हिमाचल में मानसून के दौरान 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान, सेब की कम पैदावार से बढ़ीं मुश्किलें
खबर सार :-
हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। वहीं, सेब की कम पैदावार ने राज्य सरकार और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।
खबर विस्तार : -
शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून की मार और सेब की कम पैदावार ने बागवानों और राज्य सरकार दोनों की चिंता बढ़ाई है। राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बुधवार को कहा कि मानसून के दौरान राज्य में 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की टीमें धर्मशाला और मनाली समेत आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। नेगी ने कहा कि टीमें अपने स्तर पर नुकसान का आकलन कर रही हैं।
सेब की 1.14 करोड़ पेटियां ही मंडियों तक पहुंचीं
नेगी ने कहा कि मौसम की मार से इस बार हिमाचल में सेब उत्पादन में भारी गिरावट आई है। अब तक करीब 1.14 करोड़ सेब की पेटियां बाजार में पहुंची हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक करीब 1.76 करोड़ पेटियां मंडियों में आ चुकी थीं। उन्होंने कहा कि पिछले साल करीब तीन से साढ़े तीन करोड़ पेटियों की बंपर फसल हुई थी, जो कई वर्षों में सबसे अधिक थी। इस बार उत्पादन काफी कम है और सीजन समाप्त होने तक करीब दो करोड़ पेटियां पहुंचेंगी या नहीं, यह अभी कहना मुश्किल है। बागवानों को राहत देने के लिए मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत खरीद का रेट बढ़ाने का प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा।
नेगी का चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना
राजस्व एवं बागवानी मंत्री ने चुनाव आयोग और भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से चुनाव आयोग के कमिश्नर भाजपा के इशारे और उसके एजेंडे के अनुसार काम करते रहे हैं। नेगी ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और भाजपा ने आयोग को कमजोर करने तथा अपने पसंदीदा अधिकारियों की नियुक्ति के लिए कानूनों में बदलाव किए हैं। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि करोड़ों लोगों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है। नेगी ने कहा कि लोगों के पास वोट देने का एक ही अधिकार है और भाजपा चुनाव आयोग के माध्यम से इसकी चोरी कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। निर्वाचन आयोग की ओर से SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है।
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किन्नौर विवाद पर बोले, अनुशासन सब पर लागू हो
किन्नौर कांग्रेस में चल रहे विवाद को लेकर कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल के अनुशासनहीनता संबंधी बयान पर नेगी ने कहा कि अनुशासन केवल उनके ऊपर लागू नहीं होता, बयान देने वाले नेताओं पर भी पार्टी का अनुशासन लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस के सच्चे सिपाही के रूप में अपनी बात पार्टी फोरम में रखी है और संबंधित नेताओं के सामने भी अपनी बात रखी है। नेगी ने कहा कि जब पार्टी फोरम की बातें बाहर आती हैं और उनसे बाहर सवाल पूछे जाते हैं तो उन्हें भी जवाब देना पड़ता है। उन्होंने राहुल गांधी के ‘स्लीपर सेल’ संबंधी बयान का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर ऐसे लोगों को हटाने की जरूरत है, जो पार्टी के हित में काम नहीं कर रहे। नेगी ने कहा कि ‘जयचंद’ और ‘भगोड़े’ लोगों से पार्टी नहीं बनेगी और कांग्रेस के संविधान व पार्टी के आदर्शों के अनुरूप संगठन को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल पर नेगी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उन्होंने कहा कि कई बार अंत तक भी मंत्री पद खाली रह जाता है। यदि मंत्रिमंडल का विस्तार करना है तो यह समय रहते होना चाहिए।
मानसून के दौरान 3,220 करोड़ का नुकसान
इस मानसून सीजन में अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 373 लोगों की जान जा चुकी है। चार लोग लापता हैं और 623 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में से 221 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि 152 लोगों की मौत भूस्खलन, अचानक बाढ़ (flash floods), डूबने, बह जाने, फिसलने और बारिश से जुड़ी अन्य दुर्घटनाओं के कारण हुई। इसके अलावा, मानसून के दौरान 581 मवेशियों की भी मौत हुई। राज्य को मानसून के कारण लगभग 3,220 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इस दौरान 146 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए और 530 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 18 दुकानें, छह पारंपरिक पानी की चक्कियां (घराट) और 497 पशु आश्रय स्थल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। लोक निर्माण विभाग (PWD) का अनुमान है कि सड़कों और पुलों को हुए नुकसान से लगभग 2,744 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
61 सड़कें बंद और छह पेयजल योजनाएं प्रभावित
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, मंगलवार सुबह तक भूस्खलन के कारण राज्यभर में 61 सड़कें बंद थीं। 126 बिजली ट्रांसफार्मर और छह पेयजल योजनाओं का कामकाज भी बाधित हुआ। बंद सड़कों में मंडी में 28, कांगड़ा में छह, कुल्लू में पांच, किन्नौर में पांच और सिरमौर में पांच सड़कें शामिल हैं। बारिश और भूस्खलन से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है; कई इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं, जिनमें मंडी जिले के गोहर और सुंदरनगर क्षेत्रों में 84, किन्नौर में 21, शिमला जिले के थियोग और रामपुर क्षेत्रों में 17 और चंबा के भरमौर क्षेत्र में चार ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इन खराबी के कारण संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र में छह पेयजल योजनाएं भी काम नहीं कर रही हैं।
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