लुधियाना के 7 करोड़ डिजिटल अरेस्ट केस में ED की बड़ी कार्रवाई, कोलकाता से साइबर अपराधी गिरफ्तार

खबर सार :-

लुधियाना के 7 करोड़ डिजिटल अरेस्ट मामले में ED ने कोलकाता से सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर CBI अधिकारी और जज बनकर ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े होने का आरोप है।
ED की बड़ी कार्रवाई, कोलकाता से साइबर अपराधी गिरफ्तार

खबर विस्तार : -

कोलकाता/जालंधर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लुधियाना में हुए करीब 7 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट मामले में कोलकाता से एक कथित साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान सोहेल अख्तर उर्फ राजू के रूप में हुई है। आरोप है कि साइबर ठगों के एक गिरोह ने CBI अधिकारी और न्यायाधीश बनकर लुधियाना के एक नागरिक को धमकाया और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर उससे करोड़ों रुपये की ठगी की।

ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने 28 सितंबर को पश्चिम बंगाल में तीन ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इन तलाशी कार्रवाइयों के बाद सोहेल अख्तर को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई। यह कार्रवाई लुधियाना निवासी एसपी ओसवाल से जुड़े डिजिटल अरेस्ट मामले की जांच के तहत हुई है।

मामले में तीसरी गिरफ्तारी

ED के मुताबिक, सोहेल अख्तर इस मामले में गिरफ्तार किया गया तीसरा आरोपी है। इससे पहले एजेंसी ने रूमी कलिता और अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया था। रूमी कलिता की गिरफ्तारी 23 दिसंबर 2025 को, जबकि अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। सोहेल अख्तर को गिरफ्तारी के बाद जालंधर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उसे 6 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया है।

CBI और जज बनकर की गई थी ठगी

ED की जांच लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। जांच के दौरान एजेंसी को इसी गिरोह द्वारा कथित तौर पर किए गए डिजिटल अरेस्ट से जुड़े नौ अन्य साइबर अपराध मामलों की भी जानकारी मिली। जांच एजेंसी के अनुसार, एसपी ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने CBI और न्यायपालिका के अधिकारी बनकर डराया-धमकाया। इसके बाद उनसे करीब 7 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर ठगी गई। ED का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के इस मामले में साइबर अपराधियों ने सरकारी जांच और कानूनी कार्रवाई का डर पैदा करके पीड़ित को अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया।

दो कंपनियों के खातों में पहुंची रकम

ED ने बताया कि कथित अपराध से प्राप्त रकम को शुरुआत में Riglow Ventures Private Limited और Frozenman Warehousing and Logistics नाम की कंपनियों के बैंक खातों में जमा किया गया था। जांच के मुताबिक, इन बैंक खातों को गुवाहाटी के आरोपी रूमी कलिता और कानपुर के आरोपी अर्पित राठौर नियंत्रित करते थे। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी से हासिल रकम को किस तरह अलग-अलग खातों और माध्यमों के जरिए आगे भेजा गया।

APK एप्लिकेशन के जरिए रकम ट्रांसफर करने का आरोप

ED ने अपनी जांच में यह भी दावा किया है कि साइबर अपराध से हासिल रकम को तेजी से इधर-उधर करने के लिए 'AMM Forward' नाम के APK एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस एप्लिकेशन का इस्तेमाल कथित तौर पर धनराशि को तेजी से ट्रांसफर करने और लेनदेन की प्रक्रिया को संचालित करने के लिए किया गया। एजेंसी अब मामले में शामिल अन्य लोगों, बैंक खातों और कथित मनी ट्रेल की भी जांच कर रही है।

लुधियाना का यह मामला डिजिटल अरेस्ट के जरिए होने वाली साइबर ठगी के बड़े मामलों में शामिल है। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, न्यायपालिका या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इस मामले में ED की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

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