नई दिल्ली : कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने भारत की सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को एक साथ मंच पर ला खड़ा किया। इस वर्ष की परेड खास तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के कारण चर्चा में रही, जिसने हालिया सैन्य अभियानों में भारत की निर्णायक क्षमता को दर्शाया। समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन रहे। उनकी मौजूदगी ने इस आयोजन को केवल सैन्य नहीं, बल्कि एक मजबूत कूटनीतिक संदेश भी बना दिया।


परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पारंपरिक बग्गी में कर्तव्य पथ पर आगमन के साथ हुई। उनके साथ यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख, विदेशी राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

परेड में भारत की घातक सैन्य क्षमताओं की झलक साफ दिखाई दी।
प्रमुख हथियार प्रणालियों में शामिल रहे-

प्रधानमंत्री मोदी ने परेड के बाद कहा कि यह आयोजन भारत की सुरक्षा तैयारी, तकनीकी क्षमता और नागरिकों की रक्षा के प्रति अडिग संकल्प को दर्शाता है।
त्रि-सेवा झांकी में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग किए गए हथियारों और रणनीति की झलक दिखाई गई। कांच से ढके इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ब्रह्मोस मिसाइल से किए गए सटीक प्रहार और आकाश व एस-400 द्वारा बनाए गए सुरक्षा कवच ने यह साबित किया कि भारत अब रक्षात्मक ही नहीं, निर्णायक शक्ति भी है।

सलामी मंच से गुजरते हुए टी-90 भीष्म, अर्जुन टैंक, अपाचे AH-64E, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, ध्रुव ALH और नाग मिसाइल सिस्टम ने जमीन और हवा में भारत की ताकत दिखाई। पहली बार रोबोटिक डॉग, मानव रहित जमीनी वाहन और स्वायत्त ड्रोन शक्तिबाण व दिव्यास्त्र भी परेड का हिस्सा बने।

भारतीय नौसेना की झांकी में प्राचीन समुद्री विरासत से लेकर आधुनिक आईएनएस विक्रांत और उदयागिरि तक की यात्रा दिखाई गई। वायुसेना के फ्लाई-पास्ट में राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर विमानों ने ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ में उड़ान भरकर रोमांच पैदा कर दिया।

डीआरडीओ ने अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल LR-AShM का प्रदर्शन किया। यह मिसाइल अत्याधुनिक स्वदेशी एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी सेंसर से लैस है, जो भारत को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करता है।

परेड में कुल 30 झांकियां शामिल रहीं, जिनमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की झलक थी। ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ और आत्मनिर्भर भारत की थीम ने देश की सांस्कृतिक आत्मा और विकास यात्रा को जीवंत कर दिया। 77वां गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सैन्य, तकनीकी और कूटनीतिक ताकत का स्पष्ट ऐलान था। ऑपरेशन सिंदूर से लेकर स्वदेशी मिसाइलों तक, भारत ने कर्तव्य पथ से दुनिया को साफ संदेश दिया-भारत शांति चाहता है, लेकिन शक्ति के साथ।
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