मध्य पूर्व में जंग की आहट से बाजार में हड़कंप! शेयर बाजार लाल निशान में खुला, ऑटो-फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली
खबर सार :-
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत को प्रभावित किया है। फिलहाल निवेशकों का फोकस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगा। यदि तनाव और बढ़ता है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market Crashed: : मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। निवेशकों ने जोखिम वाले सेक्टरों से दूरी बनाई, जिसके चलते ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
सेंसेक्स-निफ्टी की कमजोर शुरुआत
बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 344 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,272 अंक पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 143 अंक यानी 0.59 प्रतिशत फिसलकर 24,068 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे और बाजार का व्यापक रुख नकारात्मक नजर आया। केवल लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निफ्टी मिडकैप-100 इंडेक्स 137 अंक यानी 0.23 प्रतिशत गिरकर 62,906 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 68 अंक यानी 0.35 प्रतिशत टूटकर 19,355 अंक पर कारोबार करता दिखा। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में भी मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
सेक्टोरल इंडेक्स में शेयरों की स्थिति
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक दबाव ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों पर देखने को मिला। निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में करीब एक प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी इंडिया डिफेंस, रियल्टी, प्राइवेट बैंक, मीडिया, सर्विसेज, इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, इन्फ्रा, कंजम्प्शन, ऑयल एंड गैस तथा पीएसई इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि मेटल, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाजार को कुछ राहत देने की कोशिश की।
सेंसेक्स की कंपनियों में आईटी और फार्मा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। टीसीएस, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा स्टील, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, एनटीपीसी और आईटीसी के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर इंडिगो, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, टाइटन, पावर ग्रिड और इटरनल जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक संकेत भी उत्साहजनक नहीं
वैश्विक संकेत भी भारतीय बाजार के लिए उत्साहजनक नहीं रहे। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे, जबकि जकार्ता का बाजार सीमित बढ़त में रहा। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार भी सोमवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडेक्स 0.26 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी आधारित नैस्डैक 1.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे वैश्विक निवेशकों की सतर्कता साफ झलकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का है। लगातार तीसरे दिन अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा ईरान ने बहरीन में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का दावा भी किया है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ा सकती हैं। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं।
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