Middle East Crisis से सहमा शेयर बाजार: सेंसेक्स 77 हजार के नीचे, निवेशकों की बढ़ी चिंता
खबर सार :-
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर कर दी। अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा, जबकि आईटी और फार्मा ने सीमित मजबूती दिखाई। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
खबर विस्तार : -
Stock Market crashed today: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सोमवार को बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 77 हजार के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 649 अंक यानी 0.84 प्रतिशत टूटकर 76,920 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 184 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,022 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
बाजार में शुरुआती घंटों से ही निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल देखने को मिला। वैश्विक अनिश्चितता और मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अधिकांश निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसका असर व्यापक बिकवाली के रूप में सामने आया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो बाजार में अस्थिरता कुछ समय तक बनी रह सकती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव
केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 280 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62,756 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 66 अंक यानी 0.37 प्रतिशत टूटकर 19,349 पर कारोबार करता दिखा। इससे स्पष्ट है कि बिकवाली का असर पूरे बाजार में व्यापक रूप से दिखाई दिया।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट
सोमवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंजप्शन सेक्टर पर रहा। इनके अलावा ऑटो, इंडिया डिफेंस, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, कमोडिटीज, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विसेज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस तथा एफएमसीजी सेक्टर के सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते रहे। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और वैश्विक जोखिम ने इन सेक्टरों में निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
आईटी और फार्मा ने दिखाई मजबूती
भारतीय शेयर बाजार में एक तरफ जहां अधिकांश सेक्टरों में कमजोरी रही, वहीं आईटी और फार्मा शेयरों ने बाजार को कुछ राहत दी। इन दोनों सेक्टरों के सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों में निवेशकों की रुचि और रक्षात्मक निवेश के तौर पर फार्मा सेक्टर की मांग ने इन शेयरों को सहारा दिया।
सेंसेक्स के इन शेयरों में रही हलचल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में टीसीएस, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड और एनटीपीसी के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर टाटा स्टील, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, एसबीआई, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस और आईटीसी समेत कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों पर भी दिखा असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के बाजारों में गिरावट रही, जबकि जकार्ता का बाजार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स और नैस्डैक दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में बढ़ा सैन्य तनाव है। कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर ताजा कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। जवाबी रुख अपनाते हुए ईरान भी कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस घटनाक्रम के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
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