PM Modi break Nehru record : इतिहास के पन्नों पर मोदी युग की स्वर्णिम मोहर, नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के 'विश्वासघात' और 'कुचक्र' को किया तार-तार

खबर सार :-
PM Modi break Nehru record : भारत मंडपम में एनडीए की भव्य बैठक में पीएम मोदी ने जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने के बाद पहली बार हुंकार भरी। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के 'हिंदू ग्रोथ रेट' वाले कुचक्र, दशकों के विश्वासघात और घोटालों पर कड़ा प्रहार करते हुए 12 साल के बेमिसाल सुशासन और एनडीए की अटूट नीति-नियत का पूरा लेखा-जोखा देश के सामने रखा है।
PM Modi break Nehru record : इतिहास के पन्नों पर मोदी युग की स्वर्णिम मोहर, नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के 'विश्वासघात' और 'कुचक्र' को किया तार-तार
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: नई दिल्ली के प्रतिष्ठित और भव्य भारत मंडपम (Bharat Mandapam) परिसर में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए (NDA Meeting) की एक महा-बैठक में उस वक्त इतिहास जीवंत हो उठा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे बड़े मील के पत्थर को छूने के बाद अपना पहला आधिकारिक और आक्रामक वक्तव्य दिया। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने के ऐतिहासिक कीर्तिमान को पीछे छोड़ने के बाद, प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल एक धन्यवाद प्रस्ताव नहीं था, बल्कि यह बीते दशकों के राजनीतिक कुचक्रों के खिलाफ एक ऐतिहासिक घोषणापत्र बन गया। PM Modi break Nehru record की इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में देश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक नया और बेहद शक्तिशाली विमर्श स्थापित हो चुका है।

केंद्र सरकार के ऐतिहासिक और सफल बारह वर्षों का सफर पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में राजनीतिक उत्साह चरम पर था। जब देश के कोने-कोने से आए एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और शीर्ष कद्दावर नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खड़े होकर करतल ध्वनि से स्वागत किया, तो मंच से भावुकता और राजनीतिक संकल्प का अनूठा संगम देखने को मिला। अपने जीवन के इस अभूतपूर्व पड़ाव पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने अत्यंत विनम्रता के साथ कहा कि उन्होंने अपने साधारण जीवन की शुरुआत में कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि राष्ट्र सेवा का ऐसा विहंगम मार्ग उनके सामने खुलेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि इस लंबी और चुनौतीपूर्ण राजनीतिक यात्रा में अनगिनत उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मां भारती की सेवा का यह अनवरत और अभूतपूर्व सौभाग्य केवल और केवल ईश्वर की असीम अनुकंपा और जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से ही फलीभूत हो सका है। उनके लिए देश की 140 करोड़ जनता ही साक्षात ईश्वर का रूप है और वे इसी जनता के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करते आए हैं। आज जब PM Modi break Nehru record का यह ऐतिहासिक क्षण हमारे सामने है, तो यह जनता के उसी अटूट विश्वास की गवाही देता है।

वैचारिक स्थिरता बनाम दशकों का राजनीतिक छलावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान साल 2014 से पहले के भारत और वर्तमान समय के उभरते भारत के बीच एक स्पष्ट और गहरी विभाजन रेखा खींची। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के पहले के कई दशक देश के इतिहास में भीषण राजनीतिक अस्थिरता, नीतिगत पंगुता और वैचारिक उथल-पुथल से भरे हुए थे। इस अनिश्चितता का खामियाजा भारत की आम जनता और देश के आर्थिक ढांचे को उठाना पड़ा था। लेकिन आज, देश की जनता ने उस दौर को पीछे छोड़ते हुए एक पूर्ण बहुमत वाली, स्थिर और अत्यंत साहसी सरकार के कामकाज को धरातल पर उतरते देखा है। भारतीय समाज आज इस सरकार की त्वरित और निर्णायक क्षमताओं का न केवल साक्षी है, बल्कि उसका जबरदस्त प्रशंसक भी बन चुका है। यही कारण है कि देशवासियों ने कांग्रेस के दशकों पुराने विश्वासघात को सिरे से खारिज करते हुए एनडीए की एकजुटता, विकासवादी नीति और अटूट नीयत पर अपना सबसे मजबूत भरोसा जताया है। यह राजनीतिक ध्रुवीकरण और स्थिरता ही वह मुख्य आधार है जिसने इस बात को संभव बनाया कि PM Modi break Nehru record जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि आज दर्ज हो सकी है।

अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने साल 2014 की उस ऐतिहासिक विजय को याद किया, जिसने देश की राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया था। उन्होंने कहा, "जब हम 2014 में पहली बार प्रचंड बहुमत के साथ चुनकर आए थे, तब मैंने संसद के प्रांगण से कहा था कि यह विजय देश के सबसे सामान्य और हाशिए पर खड़े मानवी में एक नई उम्मीद और चेतना का सूर्योदय है। उस समय देश की जनता ने कांग्रेस के लंबे धोखे और संस्थागत भ्रष्टाचार से तंग आकर अपनी उम्मीदों का बोझ हमारे कंधों पर सौंपा था। आज बारह साल बाद, मुझे इस बात का परम संतोष और गर्व है कि हम सभी ने एनडीए परिवार के रूप में एकजुट होकर जनता के उस पवित्र विश्वास को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि उसे हर गुजरते दिन के साथ और अधिक सुदृढ़ और अटूट बनाया है।"

'हिंदू ग्रोथ रेट' के पीछे छिपा कांग्रेसी कुचक्र ध्वस्त

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी की पुरानी शासन व्यवस्था पर तीखा वैचारिक प्रहार करते हुए 'हिंदू ग्रोथ रेट' (Hindu Growth Rate) की अवधारणा की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि एनडीए के शासनकाल की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक वैचारिक सफलता यह है कि देश को आखिरकार कांग्रेस के उस मानसिक और सांस्कृतिक कुचक्र से मुक्ति मिल गई है, जिसने दशकों तक भारत को लाचारगी, बेचारगी और आत्महीनता के गहरे अंधकार में धकेल रखा था। कांग्रेस ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत देश के भीतर यह हीन भावना कूट-कूट कर भर दी थी कि भारत में तेज गति से विकास होना असंभव है और यहां बदलाव कछुए की रफ्तार से ही आ सकता है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस मानसिक गुलामी को तोड़ना ही वह टर्निंग पॉइंट था, जिसने यह सुनिश्चित किया कि PM Modi break Nehru record का दिन देश देख सके।

मोदी ने अत्यंत कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने अपनी प्रशासनिक विफलता, खराब नीतियों और सुशासन के अभाव को छिपाने के लिए एक बेहद शर्मनाक और चतुर रास्ता चुना था। उन्होंने देश की धीमी विकास दर को 'हिंदू ग्रोथ रेट' का कृत्रिम नाम दे दिया। यानी नीतियां कांग्रेस की थीं, निकम्मापन कांग्रेस का था, कार्यशैली उनकी अपनी भ्रष्ट व्यवस्था की थी और विफलता का पूरा ठीकरा देश की बहुसंख्यक हिंदू आबादी के माथे पर मढ़ दिया गया। प्रधानमंत्री ने गर्जना करते हुए कहा कि वास्तव में इस हीन भावना से ग्रस्त कुसंस्कृति का असली और न्यायसंगत नाम 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' (Congress Growth Rate) होना चाहिए था, क्योंकि उस व्यवस्था के पास न तो कोई स्पष्ट नीति थी, न नेक नीयत थी और न ही त्वरित निर्णय लेने का साहस था।

घोटालों के बवंडर से निकलकर दौड़ता हुआ नया भारत

ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को विकास की वास्तविक रफ्तार की पहली वास्तविक झलक तब मिली थी, जब श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व में देश में पहली बार एनडीए की सरकार का गठन हुआ था। उस दौर में देश ने जाना कि बुनियादी ढांचे का तेज विकास कैसे होता है। परंतु, साल 2004 में देश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के भयानक बवंडर में फंस गया और सत्ता की चाबी दोबारा कांग्रेस के शिकंजे में चली गई। उसके बाद के दस साल विकास के नहीं, बल्कि संस्थागत लूट के साल बन गए, जहां देश को एक के बाद एक हजारों करोड़ रुपये के विशालकाय घोटालों के दलदल में धकेल दिया गया। वैश्विक मंचों पर भारत की साख पूरी तरह मटियामेट हो चुकी थी।

प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि देश की नियति और उसका भाग्य तब बदला, जब साल 2014 में देश की जनता ने पूरे अधिकार के साथ एनडीए को सत्ता की कमान सौंपी। पिछले बारह वर्षों में दुनिया ने देखा है कि जब सरकार की नीयत साफ हो, नीतियां जनहितैषी हों और निर्णय देशहित में बिना किसी हिचकिचाहट के लिए जाएं, तो प्रगति का पहिया किस अभूतपूर्व गति से घूमता है। आज का यक्ष प्रश्न यह है कि जो काम बीते बारह वर्षों में पूरी भव्यता के साथ संपन्न हो गए, वे काम आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में क्यों नहीं किए जा सके? यही बुनियादी अंतर 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'NDA ग्रोथ रेट' के बीच की गहरी खाई को दर्शाता है। पुरानी व्यवस्था आम नागरिकों को अपने जायज अधिकारों के लिए दशकों तक अंतहीन इंतजार करवाती थी और फाइलों को अटकाने, भटकाने तथा लटकाने में विश्वास रखती थी। इसके विपरीत, आज की मोदी व्यवस्था सीधे धरातल पर परिणाम दिखाती है। आज की व्यवस्था का मूल मंत्र है- काम अभी होगा, समय सीमा के भीतर होगा और अत्यंत व्यापक पैमाने पर होगा। यही कारण है कि साल 2014 से लेकर 2026 तक की यह विकास यात्रा केवल सूखी संख्याओं और आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह उस आत्मनिर्भर भारत की महागाथा है, जिसने वैश्विक पटल पर अपनी पूरी आंतरिक क्षमता के साथ और अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना और दौड़ना तय कर लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कामकाज की इसी अभूतपूर्व गति और राष्ट्रवाद की भावना के कारण जनता ने बार-बार मोदी को चुना है, जिसके परिणामस्वरूप आज PM Modi break Nehru record का यह महा-कीर्तिमान स्थापित हो पाया है। यह नया भारत अब रुकने वाला नहीं है।

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