तमिलनाडु: बांधों में जलस्तर गिरकर 34 प्रतिशत हुआ; पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ी

खबर सार :-

तमिलनाडु में जलाशय सूखने लगे हैं। इनमें पानी जमीन के निचले स्तर पर है। यहां लोगों को पीने के लिए भी पानी कम पड़ने वाला है।
तमिलनाडु में जलाशय सूखने से पानी की चिंता, नदियों के किनारे बनाए गए हैं बांध

खबर विस्तार : -

चेन्नई, तमिलनाडु में पानी का अकाल न पड़ जाए? ऐसी चिंता सताने लगी है। यहां के बांधों में पानी घट रहा है। इनकी क्षमता भी प्रभावित हो रही है। यहां के 90 बांधों में पानी का भंडार किया जाता है। इनकी निश्चित क्षमता में भी लगभग 34 प्रतिशत तक गिरावट पाई गई है। 

तमिलनाडु में विभिन्न कारणों से 63 जलाशय प्रभावित हुए हैं। इनकी पानी की क्षमता प्रभावित हुई है। कुल जगह में एक-चौथाई से भी कम है। यही हाल रहा तो सिंचाई के साथ ही पीने के पानी के लिए भी मोहताज हो सकते हैं। इन बांधों का भंडरण जल संसाधन विभाग की ओर से किया जाता है। 

90 बांधों में 224 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसीएफटी) पानी की जगह है। वर्तमान में इनमें 76.4 टीएमसीएफटी ही पानी है। इनका खाली रहना जल संसाधनों पर प्रश्न लगाने जैसा है। यह कई जिलों के लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इनपर पानी इस स्तर पर कम हो जाना व्यवस्था पर सवाल है।

नदियों के सहारे बनाए गए हैं बांध

अलग-अलग जगहों पर बनाए गए बांध नदियों पर उनके सहारे बनाए गए हैं। यह क्षेत्र की खेती का सहारा बनते हैं और इन जलाशयों से ही पीने का पानी घरों में पहुंचाया जाता है। जब कभी जरूरत पड़ती है, बिजली विभाग भी इनका ही इस्तेमाल कर जरूरतें पूरी करता है। यह मनुष्यों की जरूरतें पूरा करते हैं, साथ ही वन्य प्राणियों और पक्षियों के लिए भी जीवन देते हैं। इनके भरने के लिए अब तक बारिश ही सहारा है। जल संसाधन विभाग और पेयजल बोर्ड के अधिकारी भी अभी भी बारिश का ही इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पानी की इतनी कमी हो गई है कि यह  25 प्रतिशत के करीब ही बचा है। 

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सफाई में खर्च होंगे कई लाख रुपये

यहां के सभी बांधों में कुछ में पानी नाम मात्र का ही बचा है। यह नीचे जाने के कारण इस्तेमाल लायक नहीं बचा है। जलाशयों में गाद और मिट्टी दिखने लगी है। पीने का पनी शोधन करने में खर्च किए जाने वाले धन के अलावा अब मिट्टी और गाद भी निकलवानी पड़ सकती है। 17 बांधों में पानी का भंडार लगभग 17 प्रतिशत बताया जा रहा है। जलाशयों में गाद और कचरा जमा होने से स्थिति और खराब हो गई है। इनमें पानी कम होने का कारण तेज गमी और जलाशयों की सफाई न होना माना जा रहा है।

लंबे समय तक गर्मी बने रहने की वजह अल-नीनो का असर माना जा रहा है। जलाशयों में पानी की कमी को लेकर चिंता और बढ़ गई है। अब समस्या किसानों के सामने है। उनके खेतों को अभी से पानी का संकट झेलना पड़ रहा है। यही हाल रहा तो फसलें प्रभावित होने लगेंगी। बांधों से छोड़े जाने वाला  पानी अब इनको नहीं मिल रहा है। किसानों को उम्मीद है कि उत्तर-पूर्वी मानसून से उनको राहत मिल सकती है। 

जलाशय सूख जाने के बाद समस्या होगी

जलाशयों के पूरी तरह से सूख जाने के बाद गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसलिए यहां प्रशासन के सामने पानी के संसाधन चुनौती बने हुए हैं। दूर दराज से भी पानी इकट्ठा करने के कोई उपाय नहीं हैं। नदियों से पानी निकलना और उन जलाशय तक पहुंचाना भी काफी महंगा साबित होगा। खेतों से ज्यादा जरूरी पीने के लिए पानी जुटना है। यदि बारिश उनकी समस्याओं का निदान नहीं करता है तो वैकल्पिक व्यवस्थाएं जल्द ही की जाएंगी।

सालों से नहीं हुई जलाशयों की सफाई

जलाशयों का पानी इस स्तर तक घट गया है कि अब किसानों की जो फैसले खेतों में खड़ी हैं, उनके लिए पानी जुटाना मुश्किल पड़ रहा है। यदि निचले स्तर का भी पानी खत्म हो जाएगा, तब और दिक्कत बढ़ जाएंगी। इस पानी के हटने के बाद गाद निकाले जाने की कोशिश की जाएंगी। कई सालों से इसकी सफाई नहीं होने के कारण गंदगी और कचरे में पानी जल्दी सूख रहा है। हालांकि, इसकी सफाई करवाने में बड़ी मुश्किलों का सामना पड़ेगा।

जल संग्रहण के लिए अभी पानी नहीं मिल रहा है तो फिर एक बार कोशिशें जरूर की जाएंगी। गाद ताजा पानी के बहाव को रोक लेता है और पानी इकट्ठा होने की क्षमता को भी प्रभावित करता है, जिन जिलों में जलाशयों में पानी घटा है, वहां पर बारिश का इंतजार किया जा रहा है। घरों में भी पानी पहुंचाने के लिए यही माध्यम हैं। फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसमें की समस्याओं का जल्द निस्तारण किया जा सके।

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