शाहपुरा में फूटा सिंधी समाज का आक्रोश और गौरव! 'सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा' के स्वागत में सड़कों पर उतरा जनसैलाब, गूंजे जय झूलेलाल के नारे!

खबर सार :-
Sindhu Sanskriti Gaurav Yatra : राजस्थान के शाहपुरा में भारतीय सिंधु सभा की 'सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा' (Sindhu Sanskriti Gaurav Yatra) का ऐतिहासिक स्वागत हुआ। युवा पीढ़ी को सिंधी भाषा, सनातन संस्कारों और अपनी गौरवशाली जड़ों से जोड़ने के लिए निकले इस विराट अभियान में उमड़ा जनसैलाब।

शाहपुरा में फूटा सिंधी समाज का आक्रोश और गौरव! 'सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा' के स्वागत में सड़कों पर उतरा जनसैलाब, गूंजे जय झूलेलाल के नारे!
खबर विस्तार : -

शाहपुरा: राजस्थान की धरा पर सिंधी समाज को उसकी ऐतिहासिक जड़ों, समृद्ध मातृभाषा और सनातन संस्कारों से पुन: जोड़ने के संकल्प के साथ निकली 'सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा' (Sindhu Sanskriti Gaurav Yatra) जब शाहपुरा पहुंची, तो समूचा क्षेत्र सांस्कृतिक उल्लास के अनूठे रंग में रंग गया। शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक केवल सिंधु सभ्यता और सनातन गौरव की ही चर्चा रही। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में अपनी विरासत को लेकर एक नया जोश और चेतना देखने को मिली।

 जय झूलेलाल के जयकारों से गुंजायमान हुआ शाहपुरा

त्रिमूर्ति स्मारक (Trimurti Smarak) से लेकर संत कंवरराम धर्मशाला (Sant Kanwarram Dharamshala) तक समूचे मार्ग को तोरण द्वारों और भगवा ध्वजों से सजाया गया था। जैसे ही यात्रा ने नगर की सीमा में प्रवेश किया, समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर अगवानी की। 'जय झूलेलाल' और 'सिंधु संस्कृति अमर रहे' के गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

भारतीय सिंधु सभा (Bharatiya Sindhu Sabha) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रव्यापी चेतना अभियान का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता की चकाचौंध में खो रही नई पीढ़ी को सिंधी समाज के गौरवशाली इतिहास, मातृभाषा (Mother Tongue) और सनातन परंपराओं के प्रति जागरूक करना है। इस भव्य स्वागत समारोह में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि अपनी संस्कृति को बचाने के लिए समाज पूरी तरह एकजुट है।

 संस्कृति और भाषा बची रही, तो बची रहेगी पहचान: मुख्य वक्ता

संत कंवरराम धर्मशाला में आयोजित मुख्य सभा को संबोधित करते हुए भारतीय सिंधु सभा के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर मोरवाणी (Ishwar Morwani) ने समाज की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक आयोजन या धार्मिक रैली नहीं है, बल्कि यह सोए हुए समाज को जगाने का एक विराट अभियान है। आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में आकर अपनी मातृभाषा और संस्कारों से दूर हो रही है। यदि हमें अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखना है, तो हमें अपने बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना ही होगा। उन्होंने आगे कहा कि सिंधी समाज का इतिहास हमेशा से त्याग, सेवा, व्यापारिक ईमानदारी और सनातन मूल्यों का प्रतीक रहा है। इस महान विरासत को संजोकर रखना समय की मांग है।

कार्यक्रम के सहसंयोजक डॉ. प्रदीप गेहाणी (Dr. Pradeep Gehani) ने यात्रा के रूट और आगामी रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पूरे राजस्थान के 31 जिलों में लगभग 5 हजार किलोमीटर का लंबा सफर तय करेगी, जो 29 दिनों तक चलेगी। इस दौरान जगह-जगह युवा संवाद, सिंधु संस्कृति सम्मेलन और बाल संस्कार शिविर (Bal Sanskar Shivir) आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों में बचपन से ही अपनी सभ्यता के प्रति आदर भाव पैदा हो सके। उन्होंने सिंधी भाषा के विशेष कोर्स से जुड़ने की भी अपील की।

 घर-घर संस्कार पहुंचाने में मातृशक्ति की भूमिका अहम

मातृशक्ति की प्रदेशाध्यक्ष शोभा बसंताणी (Shobha Basantani) ने सभा में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति को जीवित रखने की पहली पाठशाला घर होती है। महिलाएं अपने बच्चों को बचपन से ही सिंधी परंपराओं और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर इस अभियान को सफल बना रही हैं। वहीं, प्रदेश प्रचार प्रमुख मूलचंद बसंतानी (Moolchand Basantani) ने आगामी दिनों में होने वाली 'सिंधु दर्शन यात्रा' की रूपरेखा साझा करते हुए समाज से अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहरों पर गर्व करने का आह्वान किया।

 क्रांतिकारियों को नमन और समाज का अभिनंदन

इससे पूर्व, यात्रा जब त्रिमूर्ति स्मारक पहुंची तो पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारी बारहठ बंधुओं की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर राष्ट्रभक्ति का माहौल देखने को मिला। धर्मशाला में आयोजित समारोह के दौरान प्रताप सिंह बारहठ सेवा संस्थान के सचिव कैलाश सिंह जाड़ावत ने प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर मोरवाणी को बारहठ परिवार से जुड़ा ऐतिहासिक साहित्य और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

 एकजुटता और समरसता का अनूठा संगम

समारोह की शुरुआत पूज्य सिंधी पंचायत शाहपुरा के अध्यक्ष लीलाराम वासवानी (Leelaram Vaswani) के स्वागत भाषण से हुई। कार्यक्रम का बेहद कुशल संचालन मूलचंद पेसवानी (Moolchand Peswani) ने किया। अंत में सिंधु सभा के स्थानीय अध्यक्ष चेतन चंचलानी (Chetan Chanchalani) ने आए हुए सभी अतिथियों और समाजजनों का आभार व्यक्त किया। इस ऐतिहासिक समागम में पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव नरेश लखपतानी, कोषाध्यक्ष अशोक थानवानी, मातृ शक्ति अध्यक्ष शिल्पा सामतानी सहित भीलवाड़ा के जिला अध्यक्ष परमानंद गुरनानी और कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश गुलाबवानी जैसे कई वरिष्ठ पदाधिकारी और हजारों की संख्या में युवा उपस्थित रहे।

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