जून में बढ़ी महंगाई की रफ्तार: अदरक-टमाटर ने बिगाड़ा बजट, खुदरा महंगाई 4.38% पर पहुंची
खबर सार :-
जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत होने से संकेत मिलता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें अभी भी उपभोक्ताओं की चिंता बनी हुई हैं। अदरक और टमाटर जैसी आवश्यक वस्तुओं में तेज बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर असर डाला है। हालांकि महंगाई अभी आरबीआई के लक्ष्य दायरे में है, लेकिन आने वाले महीनों में इसके रुख पर सभी की नजर रहेगी।
खबर विस्तार : -
Retail inflation June 2026: भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत विकास दर बनाए हुए है, लेकिन महंगाई अब भी आम लोगों और नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक ओर निवेश, उत्पादन और सरकारी पूंजीगत खर्च अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं, वहीं खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा रही हैं। ऐसे माहौल में जून 2026 के खुदरा महंगाई के आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। महंगाई आरबीआई के लक्ष्य दायरे में होने के बावजूद अदरक, टमाटर और अन्य खाद्य वस्तुओं की महंगाई ने रसोई का बजट प्रभावित किया है, जिससे आगे की मौद्रिक नीति पर भी नजर रहेगी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 4.38 प्रतिशत (अनंतिम) हो गई, जबकि मई में यह 3.93 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी, खासकर अदरक और टमाटर जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के महंगे होने से महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई में बढ़ोतरी का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिला। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर मई के 4.25 प्रतिशत से बढ़कर जून में 4.74 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 3.53 प्रतिशत से बढ़कर 3.92 प्रतिशत दर्ज की गई।
खाद्य महंगाई ने बढ़ाई चिंता
मंत्रालय के आकंड़ों पर गौर करें तो, जून में खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 5.32 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.78 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के शुरुआती दौर में कुछ कृषि उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने और मांग बढ़ने के कारण खाद्य कीमतों में तेजी आई। रसोई में सबसे अधिक असर सब्जियों और मसालों की कीमतों ने डाला। खासतौर पर अदरक और टमाटर की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाया है।
इन वस्तुओं में सबसे ज्यादा महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में सालाना आधार पर सबसे अधिक महंगाई जिन पांच वस्तुओं में दर्ज की गई, उनमें सबसे ऊपर चांदी की ज्वेलरी रही, जिसकी कीमतों में 133.21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद अदरक की कीमतों में 50.41 प्रतिशत, सोना, हीरे और प्लेटिनम ज्वेलरी में 36.82 प्रतिशत, टमाटर में 31.92 प्रतिशत और किशमिश व मुनक्का में 20.52 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई। इन वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है।
कुछ वस्तुएं हुईं सस्ती
जहां कई जरूरी वस्तुएं महंगी हुईं, वहीं कुछ उत्पादों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा राहत आलू की कीमतों में मिली, जिसमें सालाना आधार पर 20.34 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा मटर 9.67 प्रतिशत, मोटर कार और जीप 6.89 प्रतिशत, जीरा 3.75 प्रतिशत तथा मोटरसाइकिल और स्कूटर 3.49 प्रतिशत सस्ते हुए। इससे उपभोक्ताओं को कुछ श्रेणियों में राहत जरूर मिली, लेकिन खाद्य महंगाई का समग्र असर अभी भी बना हुआ है।

किन सेक्टरों में कितनी रही महंगाई
सरकार द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार विभिन्न श्रेणियों में महंगाई दर अलग-अलग रही। फूड एंड बेवरेज में महंगाई 5.05 प्रतिशत, पान, तंबाकू और अन्य उत्पादों में 4.83 प्रतिशत, कपड़े और फुटवियर में 3.23 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवाओं में 1.42 प्रतिशत, शिक्षा सेवाओं में 3.34 प्रतिशत, परिवहन में 4.31 प्रतिशत तथा मनोरंजन, खेल और संस्कृति से जुड़े खर्चों में 1.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सबसे अधिक दबाव खाद्य और परिवहन से जुड़े खर्चों में बना हुआ है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई
राज्यों के स्तर पर भी महंगाई दर में बड़ा अंतर देखने को मिला। जून में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना में 6.36 प्रतिशत रही। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 5.39 प्रतिशत, तमिलनाडु में 5.24 प्रतिशत, ओडिशा में 5.15 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 5.09 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई। इन राज्यों में खाद्य वस्तुओं और आवश्यक उपभोक्ता सामानों की कीमतों में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी देखी गई।
आरबीआई ने जताई सतर्कता
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में कहा था कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद खुदरा महंगाई फिलहाल आरबीआई के लक्ष्य स्तर के भीतर बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ सकती है और यह आरबीआई की निर्धारित ऊपरी सीमा के करीब पहुंच सकती है। उनके अनुसार वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति संबंधी दबावों और खाद्य कीमतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। आरबीआई ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है और स्पष्ट किया है कि भविष्य के फैसले पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की दिशा पर आधारित होंगे।
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