पीलीभीत (कलीनगर)। जनपद में अवैध खनन का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस और प्रशासन की लाख सख्ती के दावों के बीच खनन माफिया सरकारी जमीन और कुदरती संसाधनों का सीना चीरने में मशगूल हैं। ताजा मामला कलीनगर तहसील के ग्राम भवानीगंज का है, जहां राजस्व विभाग की टीम ने छापेमारी कर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन का भंडाफोड़ किया है। हालांकि, मौके से वाहन फरार होने में सफल रहे, लेकिन जांच रिपोर्ट में 200 घन मीटर अवैध खनन की आधिकारिक पुष्टि हो गई है।
पिछले कई दिनों से भवानीगंज इलाके में रात के सन्नाटे को चीरती हुई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजें ग्रामीणों की नींद उड़ा रही थीं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राजस्व विभाग हरकत में आया। लेखपाल विवेक राणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने अचानक खनन पॉइंट पर दबिश दी। टीम के पहुंचते ही वहां भगदड़ मच गई। जब मौके पर मौजूद तथाकथित संचालकों, जितेन्द्र और शकील, से खनन से संबंधित वैध दस्तावेज और परमिट मांगे गए, तो वे बगले झांकने लगे। पर्याप्त कागजात न होने पर टीम ने जब पैमाइश की, तो पाया कि माफियाओं ने करीब 200 घन मीटर मिट्टी और बालू का अवैध उत्खनन कर लिया था।
हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी छापेमारी के बावजूद एक भी वाहन या मशीन हाथ नहीं लग सकी। इस संबंध में उप-जिलाधिकारी (SDM) का तर्क है कि खनन में लगे वाहनों के चालक बेहद सतर्क थे और टीम के पहुंचने की आहट मिलते ही सभी वाहन लेकर फरार हो गए। हालांकि, लेखपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर अब कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है।
"अवैध खनन की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट तैयार कर थाना प्रभारी पूरनपुर को आवश्यक कानूनी कार्यवाही के लिए भेज दी गई है। इस सिंडिकेट में शामिल सभी लोगों की पहचान कर टीम गठित कर दी गई है।" - प्रशासनिक वक्तव्य
पीलीभीत में अवैध खनन का यह कोई पहला मामला नहीं है। कलीनगर से लेकर पूरनपुर तक और तराई के जंगलों से सटे इलाकों में खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो प्रशासनिक कार्रवाई का डर है और न ही कानून का। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यवाही के नाम पर अक्सर खानापूर्ति की जाती है, जिससे माफिया कुछ दिन शांत बैठने के बाद दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। आखिर क्या वजह है कि बार-बार जुर्माना भरने के बाद भी ये माफिया बेखौफ होकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं?
भवानीगंज के ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा का विषय है कि क्या यह जांच रिपोर्ट केवल फाइलों की शोभा बढ़ाएगी या फिर 'जितेन्द्र और शकील' जैसे चेहरों पर सलाखों के पीछे पहुंचने वाली कोई बड़ी कार्रवाई होगी। अक्सर देखा गया है कि रिपोर्ट थाने तक तो पहुंचती है, लेकिन 'ठोस पैरवी' के अभाव में माफिया फिर से मैदान में उतर जाते हैं।
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