राहुल गांधी का मोदी-शाह पर बड़ा हमला: 'संसद में सामना करने की हिम्मत नहीं'
खबर सार :-
दिल्ली और झारखंड में छात्रों पर हुए हमले को लेकर Rahul Gandhi attack on Modi-shah की रणनीति क्या है? जानिए संसद में मचे घमासान और कांग्रेस की मांगों की पूरी रिपोर्ट।
खबर विस्तार : -
New Delhi : दिल्ली की सड़कों पर छात्रों के साथ जो कुछ भी घटा, उसकी गूँज अब संसद के भीतर तीखी बहस के रूप में सुनाई दे रही है। राहुल गांधी का तेवर बेहद आक्रामक है और उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने जिस तरह से राहुल गांधी का मोदी-शाह पर तीखा हमला का मोर्चा खोला है, उससे साफ है कि संसद का यह सत्र महज औपचारिक नहीं रहने वाला है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही संसद में आने और विपक्ष की आंखों में आंखें डालकर बात करने से कतरा रहे हैं।
क्या सरकारी मशीनरी का गुब्बारा फट चुका है?
राहुल गांधी ने बड़ी बेबाकी से कहा कि सरकार का जो एक कथित मजबूत और अपराजेय होने का गुब्बारा था, वह अब पूरी तरह फट चुका है। उनके अनुसार, दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल और कील वाली लाठियों से पिटाई इस बात का प्रमाण है कि सत्ता का संतुलन बिगड़ गया है। राहुल गांधी का मोदी-शाह पर तीखा हमला का मुख्य आधार छात्रों पर हुई बर्बरता है, तो उन्होंने यह भी जोड़ा कि आखिर वे कौन लोग थे जिन्होंने इस तरह की क्रूरता का आदेश दिया? यह सवाल देश की शांतिपूर्ण राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत है।
जिम्मेदारी से भागने का आरोप और इस्तीफे की मांग
विपक्ष की तरफ से सबसे बड़ी मांग यही उठ रही है कि गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में आएं और इस हिंसा की जिम्मेदारी लें। राहुल गांधी के अनुसार, स्थितियां दो ही हो सकती हैं—या तो गृह मंत्री ने खुद निर्देश दिए, या फिर उन्हें यह पता ही नहीं था कि उनके मातहत क्या कर रहे हैं। दोनों ही मामलों में नैतिक आधार पर उनका इस्तीफा बनता है। राहुल गांधी का मोदी-शाह पर तीखा हमला की इस कड़ी में कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया है कि वे केवल भाषण सुनने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि उन्हें दिल्ली से लेकर झारखंड तक छात्रों पर हुई लाठीचार्ज और हिंसा के लिए जवाब चाहिए। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाकर उन्होंने सरकार को एक और मोर्चे पर घेरने का प्रयास किया है।
लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं
झारखंड के छात्रों के प्रति अपनी सहानुभूति जताते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि हिंसा चाहे किसी भी रूप में हो और कहीं भी हो, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को दमन के जरिए खामोश करने की कोशिश सरकार की अयोग्यता को दिखाती है। राहुल गांधी का मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों का काम छात्रों की आवाज सुनना है, न कि उन पर गोलियां चलाना या लाठियां बरसाना। इस दौरान राहुल गांधी का मोदी-शाह पर तीखा हमला ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हर उस छात्र के साथ खड़ी है जो अपने हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा है।
आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस चुनौती को स्वीकार करेगी? राहुल गांधी जिस तरह से आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक पारा और ऊपर चढ़ेगा। सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से राहुल गांधी का मोदी-शाह पर तीखा हमला को आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे सरकार के लिए अब मौन साधे रखना मुश्किल होता जा रहा है। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या विपक्ष की इन मांगों को पूरा किया जाएगा या फिर विरोध का यह सिलसिला और भी तेज होगा।
यह भी पढ़ेंः- झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी का सरकार से संवाद का आग्रह, बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग गलत
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