शाहजहाँपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख जारी है। मंगलवार को जनपद के बंडा थाना क्षेत्र में जिला प्रशासन और पीलीभीत वन विभाग की एक संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में फगुनिहाई घाट गौशाला नदी के पास लगभग 42 एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर विभाग ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।
अख्तियारपुर क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई का नेतृत्व एसडीएम पुवायां ने किया। इस दौरान राजस्व विभाग की टीम और पीलीभीत वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से मौके पर कई थानों की पुलिस तैनात की गई थी। प्रशासन ने अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन पर चल रहे ट्रैक्टरों और बुलडोजर की मदद से पूरी भूमि को खाली कराया।
कार्रवाई के दौरान विवादित भूमि पर गेहूं की फसल लहलहा रही थी। अधिकारियों के निर्देश पर इस पूरी फसल को ट्रैक्टर-ट्रॉली चलाकर जोत दिया गया। वन विभाग ने भूमि को अपने कब्जे में लेने के बाद वहां अपनी सीमाएं निर्धारित कर दी हैं। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और किसान मौके पर एकत्र हो गए।
जब प्रशासन की टीम ने फसलों को नष्ट करना शुरू किया, तो प्रभावित किसानों ने इसका पुरजोर विरोध किया। इस दौरान किसानों और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। हालांकि, भारी पुलिस बल और प्रशासनिक सख्ती के आगे किसानों की एक न चली। किसानों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के यह कार्रवाई की गई है, जिससे उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच प्रभावित किसानों ने अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए शासन और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का स्पष्ट रूप से कहना है कि जिस भूमि पर बुलडोजर चलाया गया, उसके वर्ष 1952 के वैध पट्टे आज भी उनके पास मौजूद हैं। किसानों का तर्क है कि भूमि का यह पूरा विवाद वर्तमान में एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में मामले के लंबित रहते हुए इस तरह की एकतरफा कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित है। पीड़ितों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस बेदखली से पूर्व कोई भी आधिकारिक नोटिस नहीं दिया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई में लगभग 30 से 32 किसानों की मेहनत से तैयार की गई गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों के अनुसार, खेतों में खड़ी फसल के नष्ट होने से उन्हें करीब 25 लाख रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से अख्तियारपुर और आसपास के इलाकों में किसानों के बीच गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। जहाँ एक तरफ वन विभाग इसे सरकारी संपत्ति को बचाने की जरूरी प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान इसे अपने हक पर हमला मान रहे हैं। फिलहाल मौके पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान आना अभी शेष है।
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