Rahul Gandhi Balaghat दौरे पर सुरक्षा विवाद, कांग्रेस के आरोप और पुलिस का पत्र
खबर सार :-
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे से पहले उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस और स्थानीय पुलिस प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। राज्य कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
खबर विस्तार : -
बालाघाट (मध्य प्रदेश): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की जानकारी होने के बाद भी स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र राहुल गांधी के दौरे से अनभिज्ञ होने की बात कर रहा है। कांग्रेस ने इस स्थिति को सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही बताया है। वहीं दूसरी ओर, बालाघाट जिला पुलिस की ओर से 29 सितंबर को जारी एक पत्र भी सामने आया है। यह पत्र बैहर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक संजय उइके को भेजा गया था। इस दस्तावेज में पुलिस प्रशासन ने राहुल गांधी के आगमन को लेकर सुरक्षा संबंधी विभिन्न जटिलताओं और आवश्यक व्यवस्थाओं का उल्लेख किया है।
संवेदनशील क्षेत्र और सुरक्षा मानकों की जरूरत
पुलिस विभाग की ओर से जारी पत्र में बालाघाट जिले की भौगोलिक और सुरक्षा स्थिति का हवाला दिया गया है। पत्र के अनुसार, बालाघाट को अत्यंत संवेदनशील और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में वीआईपी तथा वीवीआईपी श्रेणी के जनप्रतिनिधियों के आगमन पर विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होते हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस श्रेणी के कार्यक्रमों के लिए कई तरह की पूर्व प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है। इनमें एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग (एएसएल), मार्ग का क्लीयरेंस, बम निरोधक दस्तों द्वारा गहन जांच, नक्सल विरोधी सर्च ऑपरेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे का निर्माण शामिल है। पुलिस के मुताबिक, कम समय में इन सभी व्यवस्थाओं, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन योजनाओं को अंतिम रूप देना प्रशासनिक स्तर पर अत्यंत जटिल होता है।
कांग्रेस का आरोप और पुलिस का रुख
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बालाघाट पुलिस और प्रशासन के रवैये को अत्यंत आपत्तिजनक करार दिया है। उनका कहना है कि राहुल गांधी के सार्वजनिक कार्यक्रम की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर सूचना न होने की बात कहना व्यवस्था की कमियों को दर्शाता है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले से संबंधित पत्र को मीडिया के साथ साझा करते हुए अपनी बात रखी है। दूसरी तरफ, पुलिस का स्पष्ट कहना है कि राहुल गांधी के 1 अक्टूबर को प्रस्तावित दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रम की जानकारी उन्हें विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हुई थी। हालांकि, आयोजकों की ओर से औपचारिक लिखित सूचना अथवा विस्तृत कार्यक्रम समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया था।
समन्वय और विस्तृत जानकारी की मांग
पुलिस द्वारा स्थानीय विधायक संजय उइके को लिखे गए पत्र में तुरंत प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने की बात कही गई थी। चूंकि राहुल गांधी को जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए पुलिस ने आयोजकों से कार्यक्रम की पूरी समय-सारणी, संभावित लोगों की उपस्थिति, स्वयंसेवकों की सूची और उनके मोबाइल नंबर मांगे थे। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा मानकों के तहत राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से मिलने वाले व्यक्तियों के नाम, संपर्क नंबर और आधार कार्ड संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। पुलिस के अनुसार, उस समय तक ये विवरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। पत्र में न्यायमूर्ति वर्मा आयोग की सिफारिशों और वीवीआईपी सुरक्षा संहिता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी भी कार्यक्रम का रूट मैप और समय-सारणी समय रहते स्थानीय प्रशासन को सौंपना आयोजकों की जिम्मेदारी होती है।
दौरे का उद्देश्य और क्षेत्र का महत्व
राहुल गांधी का यह बालाघाट दौरा जिले में आदिवासी समुदाय के बच्चों की मृत्यु से प्रभावित परिवारों से मिलने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया है। क्षेत्र में हाल के दिनों में संक्रामक बीमारियों, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो बैहर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधायक संजय उइके कर रहे हैं। वे वर्ष 2013 से लगातार इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतते आ रहे हैं और उन्होंने 2023 के राज्य विधानसभा चुनावों में भी अपनी जीत दर्ज की थी। मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला ऐतिहासिक रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में रहा है, जिसके कारण यहाँ जनप्रतिनिधियों और उच्च सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के दौरों के दौरान सुरक्षा बल विशेष सतर्कता बरतते हैं। न्यायमूर्ति वर्मा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई वीवीआईपी सुरक्षा संहिता के तहत जेड-प्लस श्रेणी के सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के भ्रमण के लिए अग्रिम सुरक्षा जांच (एएसएल) और स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ समय पर सूचना का आदान-प्रदान करना अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
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