स्पेलिंग में फर्क का नतीजा, भारत रत्न से सम्मानित सीएनआर राव को एसआईआर का नोटिस

खबर सार :-

भारत रत्न से सम्मानित 92 वर्षीय प्रोफेसर सीएन.आर को एक नोटिस भेज दी गई। इससे वह हैरानी में पड़ गए। ऐसे ही और भी मामलों का राज्य में समाधान किया जा रहा है।
भारत रत्न सीएनआर राव को नोटिस, एसआईआर में Prof की जगह Proff मिला

खबर विस्तार : -

बेंगलुरु:  भारत रत्न से सम्मानित और मशहूर वैज्ञानिक 92 वर्षीय प्रोफेसर सीएन.आर. राव को बुधवार को एक नोटिस मिला। यह कर्नाटक में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) की ओर से था। यह नोटिस उनके नाम की स्पेलिंग में फर्क के कारण भेजा गया था। 

प्रोफेसर राव को भेजे गए नोटिस में नाम में अंतर की मुख्य कारण बताया गया है। मीडिया में भी यह बात सुखियों में है। मौजूदा वोटर लिस्ट में उनके प्रोफेशनल टाइटल में एक अतिरिक्त एफ यानी अंग्रेजी में प्रोफे लिखकर छोड़ दिया जाता है, इसमें एक एफ आता है, जबकि अब इनके प्रांेफे में दो एफ हैं। इसमें प्रोफेसर सीएनआर. राव लिखा हुआ है। इससे पहले पुरानी वोटर लिस्ट में उनका नाम प्रोफेसर सीएनआर राव है। इस अतिरिक्त एफ के कारण वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन प्रोसेस बढ़ाया गया। इसके तहत ही प्रसिद्ध वैज्ञानिक से उनकी पहचान साबित करने के लिए कहा गया है।

प्रोफ़ेसर राव से मांगे गए साक्ष्य

चर्चा है कि प्रोफ़ेसर राव से कहा गया था कि वे इस अंतर को स्पष्ट करें। इस प्रक्रिया में 92 वर्शीय वैज्ञानिक को अपनी पहचान साबित करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के पास मल्लेश्वरम में एक सुनवाई के लिए जाना पड़ता। दरअसल, यह अंतर व्यवस्थागत गलती है। इसमें 2002 की वोटर लिस्ट की जानकारी का उपयोग एसआईआर एन्यूमरेशन फॉर्म भरते समय किया जाता है, उसका मिलान मौजूदा वोटर लिस्ट से किया जाता है।

इसमें संबंधित जानकारी का मिलान नहीं होने पर एसआईआर के तहत नाम में अंतर बन जाता है। दरअसल, यह नोटिस एसआईआर के तहत किए जा रहे वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन प्रोसेस का हिस्सा है। इसके अंतर्गत पूरे राज्य में वोटर की जांच और उसे अपडेट किया जाता है। 

1600 से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे

प्रोफ़ेसर राव का नाम भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में लिया जाता है। वह भारत रत्न सम्मनित हैं। दुनिया भर में पहचाने जाने वाले सॉलिड-स्टेट और मटीरियल्स केमिस्ट हैं। 1934 में बेंगलुरु में उनका जन्म हुआ। केमिस्ट्री, खासकर सॉलिड-स्टेट मटीरियल्स, नैनोमटीरियल्स और स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री में अहम योगदान दिया है। 1,600 से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे हैं। 

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कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी उनको मिले

कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी उनको मिले हैं। विज्ञान में उल्लेखनीय कार्य के लिए 2013 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 1976 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में सॉलिड स्टेट एंड स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री यूनिट की स्थापना की। 1984 से 1994 तक आईआईएससी के डायरेक्टर बनकर काम किया। 

नाम प्रकरण पर कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने भी अपनी बात रख दी है। मंगलवार को स्पष्ट किया था कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के दौरान पद्म श्री से सम्मानित हरेकला हाजब्बा को भेजा गया। नाम में फर्क के कारण यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें भूल सुधार हो रहा है। इसी के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट  सीईओ की ओर से किया गया। इसमें मंगलुरु के जिला चुनाव अधिकारी (डीईओ) की ओर से हजाब्बा के नाम में सुधार की जानकारी और स्पष्टी करण भी दी गई है। 

अधिकारियों ने नोटिस का समाधान निकाला

डीईओ ने कहा कि यह मामला सुलझा लिया गया है। बता दें कि पद्म श्री से सम्मानित हरेकाला हजाब्बा के नाम में सुधार को लेकर स्पष्टीकरण था। इसमें बताया गया कि वोटर के नाम में अंतर पाया गया था। नाम सही करने के लिए ही अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर दस्तावेजों का मिलान किया। इस स्पष्टीकरण की जरूरत भी तब हुई जबकि चुनाव अधिकारियों ने हजाब्बा को एक नोटिस भेज दिया।

ठीक यह वैसा ही मामला है, जिसमें नाम का मिलान किया जाता है। इसमें पुराने कागजात मिलान किए जाते हैं। मौजूदा वोटर लिस्ट में नाम और पिछली एसआईआर प्रक्रिया के कागजों का मिलान कर इस मामले को विराम दिया गया। नोटिस में हजाब्बा को 11 सितंबर को हरेकाला ग्राम पंचायत में पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन कुछ ही समय में नोटिस का समाधान कर लिया गया।

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