श्रीगंगानगर: जिला प्रशासन अब आमजन की समस्याओं और राजस्व से जुड़े मामलों को लेकर पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सबसे ऊपर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रकरणों का निस्तारण केवल समय सीमा में ही नहीं, बल्कि पूरी निष्पक्षता के साथ होना चाहिए।
बैठक की शुरुआत में वर्ष 2026 के बजट घोषणाओं पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में प्रस्तावित विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए जहाँ भी भूमि की आवश्यकता है, वहां उपयुक्त भूमि का चयन कर उसके प्रस्ताव अविलंब शासन को भेजे जाएं। उन्होंने जोर दिया कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन न आए, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
राजस्व न्यायालयों में चल रहे पुराने मामलों, नामांतरण (Mutation), सीमांकन और रास्तों से जुड़े विवादों पर कलेक्टर ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि न्यायालयीन प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। ऑनलाइन पोर्टल और ई-फाइलिंग के जरिए प्राप्त आवेदनों को पेंडिंग न रखा जाए। किसान ई-गिरदावरी रिपोर्ट की सटीकता सुनिश्चित की जाए। डॉ. मंजू ने कहा, "प्रशासन का लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को राहत पहुंचाना है। यदि किसी नागरिक को मामूली काम के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो यह संबंधित अधिकारी की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न है।"
बैठक में सीएम थार योजना और डीएमएफटी (DMFT) के तहत चल रहे विकास कार्यों की भी बारीकी से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने उपखंड अधिकारियों (SDM) और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर कार्यों की गुणवत्ता की जांच करें। इसके अलावा, पेंशन वेरिफिकेशन और क्रॉप कटिंग प्रयोगों के दौरान भी अधिकारियों को स्वयं मौके पर उपस्थित रहने को कहा गया। प्रशासनिक सुधारों की कड़ी में कलेक्टर ने पीएम स्कूलों और गौशालाओं की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन संस्थानों का नियमित दौरा करें ताकि वहां की आधारभूत सुविधाओं में कोई कमी न रहे।
संपर्क पोर्टल और विधानसभा प्रश्नों के उत्तर देने में होने वाली देरी को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री (CM) स्तर के प्रकरणों और जिला स्तरीय जनसुनवाई में आए परिवादों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिले के प्रशासनिक अमले के प्रमुख चेहरों ने शिरकत की, जिनमें अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन) सुभाष कुमार, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (सतर्कता) रीना, अनूपगढ़ एडीसी अशोक सांगवान और सूरतगढ़ एडीएम दीनानाथ बाबल मुख्य रूप से मौजूद रहे। उपखंड स्तर के अधिकारियों में श्रीगंगानगर एसडीएम नयन गौतम, सूरतगढ़ एसडीएम भरत जयप्रकाश मीणा, पदमपुर एसडीएम अजीत कुमार और सादुलशहर एसडीएम रवि कुमार सहित रायसिंहनगर, विजयनगर, श्रीकरणपुर और घड़साना के उपखंड अधिकारियों व तहसीलदारों ने भाग लिया। श्रीगंगानगर जिला प्रशासन की यह सक्रियता स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले दिनों में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में न केवल तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। जिला कलेक्टर के इन कड़े निर्देशों से उम्मीद जताई जा रही है कि सीमांकन, नामांतरण और रास्ते जैसे विवादों में उलझे किसानों और आम नागरिकों को अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें जल्द बड़ी राहत मिलेगी।
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