पटना में वाम संगठनों का प्रदर्शन, जेपी गोलंबर पर पुलिस से झड़प, बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश

खबर सार :-

पटना में आज वामदलों ने प्रदर्शन किया। इनके साथ कई दलों के लोग थे। इन्होंने अपनी 27 मांगों में मुख्य निर्वाचनव आयुक्त का इस्तीफा भी मांगा।
वाम संगठनों का पटना में प्रदर्शन, 27 मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा भी शामिल

खबर विस्तार : -

पटनाः बिहार की राजधानी पटना में आज वमपंथी जन संगठनों के संयुक्त अभियान पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। सोमवार की सुबह सैंकड़ो की संख्या में प्रदर्शनकारी लोक भवन मार्च के लिए गांधी मैदान से निकले। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह आगे बढ़ रहे थे, तभी जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इसके बाद पुलिस की प्रदर्शनकारियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

पुलिस की सख्ती के आगे प्रदर्शनकारियों की नहीं चली

प्रदर्शनकारी आगे जाना चाहते थे, जबकि पुलिस ने वैरीकेडिंग कर इनको वहीं पर रोक लिया। दोनों पक्षों के बीच नोंकझांेक के साथ ही धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पीछे से प्रदर्शनकारियों ने अग्रिम पंक्ति में खड़े लोगों को धक्का देना शुरू कर दिया और बैरिकेड टूट गई। इस दौरान आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने घेराबंदी कर फिर रोक लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की भागदौड़ जैसे भगदड़ की स्थिति में बदल गई।

प्रदर्शन में किसान, खेत मजदूर, श्रमिक, महिलाएं, विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और छात्र भी शामिल थे। सुबह ही अपने नेताओं के आवाहन पर यह लोग गांधी मैदान में इकट्ठे हुए थे और लोक भवन की ओर बढ़ने लगे। ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन aisf, ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन aiyf, बिहार भारतीय खेत मजदूर यूनियन, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, बिहार महिला समाज, बिहार राज्यसभा, भारतीय खेत मजदूर यूनियन आदि संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

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नई शिक्षा नीति पर विराम लगाने की मांग

प्रदर्शनकारी डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़े, लेकिन यहां पर पुलिस ने सभी रास्तों को बंद कर रखा था। इनमें वित्त सहित शिक्षा का कलंक खत्म करा,े सुख का स्थाई निदान करो, आदि नारे लगती हुई महिलाएं आगे बढ़ रही थी। प्रदर्शनकारी हाथों में झंडा लहरा रही थी। इन लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा की भी मांग की। महिलाओं के साथ छात्रों ने भी मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की प्रतिक्रिया पर अपनी बात रखी और उसे तत्काल रद्द करने की मांग की।

पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम पहले से ही पुख्ता कर रखी थी। गांधी मैदान से लेकर जेपी गोलंबर और डाक बंगला चौराहे तक बड़े पैमाने पर पुलिस तैनात रही। प्रदर्शनकारी आगे जाने के लिए जिद कर रहे थे। संयुक्त संगठनों की ओर से लोक भवन को सौंप जाने वाले ज्ञापन में कई मांगे रखी गई थी। एक पदाधिकारी ने बताया कि सरकार से 27 मांगे की गई हैं। इनमें एसआईआर के दौरान हटाए गए अवैध मतदाताओं का मताधिकार भी शामिल है।

मनरेगा को उसके पुराने रूप में बहाल करने की मांग

 मनरेगा का मुद्दा इस ज्ञापन में था। इसके अंतर्गत मांग की गई की साल में 200 दिन काम दिया जाए। ज्ञापन में न्यूनतम मजदूरी, खेत मजदूर के लिए कानून बनाने की मांग के साथ दलितों पर अत्याचारों का मुद्दा उठाया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद आदि इस ज्ञापन में लिखे थे। इसके अलावा संगठनों ने बिजली अधिनियम 2025 भी ज्ञापन में उठाया।

इसमें प्रमुख बिंदुओं के अलावा सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक, महिला हिंसा अत्याचार और अंकुश तथा सांसद और विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग की गई। बिहार में समान स्कूल प्रणाली लागू करने, नई शिक्षा नीति वापस लेने के अलावा शिक्षा जगत की कई मांगे इन्होंने उठाई हैं। इसके अलावा विभिन्न संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए शहीद भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून बनाने की मांग की।

सरकारी उपक्रमों में रिक्त पदों पर नियुक्ति करने की मांग

सरकारी उपक्रमों में रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति करने की मांग भी इनके द्वारा की गई। बहरहाल, कानून व्यवस्था के चुस्त दुरुस्त होने के कारण यह लोग आगे नहीं बढ़ सके। उधर, स्थानीय पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन का मतलब मनमर्जी नहीं होता है। सरकार का आदेश है और हमलोग उसका पालन करने के लिए खड़े हैं। धरना-प्रदर्शन की छूट है। साथ ही लोकतंत्र में बात रखने का अधिकार सभी को है, लेेकिन कानून का पालन करते हुए मर्यादा में अपनी बात रखी जाए।   

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