संसद में आज सख्त प्रावधानों के साथ पेश होगा पेपर लीक से जुड़ा बिल, बदलेगा कानून, सजा और जुर्माना बढ़ेगा

खबर सार :-

Public Examination Amendment Bill 2026: सरकार 'एग्जाम माफिया' और पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों के मन में कानून का डर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 10 साल की जेल, 10 करोड़ का जुर्माना, संपत्ति ज़ब्त करना और तीन महीने के भीतर फ़ैसला जैसे कड़े प्रावधान परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएंगे और साथ ही निर्दोष छात्रों के भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित करेंगे।
संसद में आज सख्त प्रावधानों के साथ पेश होगा पेपर लीक से जुड़ा बिल, बदलेगा कानून, सजा और जुर्माना बढ़ेगा

खबर विस्तार : -

Public Examination Amendment Bill 2026:  संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Session 2026) में केंद्र की मोदी सरकार सोमवार 27 जुलाई यानी आज संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल पेश करने जा रही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ( jitendra singh) संसद में बिल पेश करेंगे। इस बिल का मकसद पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत करना है। दूसरी ओर  विपक्ष NEET-UG पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाएगा।

NDA के युवा सांसद करेंगे बिल पर चर्चा 

बता दें कि केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह संसद में आज बिल पेश करेंगे। सरकार इस बारे में पहले ही नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है।  NDA इस बिल पर चर्चा की अगुवाई के लिए कई युवा सांसदों को मैदान में उतार सकता है। इनमें बांसुरी स्वराज, श्रीकांत शिंदे, शर्मिला सरकार,मिताली बाग और तेजस्वी सूर्या शामिल हैं। सरकार इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा की तैयारी कर रही है और बहस के 8 से 10 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इससे सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर आम सहमति बनाने की सरकार की मंशा का पता चलता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई की रात जारी एक ढाई मिनट के वीडियो संदेश में इस बिल की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है और इससे लाखों छात्रों और उनके माता-पिता को परेशानी होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

बदलेगा कानून, सजा और जुर्माना बढ़ेगा

दरअसल यह बिल 2024 के कानून में संशोधन करना चाहता है। प्रस्तावित संशोधन का मकसद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाना है। इसमें दोषियों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान शामिल हैं, जैसे 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ तक का जुर्माना, संपत्ति जब्त करना और तीन महीने के भीतर मामले का निपटारा सुनिश्चित करने की व्यवस्था। होगा, ताकि परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए जल्द न्याय मिल सके। साथ ही राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे। ये कोर्ट रोजाना सुनवाई करेंगे। यह कदम शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बिल और उससे जुड़े प्रावधानों को मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया है, जिनका मकसद फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाना और पेपर लीक व परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करना है।

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हाई पॉवर टास्क फोर्स का होगा गठन 

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा सुधारों पर एक टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया, जिसके प्रमुख इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पक्की करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत सरकार छात्रों के भविष्य के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल में हैं। हमने पहले ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट बना दिए हैं। अब हम संसद में एक नया कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें बहुत कड़े कानूनी प्रावधान होंगे।"

नए संशोधन बिल में क्या-क्या होंगे प्रावधान

  • 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' के अनुसार, प्रश्न पत्र लीक होने के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए।
  • बिल पेश करने से पहले सदस्यों को दी गई कॉपी के अनुसार, प्रश्न पत्र लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को कम से कम पांच साल और ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल की जेल हो सकती है, साथ ही 50 लाख तक का जुर्माना भी लग सकता है।
  • संगठित अपराधों के लिए, बिल में कम से कम सात साल की सज़ा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
  • मौजूदा कानून में व्यक्तिगत रूप से शामिल लोगों के लिए तीन से पांच साल की जेल का प्रावधान है, जबकि संगठित धोखाधड़ी और प्रश्न पत्र लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 साल की जेल और कम से कम 1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।

छात्रों ने किया था देशव्यापी आंदोलन

गौरतलब है कि NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर समेत छात्रों ने देशव्यापी आंदोलन किया था। कॉकरोच पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार 36 दिन तक चला। वहीं सोनम वांगचुक करीब 26 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे रहे। जिसके बाद सरकार ने इस मामले में कड़ाई से फैसला लेने का विचार किया है। साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। सरकार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार अब परीक्षाओं को लेकर सतर्क है और लगातार सुधारों की घोषणा कर रही है। इसी कोशिश के तहत, प्रधानमंत्री मोदी खुद नियमित रूप से इंस्टाग्राम के जरिए परीक्षा सुधारों और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

FAQ...

1- पेपर लीक से जुड़ा बिल संसद में कब पेश होगा ?

पेपर लीक से जुड़ा बिल 27 जुलाई को संसद में पेश होगा

2- सरकार की तरह कौन करेगा पेपर लीक से जुड़े बिल पर चर्चा ?

सरकार की तरह से इस बिल पर चर्चा की अगुवाई NDA के करीब 9 युवा सांसद कर सकते हैं। इनमें बांसुरी स्वराज, श्रीकांत शिंदे, शर्मिला सरकार, मिताली बाग और तेजस्वी सूर्या का नाम शामिल हैं। जबकि बिल केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से पेश करेंगे।

3- क्या इस बिल से देश में खत्म होगी परीक्षा धांधली ?

संसद में यह विधेयक पास होने के बाद UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और NTA जैसी संस्थाओं द्वारा आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं में सुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

4- नए संशोधन बिल में क्या-क्या होंगे प्रावधान ?

नए संशोधन बिल में आरोपियों को 10 साल की जेल, 10 करोड़ का जुर्माना, संपत्ति ज़ब्त करना और तीन महीने के भीतर फैसला जैसे कड़े प्रावधान शामिल है।

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