद्रीय किसान कृषि मंत्री को हुई तो उन्होंने इस घटना पर बहुत नाराजगी जताई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतहा हो गई। इलाके भर के लोग प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री आवास पहुंच रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है की मकान और खेत की जमीन की कार्रवाई उनके सामने रहने खाने और जीवन गुजारने का साधन कुछ भी नहीं है।

वन विकास निगम की कार्रवाई का विरोध चल रहा

आदिवासियों ने न्याय की मांग की है और उनका सवाल वह बार-बार यही कह रहे हैं कि हमें यह बताया जाए कि जीने का हक मुझे है या नहीं तोड़े जाने की विरोध में 5 दिन तक धरना चला रहा, लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं गया। लोगों का कहना है कि मकान और खेती की जमीन तो चली गइर्। जीवनी अभ्यारण क्षेत्र की 35 से अधिक गांव के आदिवासी न्याय की मांग लेकर भोपाल पदयात्रा पर निकले हैं। इनमें महिलाएं हैं। बुजुर्ग और बच्चे भी हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर हैं। यह लोग नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर पहुंच रहे हैं।

 इनके पास डीजे वाहन भी है। सुरक्षा के लिए पुलिस के लोग भी इनके साथ हैं। वन विकास निगम की कार्रवाई का विरोध चल रहा है। वही जीवनी अभ्यारण की 35 से अधिक गांव की हजारों आदिवासी अपना सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें न्याय दिया जाए। आंदोलनकारी ने ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव उनकी पीड़ा सुनें।

आंदोलनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के सामने अपने मकान और खेती से संबंधित पुराने दस्तावेज भी रखेंगे।इसी बीच गुरुवार की रात केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल, बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव सहित अनुसूचित जनजाति समुदाय के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित थे।

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