हरित उड़ान की ओर भारत की बड़ी छलांग: 104 हवाई अड्डे अब 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित
खबर सार :-
104 हवाई अड्डों का 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा पर संचालित होना भारत के हरित विकास अभियान की बड़ी उपलब्धि है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी। वर्ष 2030 तक सभी एयरपोर्ट को नेट-जीरो बनाने का लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर टिकाऊ विमानन अवसंरचना विकसित करने वाले अग्रणी देशों में शामिल कर सकता है।
खबर विस्तार : -
Green Airport Renewable Energy : भारत ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने सोमवार को घोषणा की कि देश के 104 हवाई अड्डे अब 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं। यह उपलब्धि भारत के विमानन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में तेजी से बढ़ते भारत का प्रमाण है।
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में देश का कोई भी हवाई अड्डा पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा पर संचालित नहीं होता था, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 104 हो गई है। उन्होंने कहा कि नया भारत केवल पर्यावरण संरक्षण की बातें नहीं कर रहा, बल्कि धरातल पर ठोस परिणाम भी दे रहा है। उनके अनुसार, विमानन क्षेत्र में हरित ऊर्जा का तेजी से विस्तार देश की सतत विकास नीति को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से परिचालन संबंधी बिजली
इन हवाई अड्डों की विशेषता यह है कि वे अपनी परिचालन संबंधी बिजली की पूरी आवश्यकता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी कर रहे हैं। इसके लिए एयरपोर्ट परिसरों में स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि अतिरिक्त आवश्यकता जलविद्युत जैसी स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से दीर्घकालिक खरीद समझौतों के माध्यम से पूरी की जा रही है। इससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आ रही है।
हर वर्ष लगभग दो लाख टन कार्बन उत्सर्जन
भारत के विमानन क्षेत्र में हरित ऊर्जा अपनाने की दिशा में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है। जून 2022 में यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बना जिसने अपनी पूरी बिजली की आवश्यकता सौर ऊर्जा और जलविद्युत के संयोजन से पूरी करनी शुरू की। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) के अनुसार, एयरपोर्ट की लगभग 6 प्रतिशत बिजली उसके अपने सौर संयंत्रों से प्राप्त होती है, जबकि शेष 94 प्रतिशत बिजली दीर्घकालिक जलविद्युत खरीद समझौते के तहत हासिल की जाती है। इस व्यवस्था से हर वर्ष लगभग दो लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान लगाया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
देश का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित एयरपोर्ट
इससे पहले वर्ष 2015 में कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने दुनिया के पहले पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित एयरपोर्ट के रूप में इतिहास रचा था। एयरपोर्ट ने अपनी सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता को लगातार बढ़ाया और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया। इस पहल को वैश्विक स्तर पर भी सराहना मिली और कई देशों ने इसे हरित विमानन अवसंरचना के उदाहरण के रूप में देखा। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय विमानन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को लेकर उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। जून 2026 में नागर विमानन मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि देश के 88 से अधिक हवाई अड्डे पहले ही 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा पर संचालित हो चुके हैं। अब यह संख्या बढ़कर 104 हो गई है, जो इस क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे बदलाव का संकेत देती है। सरकार का मानना है कि यह परिवर्तन न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि बिजली लागत में कमी, ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक बचत भी सुनिश्चित करेगा।
वर्ष 2030: हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाने का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक देश के सभी हवाई अड्डों को नेट-जीरो उत्सर्जन वाला बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत सौर ऊर्जा संयंत्रों का विस्तार, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, हरित भवनों का विकास, इलेक्ट्रिक ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिचालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह लक्ष्य तय समय पर हासिल हो जाता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा, जहां विमानन क्षेत्र बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा पर आधारित होगा। भारत की यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है। विमानन उद्योग को कार्बन उत्सर्जन करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में हवाई अड्डों का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ना न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि भविष्य की टिकाऊ अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
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