नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देश में एलपीजी गैस की संभावित कमी को लेकर उठ रही चिंताओं पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आम जनता को आश्वस्त किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा आने की संभावना नहीं है। सरकार ने कहा है कि देश की रिफाइनरियों को कच्चे तेल से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और बाजार में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही सरकार ने जमाखोरी करने वालों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि किसी वितरक द्वारा कृत्रिम संकट पैदा कर कालाबाजारी या भंडारण किया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उच्च पदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका कुछ असर भारत पर भी पड़ा है। हालांकि सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए समय रहते कदम उठाए हैं। देश की तेल रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को जानकारी मिली है कि कुछ वितरक पश्चिम एशिया के संकट का हवाला देकर बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बना रहे हैं और जमाखोरी की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखे हुए है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को नियंत्रित किया गया है और उनकी प्राथमिकता तय करने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है। देश में खपत होने वाली कुल एलपीजी का लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जाता है, जबकि करीब 40 से 45 प्रतिशत एलपीजी घरेलू स्तर पर तेल रिफाइनरियों में कच्चे तेल के शोधन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में तैयार होती है। भारत मुख्य रूप से खाड़ी देशों, विशेषकर कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से एलपीजी आयात करता है।
आंकड़ों के मुताबिक भारत अपनी कुल आयातित एलपीजी का लगभग 29 से 34 प्रतिशत हिस्सा कतर से खरीदता है, जबकि करीब 26 प्रतिशत एलपीजी यूएई से आती है। हाल के वर्षों में भारत ने कतर से प्रतिवर्ष लगभग 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी का आयात किया है, जिसकी कीमत चार अरब डॉलर से अधिक है। वर्ष 2024 में भारत और कतर के बीच वर्ष 2048 तक हर साल 75 लाख टन द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति का एक बड़ा समझौता भी हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में आयात की जाने वाली अधिकांश एलपीजी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव के कारण संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। हालांकि सरकार का कहना है कि भारत के पास कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर कोई संकट नहीं है, क्योंकि देश रूस सहित 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है। सरकार ने रिफाइनरियों से कहा है कि वे कच्चे तेल के शोधन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में बनने वाली एलपीजी के उत्पादन को प्राथमिकता दें ताकि आयात में संभावित कमी की भरपाई की जा सके।
कच्चे तेल के शोधन से एलपीजी के अलावा प्रोपेन, ब्यूटेन, मीथेन, एथेन, नैफ्था, प्लास्टिक, रसायन, उच्च ऑक्टेन गैसोलीन, पेट्रोल, केरोसीन, जेट फ्यूल, डीजल, फ्यूल ऑयल, ल्यूब्रिकेंट्स, वैक्स और अस्फाल्ट या बिटुमेन जैसे कई अन्य उत्पाद भी तैयार होते हैं।
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि देश में एलपीजी की कमी की स्थिति बन रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर गैस की कोई कमी नहीं है तो विभिन्न शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें क्यों लग रही हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद मदन राठौर ने कहा कि सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है और प्रधानमंत्री ने भी देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि पेट्रोल, डीजल और गैस सहित ऊर्जा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जब भी देश किसी चुनौती का सामना करता है तो विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी, ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल छोटी राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं और देश में अनावश्यक घबराहट फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने इसे राजनीति का गैर-जिम्मेदाराना तरीका बताया।
वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने कहा कि सरकार को जमीनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उनका कहना था कि यदि देश में एलपीजी को लेकर कोई समस्या नहीं है तो सरकार को इस मुद्दे पर संसद में विस्तार से चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर लोगों को गैस सिलेंडर पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे खासकर गृहिणियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मुद्दे पर पारदर्शी जानकारी दे और आम जनता की समस्याओं का समाधान करे।
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