खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 15 फीसदी कम, उच्चतम स्तर से नीचे आए दाम

खबर सार :-

मिल से निकलने वाली एक्स चीनी की कीमतों में करीब 28 फीसदी की गिरावट हुई है। यह उच्चतम स्तर से 15 फीसदी नीचे आए हैं।
खुदरा चीनी की कीमतें करीब 15 प्रतिशत गिरीं, एक्स-मिल दाम भी 28 प्रतिशत घटा: केंद्र

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली : खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में घटोतरी दर्ज की गई है। अगस्त के उच्चतम स्तर से करीब 15 फीसदी इसमें गिरावट देखने को मिली है। मिल से निकलने वाली चीनी की एक्स चीनी की कीमतों में करीब 28 फीसदी की गिरावट हुई है। चीनी को लेकर इस समय देश में बहुत अशांति थी। बढ़ते दामों को लेकर लोगों में सरकार के खिलाफ आक्रोश था। इसी बीच नवरात्रि से पहले स्थिर दामों पर 3 हफ्तों बाद दाम कम होने की जानकारी दी गई है। 

यह भी पढ़ें:‘नदी के जलस्तर, तटबंधों और कटाव की लगातार करें निगरानी’, सीएम ने बाढ़ राहत कार्यों को लेकर दिए निर्देश

केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी गुरुवार को दी गई है। सरकार का कहना है कि अगस्त में चीनी की कीमती सबसे ऊपर थी। इसमें वर्तमान में खुदरा कीमतों में 15ः की गिरावट दर्ज की गई है। अभी उम्मीद की जा रही है कि चीनी के दावों में और भी गिरावट हो सकती है। मिल से निकलने वाली चीनी की कीमतों में उच्चतम स्तर से लगभग 28 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले तीन हफ्तों से कीमत स्थिति रहे हैं, लेकिन यह दाम काफी हुए थे। इसी बीच नवरात्रि के बाद से कई प्रमुख त्योहार भी आने हैं।

इसको लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई संगठनों ने नाराजगी जताई थी। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली की सरकारों ने चीनी को लेकर शक्ती भी बरतना शुरू किया था। इस दौरान कालाबाजारी की आशंकाओं के चलते कई जगह चेकिंग अभियान भी चलाया गया था। रकार की ओर से जानकारी दी गई है की कीमतों में गिरावट विभिन्न उपायों का असर है। इसमें चीनी को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना और बाजार में आवाजाही की व्यवस्था को आसान कर देने की प्रक्रिया के चलते चीनी के दामों में गिरावट हुई है।

चीनी आपूर्ति के तरीके सही किए गए  

इसके साथ ही आपूर्ति को सही तरीके से संचालित करने के प्रयास किए गए। बाजरों, गोदाम, दुकानों आद की समुचित निगरानी की गई।  किसी प्रकार की जमाखोरी ना हो सके, इसके लिए काम किया गया। इसके अलावा चीनी डीलरों के स्टॉक की अवधि भी सरकार की ओर से घटा दी गई थी। इसका बड़े स्तर पर असर देखने को मिला है। स्टॉक रखने की सीमा 1000 क्विंटल तय की है। यह नए नियम 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक लागू रहेंगे।

इसके साथ ही चीनी डीलरों को भी सचेत कर दिया गया है कि वह चीनी मिलने की तारीख से 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक नहीं रख पाएंगे। उन्हें देश में किसी भी जगह पर एक निश्चित सीमा में ही स्टॉक रखना है। इस अवधि के अंदर अपने स्टाफ को हटा देंगे अन्यथा उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय बाजारों पर भी सरकार की निगरानी रही है। उधर, कोलकाता और आसपास की मेट्रोपोलिटन इलाके के साथ-साथ असम आदि क्षेत्रों में 2000 क्विंटल रखने की सीमा तय की गई है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी मंगाई जाती है।

यह चीनी कोलकाता और असम में भी जाती है। इसके अलावा पूर्वी राज्य के कई क्षेत्रों में यहां की चीनी पहुंचती है। जिन क्षेत्रों में स्टॉक रखने के लिए छूट दी गई है, वहां की भौगोलिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर या फैसला किया गया है। असम में भौगोलिक चुनौतियां, ट्रांसपोर्टेशन और पूर्वोत्तर में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर ऐसे निर्णय लिए गए हैं। सरकार का कहना है कि चीनी हर क्षेत्र में हर व्यक्ति तक पहुंच सके, इसके लिए जमाखोरी पर अंकुश लगाने, सट्टेबाजों को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा चीनी का स्टॉक जमा करने से रोकना जरूरी हो गया है।

चीनी के दामों को कंट्रोल करने की मांग 

इसके अलावा इसकी मात्रा और सप्लाई चैन को व्यवस्थागत किया जा रहा है। उचित कीमतों पर कमोडिटी का लगातार उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं यदि 15 फीसदी कीमतें कम हुई हैं और दुकानदार इसे उपभोक्ताओं को आसानी से छूट में दे रहे हैं तो राहत महसूस होना स्वाभाविक है। इसका असर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और दिल्ली के जिलों में देखने को मिलेगा।

चीनी के दाम कम करने की मांग उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में कई स्थानों की गई। किसानों ने प्रदर्शन कर चीनी के दामों को कंट्रोल करने की मांग की थी। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जमाखोरों के खिलाफ शक्ती करने की बात कही थी। उसके निर्देश पर निगरानी व्यवस्था लागू हुई थी। वहीं, उत्तराखंड में भी सरकार की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद छापा अभियान चलाया गया था। 

यह भी पढ़ें: अमेरिका में अब AI का नाम होगा सुपर इंटेलिजेंस, Trump ने किए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर

अन्य प्रमुख खबरें