पंजाब में नशे पर शिकंजा, फिर भी कायम चुनौती: 73 हजार NDPS केस और बढ़ता नार्को-टेरर नेटवर्क

खबर सार :-

पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज है। 2022 से अप्रैल 2026 तक 73,541 NDPS केस और 98,596 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं, जबकि ड्रोन तस्करी और अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क चुनौती बने हुए हैं।
पंजाब में नशे पर शिकंजाः 98 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य में नशे का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में है। केंद्र और राज्य की एजेंसियों की लगातार कार्रवाई, बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ जांच के बावजूद ड्रग तस्करी की चुनौती बनी हुई है। पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है।

कई जिले संवेदनशील और अति संवेदनशील घोषित

22-23 सितंबर को नई दिल्ली में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों की तीसरी राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों के साथ केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में ड्रग नेटवर्क और कार्टेल को खत्म करने, वित्तीय जांच मजबूत करने, सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर के नियंत्रण तथा सप्लाई और डिमांड रिडक्शन पर चर्चा हुई।

केंद्र ने सितंबर 2026 में देश के 73 जिलों को ड्रग्स के लिहाज से ‘अति-संवेदनशील’ और 274 जिलों को ‘संवेदनशील’ श्रेणी में रखा है। पंजाब के छह जिले अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, तरनतारन और लुधियाना अति-संवेदनशील श्रेणी में हैं। इनमें पांच जिले पाकिस्तान सीमा से सटे हैं, जबकि लुधियाना राज्य का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है।

पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ मुहिम के तहत कार्रवाई के आंकड़े भी बड़े पैमाने पर प्रवर्तन की ओर इशारा करते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अप्रैल 2026 के अंत तक राज्य में NDPS Act, 1985 के तहत 73,541 मामले दर्ज किए गए। यह 2017-21 में दर्ज 52,255 मामलों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इसी अवधि में गिरफ्तारियों की संख्या 68,064 से बढ़कर 98,596 हो गई, यानी करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

हालांकि, मामलों और गिरफ्तारियों में वृद्धि को केवल नशे के प्रसार का सीधा माप मानना उचित नहीं होगा। यह बढ़ोतरी पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा बढ़ाई गई कार्रवाई और दर्ज मामलों का भी परिणाम हो सकती है। इसलिए इन आंकड़ों से राज्य में नशे की वास्तविक खपत या लत की स्थिति का अकेले आकलन नहीं किया जा सकता।

ड्रोन बना सीमा पार तस्करी का नया माध्यम

पंजाब की भौगोलिक स्थिति उसे सीमा पार से होने वाली ड्रग तस्करी के लिए विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। हाल के वर्षों में तस्करी के तरीकों में ड्रोन का इस्तेमाल प्रमुख चिंता बनकर उभरा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि 2025 में देशभर में दर्ज 305 ड्रोन-आधारित ड्रग तस्करी घटनाओं में 298 पंजाब सीमा से संबंधित थीं। इन घटनाओं में करीब 460 किलोग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए, जिनमें लगभग 448 किलोग्राम हेरोइन बताई गई।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सीमा पार सक्रिय नेटवर्क ड्रोन के अलावा GPS-enabled consignments, encrypted communication और स्थानीय रिसीवर नेटवर्क जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे चुनौती केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्थानीय स्तर पर रिसीवर, वितरक, वित्तीय चैनल और हवाला नेटवर्क की पहचान भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और हवाला कनेक्शन

इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ने 17 सितंबर को गौरव दावर को PMLA के तहत गिरफ्तार किया। जांच के मुताबिक मामला अफगानिस्तान से आयात किए गए semi-processed talc stone consignments में छिपाकर हेरोइन लाने और दिल्ली, पंजाब तथा हरियाणा में मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़ा है। ED ने इस मामले में लगभग 89 करोड़ रुपये के अपराध से अर्जित धन की पहचान किए जाने की बात कही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, NIA ने इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों के खिलाफ छह चार्जशीट दाखिल की थीं। एजेंसियों का आरोप है कि नेटवर्क अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित होता था तथा इसमें वांछित आरोपी वितायश कोसर उर्फ ‘राजू दुबई’ और अन्य आरोपी शामिल थे। अदालत में दर्ज जांच सामग्री में हेरोइन को सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क स्टोन के रूप में छिपाकर भारत लाने की साजिश का उल्लेख मिलता है।

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू कथित वित्तीय कड़ी है। ED के अनुसार, जांच में कुल 89 करोड़ रुपये के अपराध से अर्जित धन का पता चला है, जिसमें NIA द्वारा पहले चिन्हित 74 करोड़ रुपये की हवाला राशि भी शामिल है। एजेंसी के मुताबिक, 74 करोड़ रुपये कथित तौर पर हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजे गए और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में इस्तेमाल हुए। ये एजेंसी के जांच संबंधी आरोप हैं और मामले में आगे की जांच जारी है।

कार्रवाई के बावजूद बड़ी चुनौती

पंजाब में बढ़ती जब्ती और गिरफ्तारियां बताती हैं कि एजेंसियां तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा रही हैं। लेकिन लगातार सामने आ रहे सीमा पार नेटवर्क, ड्रोन तस्करी और हवाला से जुड़े मामलों से यह भी स्पष्ट है कि ड्रग समस्या केवल स्थानीय अपराध या नशे की खपत तक सीमित नहीं है। इसमें अंतरराष्ट्रीय तस्करी, संगठित अपराध, डिजिटल संचार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कई स्तर जुड़े हुए हैं।

तीसरे ANTF सम्मेलन में केंद्र ने अगले वर्षों के लिए नेटवर्क को केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित न रखते हुए तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने, वित्तीय जांच मजबूत करने और राज्यों तथा केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

आने वाले महीनों में पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई कानून-व्यवस्था के साथ-साथ एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा भी बनी रहेगी। हालांकि चुनावी राजनीति से अलग, दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रवर्तन के साथ नशे की मांग कम करना, उपचार और पुनर्वास, युवाओं में जागरूकता तथा सीमा पार नेटवर्क की वित्तीय और लॉजिस्टिक कड़ियों को तोड़ना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
 

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