West Asia Crisis: राहुल गांधी ने लोकसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर  जताई चिंता, ट्रंप के बयान पर निशाना

खबर सार :-
गुरुवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा। ईरान से जुड़े इस संघर्ष का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो गया है। देश LPG की आपूर्ति को लेकर संकट का सामना कर रहा है। इससे छोटे व्यापारी परेशान हैं।

West Asia Crisis: राहुल गांधी ने लोकसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर  जताई चिंता, ट्रंप के बयान पर निशाना
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नई दिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने निकट भविष्य में पर्याप्त तैयारी नहीं की, तो देश को ईंधन संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। गांधी ने चेतावनी दी कि वर्तमान वैश्विक स्थिति और भारत की 'गलत' विदेश नीति के फैसलों ने इस संकट की संभावना बढ़ा दी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जनता के हित में तुरंत कदम उठाए और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

 ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता पर जताई चिंता

संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सदन में एलपीजी और गैस की स्थिति पर बोलने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब संसद में नई प्रक्रिया लागू की जा रही है – पहले मंत्री निर्णय लेंगे, उसके बाद वे बोलेंगे और फिर मंत्री जवाब देंगे। गांधी ने कहा कि यह प्रक्रिया आम जनहित के मुद्दों पर समय पर निर्णय लेने में बाधक साबित हो सकती है।

राहुल गांधी ने ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता पर चिंता जताते हुए कहा कि ईंधन की आपूर्ति एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। उन्होंने बताया कि गैस, पेट्रोल और अन्य ईंधन सभी समस्या बनने की स्थिति में हैं, क्योंकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने चेताया कि अगर सरकार समय रहते तैयारी नहीं करती, तो इसका असर देश के करोड़ों नागरिकों पर पड़ेगा।

गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल ईरान से ईंधन मिलने या न मिलने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युद्ध और भू-राजनीतिक परिस्थितियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ईंधन आपूर्ति की अनिश्चितता बढ़ रही है और भारत को अपने दृष्टिकोण और रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “ईरान से समस्या सुलझेगी, तब भी गैस संकट खत्म नहीं होगा। दुनिया बदल रही है और ऊर्जा संरचना बदल रही है। हमें अपना माइंडसेट बदलना होगा। अगर भारत को केंद्र में रखकर रणनीति नहीं बनाई गई, तो संकट और गहरा होगा।” उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री से अपील की कि वे अभी से तैयारी शुरू करें और सुनिश्चित करें कि देशवासियों को कोई कठिनाई न हो।

सदन में बोलने से रोकने का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा समय में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से उत्पन्न हालात ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उन्होंने आलोचना की कि अमेरिका और अन्य विदेशी देश यह तय कर रहे हैं कि भारत किससे तेल और गैस खरीदेगा, जिससे भारत की स्वतंत्र ऊर्जा नीति प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत जैसे बड़े देश को किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि वह किस स्रोत से ऊर्जा खरीद सकता है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ऊर्जा संकट का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। रेस्तरां बंद हो रहे हैं, एलपीजी की बढ़ती कीमतों और किल्लत के कारण लोगों में घबराहट फैल रही है। सड़क पर सामान बेचने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। गांधी ने चेतावनी दी कि अगर समय पर उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

उन्होंने संसद में बोलने न दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। गांधी ने कहा कि वे कोई राजनीतिक बयान नहीं दे रहे हैं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वास्तविक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतवासियों की सुरक्षा बनी रहे और देश की ऊर्जा संरचना मजबूत हो।

गांधी ने कहा कि वर्तमान समय एक अस्थिर दौर का है और ऐसे दौर में पुराना दृष्टिकोण काम नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से कहा कि नई सोच और रणनीति अपनाकर ही देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने चेताया कि यदि तैयारी नहीं की गई, तो देशवासियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप के बयान पर निशाना

राहुल गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि भारत को यह तय करने की स्वतंत्रता नहीं दी जा रही कि वह किससे तेल और गैस खरीदे। गांधी ने कहा, “यह हमेशा मेरे लिए एक पहेली रही है कि भारत जैसे बड़े देश को यह तय करने की अनुमति किसी दूसरे देश को क्यों दी जाए कि हम रूस से तेल खरीद सकते हैं या नहीं। यह भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और रणनीति पर सवाल उठाता है।”

उन्होंने कहा कि यह केवल एक आर्थिक या व्यापारिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत की ऊर्जा नीतियों पर किसी विदेशी देश का दबाव न हो और देश की जनता सुरक्षित रहे।

राहुल गांधी ने अंत में सभी राजनीतिक विवादों से अलग होकर स्पष्ट किया कि उनकी चिंता केवल ऊर्जा सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को लेकर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत को अपनी रणनीति और सोच बदलने की जरूरत है, ताकि किसी भी संभावित ऊर्जा संकट से निपटा जा सके और देशवासियों की भलाई सुनिश्चित हो।

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