Gorakhpur International Cricket Stadium : उत्तर प्रदेश में खेल को आगे बढ़ाने के लिए एक और बड़ा कदम यूपी की सरकार ने ले लिया है। सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गोरखपुर में राज्य का चौथा अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की प्रक्रिया को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कुल 236.40 करोड़ रुपए की लागत से 18 महीनों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
फिलहाल कानपुर और लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जाते हैं, वहीं वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम निर्माणाधीन है। इसके के बाद गोरखपुर उत्तर प्रदेश का चौथा ऐसा शहर होगा जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मानकों पर खरा उतरने वाले स्टेडियम के निर्माण के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
गोरखपुर का यह स्टेडियम ताल नदौर क्षेत्र में 50 एकड़ भूमि पर बनेगा, जिसमें 45 एकड़ पर मुख्य परिसर और 5 एकड़ में अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसे आईसीसी के वैश्विक मानकों के अनुसार बनाया जाएगा और इसमें स्टेडियम में कुल 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। स्टेडियम को इस तरह बनाया जाएगा ताकि खेल आयोजनों के साथ अन्य बड़े कार्यक्रम भी इसमें आयोजित किए जा सकें।
यह स्टेडियम ईपीसी मोड पर बनाया जाएगा। इसमें एंट्री गेट्स, सुरक्षा जांच प्वाइंट्स, ईस्ट और वेस्ट स्टैंड, नॉर्थ और साउथ पवेलियन आदि शामिल होंगे। ईस्ट और वेस्ट स्टैंड में प्रत्येक में 14,490 दर्शकों की क्षमता होगी, वहीं 1500 गाड़ियों के लिए पार्किंग की भी व्यवस्था होगी।
साउथ पवेलियन में खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम और अन्य ज़रूरी सुविधाएं होंगी जबकि नॉर्थ पवेलियन में 208 वीआईपी सीटें और 382 सीटों वाला मीडिया व ब्रॉडकास्टर्स गैलरी होगी। यहां मीडिया लॉबी, कंट्रोल रूम, सर्विस एरिया, मीडिया लाउंज और डाइनिंग एरिया जैसे सारे प्रावधान किए जाएंगे। स्टेडियम के दूसरे फ्लोर पर कमेंटेटर बॉक्स, प्रेस ट्रिब्यून और मेन कैमरा प्लेटफॉर्म की भी स्थापना की जाएगी।
इस स्टेडियम की कनेक्टिविटी भी खास होगी। यह गोरखपुर एयरपोर्ट से 23.6 किमी, राप्तीनगर बस अड्डे से 22 किमी और गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से 20.8 किमी की दूरी पर स्थित होगा। इसे गोरखपुर-वाराणसी हाईवे (एनएच-24) से जोड़ा जाएगा जिससे स्थानीय और बाहरी दर्शकों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है और नियोजन विभाग ने इसकी विस्तृत कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश है कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और तय समय सीमा के अंदर निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाए।
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