उम्मीदों पर उतरूंगा खरा...शिक्षा मंत्रालय संभालते ही एक्शन में आए प्रह्लाद जोशी
खबर सार :-
Pralhad Joshi : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री का पदभार संभाला और अपने पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली है।
खबर विस्तार : -
Pralhad Joshi Charges Education Ministry: नीट (NEET) पेपर लीक के बाद देश भर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। उन्होंने रविवार को शिक्षा मंत्रालय पहुंचकर औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक हाईलेवल मीटिंग की। इस दौरान वो एक्शन में नजर आए और अधिकारियों को लापरवाही पर सख्त चेतावनी दी।
अधिकारियों को दिया कड़ा संदेश
शिक्षा मंत्रालय का पद संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने अधिकारियों से मुलाकात की और पहली ही बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी कामकाज या संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्रालय का कार्यभार संभालने से पहले जोशी ने कहा था कि वह अपनी नई जिम्मेदारी पर पूरी तरह खरे उतरेंगे। पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश की शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं और इस दिशा में काम जारी रहेगा।
प्रह्लाद जोशी के सामने होंगी कई चुनौतियां
बता दें कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद, प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। पद संभालने के तुरंत बाद, जोशी ने मंत्रालय के कामकाज को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है जब देश में शिक्षा प्रणाली, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
प्रह्लाद जोशी के सामने होंगी ये चुनौतियां
- वर्तमान में जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल करना है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
- इसके अलावा, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा देना।
- डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल-आधारित शिक्षा को मजबूत करना उनके मुख्य फोकस क्षेत्र होंगे।
- कौशल विकास और अनुसंधान को गति देना साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभावी कार्यान्वयन।
कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके है प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी इससे पहले केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वे वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और मजबूत संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में जाना जाता है। कर्नाटक के धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद रहे जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अपने व्यापक संसदीय अनुभव और प्रशासनिक शैली के कारण, उन्हें सरकार के भीतर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में होती है गिनती
गौरतलब है कि जोशी को किनती बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में होती है। वे लंबे समय से RSS से जुड़े रहे हैं और इसी वजह से संगठन पर उनकी मज़बूत पकड़ मानी जाती है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ ज़िले से की थी। शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद, उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बैठकें शुरू कर दी हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा में सुधार, टेक्नोलॉजी पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में रिसर्च और छात्रों से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर तेजी से फैसले लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ और छात्र अब बारीकी से देखेंगे कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और शिक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है।
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