थोक महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, ईंधन-ऊर्जा 27% महंगी; खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेज उछाल
खबर सार :-
जून के आंकड़े बताते हैं कि भारत में महंगाई का दबाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज होने से आम उपभोक्ताओं और उद्योगों की लागत प्रभावित हुई है। आने वाले महीनों में खाद्य आपूर्ति, ईंधन कीमतों और वैश्विक बाजार के रुख पर महंगाई की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
खबर विस्तार : -
Wholesale Inflation June 2026: भारत में महंगाई के मोर्चे पर जून का महीना राहत देने वाला नहीं रहा। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर जून में बढ़कर 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मई में यह 9.68 प्रतिशत थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में कीमतों में भारी वृद्धि, खाद्य वस्तुओं की महंगाई तथा विनिर्माण लागत में बढ़ोतरी के कारण थोक महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रही।
डब्ल्यूपीआई के तीन प्रमुख घटकों में अलग-अलग रुझान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, डब्ल्यूपीआई के तीन प्रमुख घटकों में जून के दौरान अलग-अलग रुझान देखने को मिले। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर मई के 4.99 प्रतिशत से बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई। वहीं, ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में महंगाई 27.41 प्रतिशत रही, जो मई के 30.33 प्रतिशत की तुलना में कुछ कम जरूर है, लेकिन अब भी बेहद ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई दर लगातार दूसरे महीने 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोलियम उत्पादों, खनिजों, रसायनों और बेसिक मेटल की बढ़ती लागत ने थोक महंगाई को ऊपर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने से उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिसका असर बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी तेजी
खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी जून के दौरान उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। खाद्य उत्पादों में थोक महंगाई दर बढ़कर 6.14 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 4.49 प्रतिशत थी। डब्ल्यूपीआई में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी करीब 24.99 प्रतिशत है, इसलिए इस श्रेणी में बढ़ी महंगाई का सीधा असर समग्र थोक महंगाई पर पड़ा। इससे पहले जारी खुदरा महंगाई (सीपीआई) के आंकड़ों ने भी महंगाई के बढ़ते दबाव का संकेत दिया था। जून में खुदरा महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 4.38 प्रतिशत रही, जबकि मई में यह 3.93 प्रतिशत थी। हालांकि यह भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित सहनशील दायरे के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा रही हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी महंगाई की रफ्तार तेज
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी महंगाई की रफ्तार तेज हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई मई के 4.25 प्रतिशत से बढ़कर जून में 4.74 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.53 प्रतिशत से बढ़कर 3.92 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे साफ है कि महंगाई का असर गांव और शहर दोनों जगह महसूस किया जा रहा है। खाद्य महंगाई के मोर्चे पर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जून में खुदरा खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.78 प्रतिशत थी। सब्जियों, मसालों और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाला है।
जून में सालाना आधार पर सबसे अधिक महंगाई
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जून में सालाना आधार पर सबसे अधिक महंगाई कुछ चुनिंदा वस्तुओं में दर्ज की गई। इनमें चांदी की ज्वेलरी की कीमतों में 133.21 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा अदरक 50.41 प्रतिशत, सोना, हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी 36.82 प्रतिशत, टमाटर 31.92 प्रतिशत तथा किशमिश और मुनक्का 20.52 प्रतिशत महंगे हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल, खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, वैश्विक बाजार की स्थिति, मानसून की प्रगति और आपूर्ति व्यवस्था में सुधार से आगे चलकर राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
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