झांसी: बुंदेलखंड के झांसी जिले सहित पूरे उत्तर भारत में इन दिनों सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती गर्म हवाओं (heatwave) ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब केवल सामान्य थकावट ही नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर चिकित्सीय स्थिति लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। जिले में लगातार बढ़ते पारे के बीच सरकारी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। इस भीषण मौसमी आपदा के कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जो सीधे तौर पर इस जानलेवा तापमान का शिकार बन रहे हैं।
स्थानीय जिला अस्पताल (District Hospital) और महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज (Medical College) की ओपीडी में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। मेडिसिन विभाग के गलियारों में सुबह से ही मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। आंकड़ों की मानें तो रोजाना करीब 500 से 600 नए मरीज केवल गर्मी जनित बीमारियों के कारण उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इस चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के कारण लोगों में उल्टी, दस्त, अत्यधिक तेज बुखार, बदन दर्द, गंभीर डिहाइड्रेशन (dehydration) और कमजोरी की शिकायतें देखने को मिल रही हैं। अस्पताल के बेड तेजी से भर रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण आम आदमी के शरीर में बेचैनी, घबराहट और अचानक शिथिलता आने की मुख्य वजह शरीर की आंतरिक प्रणाली का असंतुलित होना है।
चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिकित्सालयों की स्थिति यह है कि रोजाना 10 से 12 मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में आ रहे हैं, जिन्हें तुरंत वार्डों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। इन मरीजों में मुख्य रूप से बेहद तेज बुखार और लगातार उल्टी होने के कारण शरीर का तापमान अनियंत्रित हो जाता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में हाइपरथर्मिया कहा जाता है। इस संकट से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। जिन मरीजों की हालत अत्यधिक नाजुक पाई जा रही है, उन्हें तुरंत विशेष रूप से तैयार किए गए कोल्ड रूम (Cold Room) में स्थानांतरित किया जा रहा है। इन वातानुकूलित और ठंडे कमरों में मरीजों की चौबीसों घंटे विशेष डॉक्टरों की टीम द्वारा सघन निगरानी की जा रही है। राहत की बात केवल इतनी है कि लगातार की जा रही मॉनिटरिंग और उचित उपचार के चलते अधिकांश गंभीर मरीज एक से दो दिनों के भीतर रिकवर हो जा रहे हैं और उन्हें छुट्टी दी जा रही है। चिकित्सा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस समय Hyperthermia symptoms and prevention की सही समझ ही लोगों की जान बचा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपरथर्मिया एक ऐसी खतरनाक शारीरिक स्थिति है जिसमें मनुष्य के शरीर का तापमान अपने सामान्य स्तर (98.6 डिग्री फारेनहाइट) से बहुत अधिक बढ़ जाता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अत्यधिक बाहरी गर्मी के संपर्क में रहता है, सीधे तेज धूप में काम करता है या इस मौसम में भारी शारीरिक श्रम करता है, तो शरीर की खुद को ठंडा रखने की प्राकृतिक प्रणाली पूरी तरह से विफल हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के भीतर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और अंदरूनी अंग प्रभावित होने लगते हैं। आम भाषा में इसे लोग लू लगना भी कह देते हैं, परंतु चिकित्सीय रूप से यह शरीर का थर्मल ओवरलोड है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को Hyperthermia symptoms and prevention के प्रति अत्यधिक जागरूक रहने की आवश्यकता है।
इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना बेहद आसान है, बशर्ते आप शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। शुरुआती दौर में मरीज को बहुत अधिक पसीना आता है, परंतु जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, पसीना आना पूरी तरह बंद हो जाता है और त्वचा एकदम सूखी, रूखी और लाल (red skin) हो जाती है। इसके साथ ही मरीज को अचानक चक्कर आना, सिर में भारीपन महसूस होना या असहनीय सिरदर्द होना इसके प्राथमिक संकेत हैं। शरीर में आवश्यक लवणों की कमी के कारण मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन (muscle cramps) और तीव्र कमजोरी महसूस होने लगती है। जैसे ही शरीर का तापमान बढ़ता है, दिल की धड़कन (heart rate) अत्यधिक तेज हो जाती है और मरीज की सांस फूलने लगती है। यदि स्थिति और अधिक बदतर हो जाए, तो मरीज के मानसिक संतुलन पर असर पड़ता है, वह भ्रम की स्थिति (confusion) में चला जाता है और अंततः बेहोश होकर गिर पड़ता है। इन गंभीर लक्षणों को देखते ही तुरंत एक्शन लेना अनिवार्य है, जिसके लिए डॉक्टरों ने Hyperthermia symptoms and prevention के नियम बताए हैं।
यदि आपके आस-पास कोई व्यक्ति इस स्थिति का शिकार होता है, तो बिना समय गंवाए कुछ प्राथमिक उपचार तुरंत शुरू कर देने चाहिए। सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को फौरन सीधी धूप से हटाकर किसी ठंडे, हवादार या छायादार स्थान पर लिटाएं। यदि मरीज होश में है, तो उसे तत्काल पर्याप्त मात्रा में साधारण पानी, ओआरएस का घोल या इलेक्ट्रोलाइट्स (electrolytes) पीने के लिए दें ताकि शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जा सके। शरीर के आंतरिक तापमान को तेजी से नीचे लाने के लिए ठंडे पानी की पट्टियों से पूरे शरीर को स्पंज करें। संभव हो तो मरीज के बगल, गर्दन और कमर के पास आइस पैक (ice packs) लगाएं या उसे ठंडे पानी से स्नान कराएं। डॉक्टरों की सख्त हिदायत है कि यदि इन उपायों के बाद भी स्थिति में सुधार न हो, शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर चला जाए या व्यक्ति बेहोशी की हालत में हो, तो एक पल भी बर्बाद किए बिना नजदीकी आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र (Emergency Health Center) ले जाएं। स्वास्थ्य गाइडलाइन में भी Hyperthermia symptoms and prevention के इन प्राथमिक चरणों को जीवनरक्षक माना गया है।
इस विकट स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संयुक्त रूप से आम जनता के लिए आवश्यक परामर्श जारी किया है। डॉक्टरों ने सख्त लहजे में कहा है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप अपने चरम पर होती है, बहुत जरूरी न होने पर घरों से बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें। यदि बाहर जाना अपरिहार्य हो, तो सूती और ढीले कपड़े पहनें, सिर को छाते, टोपी या सूती कपड़े से ढककर रखें। खाली पेट घर से बाहर कदम कतई न रखें और प्यास न लगने पर भी लगातार अंतराल पर पानी, छाछ, नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन करते रहें। इस मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अंत में, डॉक्टरों ने दोहराया है कि जनता को Hyperthermia symptoms and prevention के प्रति सतर्क रहकर ही इस भीषण गर्मी के प्रकोप से स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रखना होगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
"राहत की बात यह है कि अब तक हमारे पास हीट स्ट्रोक (heat stroke) का एक भी पुष्ट मरीज भर्ती नहीं हुआ है। लेकिन हाइपरथर्मिया के लक्षणों वाले 5 से 6 मरीज रोजाना वार्ड में भर्ती करने पड़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अस्पताल की सामान्य ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज केवल तेज बुखार, उल्टी, दस्त और सिरदर्द की गंभीर समस्याओं के साथ उपचार कराने पहुंच रहे हैं। ऐसे में Hyperthermia symptoms and prevention की जानकारी होना सभी के लिए आवश्यक है।"
डॉक्टर रामबाबू सिंह विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज, झांसी
"हमारे यहां वर्तमान में हाइपरथर्मिया से ठीक पहले की प्रारंभिक स्थिति यानी गंभीर डिहाइड्रेशन (dehydration) से पीड़ित 10 से 15 मरीज रोजाना ओपीडी में रिपोर्ट कर रहे हैं। वहीं, पूरी तरह से हाइपरथर्मिया की चपेट में आ चुके 4 से 5 मरीजों को रोजाना सीधे कोल्ड रूम में भर्ती करना पड़ रहा है ताकि उनके शरीर के तापमान को नियंत्रित किया जा सके। हमारे आंकड़ों के अनुसार, इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित 20 से 50 वर्ष की आयु वाले कामकाजी लोग (working population) हो रहे हैं, जो काम के सिलसिले में बाहर निकलते हैं। इन्हें Hyperthermia symptoms and prevention के टिप्स जरूर फॉलो करने चाहिए।"
डॉक्टर डी. एस. गुप्ता विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, जिला अस्पताल
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