लखनऊः होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रणेता डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती को आज विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। लखनऊ में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सकों, विशेषज्ञों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। डॉ. हैनिमैन की जयंती को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मान्यता दिलाने में स्वर्गीय डॉ. अनुरुद्ध वर्मा के अमूल्य योगदान को भी इस मौके पर याद किया गया। सुबह 10 बजे इंदिरा नगर स्थित अरुण होम्यो क्लिनिक पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान डॉ. सैमुअल हैनिमैन और डॉ. अनुरुद्ध वर्मा के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। माल्यार्पण करने वालों में डॉ. एस.पी. यादव (पूर्व डी.एच.एम.ओ.), डॉ. प्रियंका सिंह (एम.ओ.), डॉ. निशांत श्रीवास्तव, डॉ. अरुण वर्मा, डॉ. लता वर्मा, डॉ. अभिषेक वर्मा, अमित कुमार शुक्ला (ए.एस.एम., बायो इंडिया), और डॉ. मयूख रंजन (लैब तकनीशियन) सहित कई होमियोपैथी से जुडे व्यक्ति शामिल थे। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. हैनिमैन के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी खोज आज भी लाखों रोगियों के लिए वरदान साबित हो रही है। होम्योपैथी न केवल रोगों का उपचार करती है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य और कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मददगार है। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एक विचार-गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। इस गोष्ठी में होम्योपैथी के महत्व, इसके वैज्ञानिक आधार और आधुनिक चिकित्सा में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि होम्योपैथी एक सस्ती, सुरक्षित और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, जो विशेष रूप से पुरानी बीमारियों में कारगर सिद्ध होती है।
इसके साथ ही, सामाजिक जिम्मेदारी के तहत होम्योपैथिक चिकित्सकों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया। इन शिविरों में सैकड़ों रोगियों को मुफ्त परामर्श और उपचार प्रदान किया गया। शिविर में आए मरीजों ने होम्योपैथी के प्रति अपनी आस्था जताई और इसे एक समग्र उपचार पद्धति के रूप में सराहा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में बताया कि डॉ. हैनिमैन ने 18वीं सदी में होम्योपैथी की नींव रखी, जिसने विश्व भर में चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला दी। वहीं, डॉ. अनुरुद्ध वर्मा ने भारत में होम्योपैथी को लोकप्रिय बनाने और इसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी बदौलत ही डॉ. हैनिमैन की जयंती को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
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