एनडीए के नेताओं ने साधा निशाना कहा, इंडिया गठबंधन नहीं, समोसा-चाय पार्टी कहिए
खबर सार :-
एनडीए के नेताओं ने इंडिया गठबंधन की बैठक और प्रदर्शन की निंदा की। नेताओं ने कहा जब चुनाव जीत जाते हैं, तब निर्वाचन आयोग को क्या कहते हैं?
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली, इंडिया गठबंधन की पिछले दिनों हुई बैठक के बाद अब एनडीए के नेता उन पर निशाना साथ रहे हैं। कई नेताओं ने अलग-अलग तरीके से इनके गठबंधन पर दावे किए हैं, लेकिन सबका कहना एक ही है, इंडिया गठबंधन बिखर चुका है।
एनडीए ने खोला इंडी के खिलाफ मोर्चा
इंडिया गठबंधन ने पिछले दिनों दिल्ली में एक बैठक की थी। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की थी। बैठक में भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कठघरे में खड़ा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा की मांग की। ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर लोकतंत्र को जकड़ने का आरोप लगाकर पांच मांगे उठाई थीं। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इंडिया गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
भाजपा को चुनाव जिताने का लगाया आरोप
छोटे से बड़े नेता तक, सब एकजुट होकर अपने गठबंधन की एकता को मिसाल के तौर पर देखने की नसीहत दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि इंडिया एलायंस का कोई दफ्तर है ना अध्यक्ष है। यह सिर्फ चाय समोसा पार्टी है। यह कभी-कभी इकट्ठे होते हैं और उनमें से एक दो बिखर जाते हैं। शाहनवाज हुसैन ने खड़गे की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधा। खड़गे ने कहा था कि इलेक्शन कमीशन भाजपा को चुनाव जीतने का काम कराता है।
100 सांसदों वाली पार्टी कह रही है आयोग गड़बड़
जवाब देते हुए शाहनवाज ने कहा की हार का ठीकरा इलेक्शन कमीशन पर फोड़ते हैं। फ्रस्टेशन में इस तरह का बयान देते हैं। खड़गे के इस वक्तव्य पर हुसैन ने कई और नेताओं को भी निशाने पर लिया है। उनका कहने का मतलब है कि संवैधानिक संस्थाओं पर से कांग्रेस का भरोसा उठ गया है। अपने हार की समीक्षा करने के बजाय वह जीतने वाले पर प्रहार करना चाहते हैं।
भाजपा सांसद भोला सिंह ने भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा और कहा कि लगातार देश में 63 साल कांग्रेस ने शासन किया। हिमाचल प्रदेश कर्नाटक तेलंगाना झारखंड में आज भी सत्ता में है। तमिलनाडु में उसका गठबंधन है। लोकसभा में 100 सांसद हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी चुनाव आयोग गड़बड़ है।
चुनावी संस्था का मजाक उड़ाती है कांग्रेस
चुनावी संस्था का मजाक उड़ाते हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने भी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया। इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि विपक्ष इस बात से बहुत खुश था कि मीडिया में ऐसी खबरें आई, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयुक्त के द्वारा स्पष्ट कर दिए जाने के बाद से उनमें बौखलाहट है। इस मंच पर निर्वाचन आयुक्त के सहयोगी भी मौजूद रहे। उन्होंने स्थिति स्पष्ट कर दिया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनके बीच कोई असहमति नहीं है।
एनडीए ने विपक्ष से लोकतंत्र का मापदंड पूछा
दरअसल, कैबिनेट सचिव के साथ उनका जो पत्राचार हुआ था, वह एक अधिकारी की पोस्टिंग से संबंधित था। रंजन ने आरोप लगाया है कि यह लोग किसी बात का सच नहीं जुटाते हैं। बस केवल हंगामा खड़ा करने की आदत है और वही काम करते हैं। इंडिया ब्लॉक कई बार बिखर चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और इनको अपनी ताकत दिखाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
इसके बाद भी उनके गठबंधन में अखिलेश यादव नदारद हैं। इंडिया गठबंधन के लिए यह चिंता का बड़ा कारण है कि उसके सहयोगी बिखर रहे हैं। भाजपा विधायक राम कदम ने भी गठबंधन के नेताओं पर निशाना साधा। कहा, झूठ और भ्रम फैलाने वाली राजनीति करते हैं। कभी न्यायपालिका पर प्रहार करते हैं तो कभी मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर। इनका लोकतंत्र किस मापदंड पर चलता है?
स्मृति ईरानी भी कर चुकी हैं राजनीतिक हमला
पिछले दिनों भाजपा की नेता स्मृति ईरानी ने भी कहा था कि कांग्रेस क्यों जिद पर तुली है। वह क्यों मरे हुए लोगों के नाम मतदाता सूची में देखना चाहती है? आंध्र प्रदेश से भाजपा ने कहा कि इंडी गठबंधन दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और बैठक कर रहा है। उनके गठबंधन के डीएम के नेता एमके स्टालिन कहां हैं? उन्होंने गठबंधन के अरविंद केजरीवाल, एनसी प्रमुख उमर अब्दुल्ला, झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेताओं का नाम लेकर पूछा कि यह सब कहां हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से अखिलेश यादव और महाराष्ट्र से शिवसेना के उद्धव ठाकरे कहां हैं? एनडीए की ओर से कर्नाटक भाजपा ने भी कांग्रेस से पूछा 1952 में क्या भाजपा सरकार थी? तब से लेकर आज तक आठवीं बार एसआईआर हो रही है। मरे हुए लोगों को हटाना क्या गलत है? फर्जी वोट हटाना गलत है?
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