Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर की बड़ी कामयाबी के बाद भारत का फोकस अब कूटनीतिक तौर पर पाकिस्तान को घेरने पर है। भारत पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब करने का पूरा प्लान भी बना लिया है। इसके लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (Deligation ) का गठन किया गया है। 7 भारतीय सांसदों का यह डेलिगेशन दुनिया भर के देशों का दौरा करेगा और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का संदेश साझा करेगा। साथ ही पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए जा रहे झूठे प्रचार को उजागर करेगा।
दरअसल, केंद्र सरकार ने विदेश जाने वाले डेलिगेशन (Deligation) का नेतृत्व करने के लिए सात सांसदों का चयन किया है। जो प्रत्येक दल का नेतृत्व करेंगा। नेताओं के नाम शनिवार को सामने आए। जिसमें भाजपा के रविशंकर प्रसाद, भाजपा के बैजयंत पांडा, जदयू के संजय कुमार झा, कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor), द्रमुक की कनिमोझी करुणानिधि, शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे और राकांपा की सुप्रिया सुले का नाम शामिल हैं। जो विदेशों में पाकिस्तान की पोल खोलेंगे।
हालांकि शशि थरूर (Shashi Tharoor) के नाम पर कांग्रेस को आपत्ति है और पार्टी का कहना है कि उनका नाम प्रस्तावित ही नहीं किया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा केंद्र के राजनयिक संपर्क प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए चुने गए शशि थरूर की पार्टी की ओर से सिफारिश नहीं की गई थी। शनिवार को, केंद्र द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के लिए सात सांसदों के नामों की घोषणा के तुरंत बाद, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उन सांसदों के नामों का खुलासा किया, जिनकी पार्टी द्वारा सिफारिश की गई थी।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कल सुबह संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की। कांग्रेस से पाकिस्तान से आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के लिए 4 सांसदों के नाम देने को कहा गया। शुक्रवार 16 मई को दोपहर तक राहुल गांधी ने संसदीय कार्य रिजिजू को पत्र लिखकर कांग्रेस नेताओं के नाम दिए गए। हालांकि, कांग्रेस की इस लिस्ट में जो नाम सरकार को दिया है, उसमें तो शशि थरूर का नाम ही नहीं।
इससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस शशि थरूर को नहीं भेजना चाहती है, जो इन दिनों लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों को राष्ट्रहित में बता रहे हैं। थरूर ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए 8 मई को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और दुनिया के लिए एक कड़ा मैसेज है। भारत ने 26 नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक और उचित कार्रवाई की।
गौरतलब है कि प्रतिनिधिमंडल में अपना नाम शामिल देखकर थरूर ने एक्स पर खुशी जताई। उन्होंने लिखा- "हाल की घटनाओं पर हमारे देश का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए पांच प्रमुख राजधानियों में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण से मैं गर्व महसूस कर रहा हूं। जब राष्ट्रीय हित शामिल होता है, और मेरी सेवाओं की आवश्यकता होती है, तो मैं पीछे नहीं रहूंगा। जय हिंद !"
बता दें, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे। इसके बाद 6-7 मई की रात को भारत ने एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 9 आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया। इसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया। 10 मई को दोनों देशों के DGMO के बीच बातचीत हुई, जिसमें शाम 5 बजे से युद्ध विराम पर सहमति बनी। अब भारत दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर के पीछे के उद्देश्य और जरूरत को समझाना चाहता है, यही वजह है कि प्रमुख साझेदारों के बीच एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जा रहा है।
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