भारत के दो अनमोल रत्न नीरजा और स्मित, जान पर खेलकर हवा में बचाई कई जिंदगियां
खबर सार :-
Indian Pilot Smit Machchhar: स्मित मच्छार और नीरजा भनोट ने जान पर खेलकर दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। भारत का मान बढ़ाने वाले इन दोनों अनमोल रत्नों ने अपने और पराए में फर्क न करते हुए बस अपना फर्ज निभाया और इंसानियत को जिंदा रखा।
खबर विस्तार : -
Indian Pilot Smit Machchhar: हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए विमान पर जब अचानक कोई संकट आता है, तो अक्सर दिमाग काम करना बंद कर देता है। यात्रियों के पास सोचने के लिए बहुत कम समय होता है। ऐसे पलों में, पायलट और चालक दल का एक फैसला सैकड़ों लोगों की जिंदगी का फैसला कर सकता है। ऐसे ही भारत के दो अनमोल रत्न हैं, स्मित मच्छार और नीरजा भनोट। जिन्होंने जान पर खेलकर दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। उन्होंने अपने हैं या पराए के बीच कोई फर्क नहीं समझा उन्हें याद रहा बस अपना फर्ज और मानवता की सेवा।
नीरजा ने जान पर खेलकर बचाई सैकड़ों जिंदगियां
1986 में नीरजा भनोट की बहादुरी से लेकर 2026 में कैप्टन स्मित मच्छार के साहस तक, अलग-अलग पीढ़ियों के ये दो नाम भारत का मान बढ़ाते हैं। आइए नीरजा से शुरुआत करते हैं: 5 सितंबर, 1986 को कराची एयरपोर्ट पर आतंकवादियों ने पैन एम फ्लाइट 73 को हाईजैक कर लिया था। विमान में सैकड़ों यात्री सवार थे और हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। उस समय, फ्लाइट की सीनियर पर्सर नीरजा भनोट ने असाधारण साहस दिखाया।
कॉकपिट क्रू के विमान से बाहर निकलने के बाद, यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी नीरजा और उनके साथियों पर आ गई। नीरजा ने आतंकवादियों की माँग पर यात्रियों के पासपोर्ट तो इकट्ठा किए, लेकिन अमेरिकी नागरिकों की पहचान छिपाने के लिए कई पासपोर्ट अलग रख दिए। जब हालात बिगड़े और विमान के अंदर गोलीबारी शुरू हुई, तो उन्होंने यात्रियों को इमरजेंसी एग्जिट की ओर जाने में मदद की।

ये भी पढ़ेंः- नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में टेक्नोलॉजी पर जोर, उच्च स्तर की युद्धक तैयारी और सैन्य क्षमताओं के विकास पर फोकस
पाकिस्तान ने भी नीरजा को किया था सम्मानित
इस मुश्किल घड़ी में, नीरजा ने अपनी जान पर खेलकर बच्चों और अन्य यात्रियों को बचाने की पूरी कोशिश की। वह खुद आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुईं और अपनी जान गंवा दी। भारत सरकार ने उनके साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। पाकिस्तान ने भी नीरजा को सम्मानित किया, जिन्होंने राष्ट्रीयता के भेदभाव की परवाह किए बिना अदम्य साहस दिखाया; उन्हें मरणोपरांत 'तमगा-ए-इंसानियत' से सम्मानित किया गया।
चार दशक बाद कैप्टन स्मित ने दोहराई वही कहानी
समय बदला और दौर गुजरे, लेकिन भारतीय जज्बा किसी भी स्थिति में जरूरत के हिसाब से आगे आने का संकल्प बना रहा। लगभग चार दशक बाद, एविएशन की दुनिया में एक और घटना हुई जहां एक भारतीय पायलट ने अपनी जान जोखिम में डालकर 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
30 सितंबर, 2026 की तारीख भारत की यादों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। इस दिन, दुबई से तेल अवीव (इज़राइल) जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट के कॉकपिट में हिंसा की एक गंभीर घटना हुई। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित तौर पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, स्मित ने विमान और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं छोड़ा। बाद में यात्रियों की मदद से एक बड़े हवाई हादसे को टाल दिया गया। घटना के बाद, फ्लाइट का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। स्मित को अस्पताल ले जाया गया, और उनकी हालत स्थिर बताई गई।
कौन हैं भारत के लाल स्मित मच्छार ?
कैप्टन स्मित मच्छार, जो फ्लाईदुबई की एक फ़्लाइट में चाकू से हुए हमले का शिकार हुए थे, पहले स्पाइसजेट के साथ काम कर चुके हैं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, मच्छार जून 2022 से फ्लाईदुबई के बोइंग 737 बेड़े में कैप्टन रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने मुंबई में स्पाइसजेट के साथ 11 साल बिताए, जहां उन्होंने सीनियर कमांडर के तौर पर काम किया। नवंबर 2020 से, वह लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की भूमिका में दूसरे पायलटों को ट्रेनिंग और उनका मूल्यांकन कर रहे थे। उनके प्रोफाइल से यह भी पता चलता है कि उनके पास 737-800 और 737 MAX 8 और 9 विमानों को उड़ाने का 9,750 घंटे का अनुभव है। मच्छार ने वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर डिग्री ली है। हालांकि, उनके प्रोफाइल में यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने विमान उड़ाने की ट्रेनिंग कहां से ली थी।

संकट में निभाया अपना कर्तव्य
नीरजा और स्मित से जुड़ी घटनाओं के बीच लगभग 40 साल का अंतर है। हालात भी बहुत अलग थे; नीरजा का सामना हथियारों से लैस हाईजैकर्स से हुआ था, जबकि स्मित का दुश्मन उनका अपना को-पायलट था। फिर भी, दोनों घटनाओं में एक बात समान थी: दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और संकट के समय अपने कर्तव्य का पालन करना।
नीरजा की कहानी सर्वोच्च बलिदान की कहानी बन गई; यात्रियों को बचाते हुए उन्होंने अपनी जान गंवा दी। हालांकि स्मित के मामले में भी खतरा उतना ही वास्तविक था, लेकिन वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने से पहले विमान को सुरक्षित उतारने और यात्रियों की जान बचाने में सफल रहे। इन घटनाओं की एक खास बात यह है कि दिखाई गई बहादुरी किसी युद्ध के मैदान में नहीं दिखाई गई थी। इसके बजाय, संकट के समय विमान की सीमित जगह में लिए गए पल भर के फैसलों ने इन भारतीयों को यादगार बना दिया।
ये भी पढ़ेंः- भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 13वीं आर्मी टू आर्मी स्टाफ वार्ता, रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर
अन्य प्रमुख खबरें
-
खुदरा चीनी की कीमतें करीब 15 प्रतिशत गिरीं, एक्स-मिल दाम भी 28 प्रतिशत घटा: केंद्र
2026-10-01
-
उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज की
2026-10-01
-
बैंक कर्मचारियों की हर शनिवार छुट्टी की रिपोर्ट को सरकार ने किया खारिज
2026-10-01
-
लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क बने उपसेना प्रमुख, संभालेंगे ये जिम्मेदारी
2026-10-01
-
पीएम ने यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने पर जारी किया स्मारक डाक टिकट
2026-10-01
-
तमिलनाडु में जलाशय सूखने से पानी की चिंता, नदियों के किनारे बनाए गए हैं बांध
2026-10-01
-
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पर अहम वार्ता
2026-09-30
-
इंडिया ब्लॉक की बैठक पर एनडीए नेता बोले, बिखर चुका है इंडी गठबंधन
2026-09-30
-
भागलपुर: आधी रात से बंद होगा विक्रमशिला पुल, प्रशासन ने जारी की वैकल्पिक व्यवस्था
2026-09-30
-
नकली दवा रैकेट में सातवीं गिरफ्तारी, मुख्य आरोपी
2026-09-30
-
नौसेना कमांडर्स कॉन्फ्रेंस: तकनीक को तेजी से अपनाने पर फोकस
2026-09-30
-
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में मत्स्य क्षेत्र को मिला बड़ा निवेश प्रस्ताव
2026-09-29
-
नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले के आरोपी संदीप मिस्त्री को लाया गया भारत
2026-09-29
-
IDFC First Bank घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी
2026-09-29
-
उज्जैन में शाही मस्जिद विवादः भारी पुलिस बल तैनात
2026-09-29