रुदावल (भरतपुर): देशभर में पैर पसार रही कॉर्पोरेट ई-फार्मेसी कंपनियों (e-pharmacy companies) की मनमानी और अवैध तरीके से इंटरनेट के जरिए दवाओं की आपूर्ति के खिलाफ अब जमीनी स्तर पर आक्रोश भड़क उठा है। राजस्थान के भरतपुर जिले के रुदावल कस्बे में बुधवार को दवा विक्रेताओं ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए एक बड़ा और प्रभावी कदम उठाया। रुदावल केमिस्ट एसोसिएशन (Rudawal Chemist Association) के बैनर तले कस्बे के सभी छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं। इस एक दिवसीय सांकेतिक बंद (symbolic strike) के कारण कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन दवा विक्रेताओं का कहना है कि यह लड़ाई उनके वजूद के साथ-साथ आम जनता की सेहत को बचाने की भी है।
सुबह से ही रुदावल कस्बे के दवा बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। करीब 25 से 30 मुख्य चिकित्सा दुकानों के शटर गिरे रहे। इसके बाद सभी दवा विक्रेता कस्बे के मुख्य चौराहे पर एकत्रित हुए और ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के बाद दवा विक्रेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल स्थानीय तहसील कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने रुदावल तहसीलदार राकेश गिरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में ऑनलाइन माध्यमों से हो रही दवाओं की अनियंत्रित बिक्री और होम डिलीवरी (home delivery) पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगाने की पुरजोर मांग की गई है।
तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने के बाद रुदावल केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मीडिया से बातचीत करते हुए ई-फार्मेसी कंपनियों के काम करने के तौर-तरीकों पर गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल खड़े किए। एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत के मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act) के तहत इंटरनेट या ऑनलाइन माध्यमों से दवाओं की बिक्री का कोई स्पष्ट और कानूनी प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां कानून की कमियों का फायदा उठाकर धड़ल्ले से बाजार में अवैध रूप से सक्रिय हैं।
सबसे चौंकाने वाला और खतरनाक पहलू यह है कि ये ऑनलाइन कंपनियां बिना किसी वैध ई-प्रिस्क्रिप्शन (e-prescription) यानी डॉक्टर के असली पर्चे के बिना ही मरीजों के घरों तक गंभीर और संवेदनशील दवाएं पहुंचा रही हैं। कई मामलों में फर्जी या पुराने पर्चों को वेबसाइट पर अपलोड करके प्रतिबंधित श्रेणी की दवाएं भी मंगवाई जा रही हैं। बिना किसी योग्य और प्रमाणित फार्मासिस्ट की देखरेख या चिकित्सकीय परामर्श (medical consultation) के हो रहा यह दवा वितरण सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के लिए एक बहुत बड़ा और गंभीर खतरा बन चुका है। गलत दवाइयों के सेवन या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स की होम डिलीवरी (home delivery) से समाज में नशीली दवाओं का दुरुपयोग और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं तेजी से बढ़ रही हैं।
दवा विक्रेताओं ने बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही व्यापारिक रणनीतियों पर भी गहरी आपत्ति जताई। केमिस्टों का आरोप है कि अरबों रुपये के विदेशी फंड के दम पर ये कंपनियां बाजार में अत्यधिक छूट (heavy discounts) और प्रीडेटरी प्राइसिंग (predatory pricing) यानी बाजार को तबाह करने वाली बेहद कम कीमत की नीति अपना रही हैं। शुरुआत में भारी घाटा सहकर भी ग्राहकों को लुभाने की इस अंधी दौड़ का सीधा असर उन पारंपरिक दवा दुकानदारों पर पड़ रहा है, जो सालों से स्थानीय स्तर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
स्थानीय केमिस्टों का कहना है कि वे सरकार को नियमानुसार टैक्स देते हैं, दुकान का किराया और स्टाफ का खर्च उठाते हैं। ऐसे में वे इन बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग (predatory pricing) का मुकाबला नहीं कर सकते। अगर सरकार ने इन ऑनलाइन दिग्गजों की मनमानी पर कठोर और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले समय में देश के लाखों छोटे केमिस्टों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलेगी।
प्रदर्शन के दौरान दवा विक्रेताओं ने अत्यंत भावुक और आंसुओं से भरा अतीत याद दिलाते हुए कहा कि जब देश कोरोना वायरस (Covid-19) जैसी भीषण महामारी के दौर से गुजर रहा था, तब यही ऑनलाइन कंपनियां अपनी सेवाएं देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई थीं। उस भयावह संकट के समय में रुदावल सहित पूरे देश के छोटे केमिस्टों ने अपनी और अपने परिवारों की जान को जोखिम में डालकर दिन-रात निर्बाध सेवाएं (uninterrupted services) प्रदान की थीं। लॉकडाउन के दौरान मरीजों के घरों तक जरूरी दवाएं पहुंचाने का काम स्थानीय दवा दुकानदारों ने ही किया था।
लेकिन आज, जब स्थिति सामान्य हो चुकी है, तो सरकार इन बड़े कॉर्पोरेट घरानों को बढ़ावा देकर छोटे व्यापारियों को मरने के लिए छोड़ रही है। केमिस्टों ने चेतावनी दी है कि यह एक दिवसीय बंद सिर्फ एक शुरुआत और सांकेतिक चेतावनी है। यदि केंद्र सरकार ने जल्द ही ऑनलाइन दवा बिक्री और बिना डॉक्टर के पर्चे की होम डिलीवरी (home delivery) को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए कोई ठोस कानून नहीं बनाया, तो देश का पूरा केमिस्ट समाज एकजुट होकर एक अनिश्चितकालीन और उग्र राष्ट्रव्यापी आंदोलन (national movement) शुरू करने के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान रुदावल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष डाल चंद गुप्ता, प्रदीप शर्मा, मोनू गोयल, कृष्णकुमार गर्ग, सुरेंद्र योगी, गौरव परमार, नरेश सिंघल, निहाल, संजीव, नंद किशोर, अजय कुमार सहित क्षेत्र के दर्जनों प्रतिष्ठित दवा विक्रेता और उनके सहयोगी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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