कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों और अदालतों में आ गई है। राज्य के बहुचर्चित सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामला (Signature Forgery Case) ने अब एक नया सियासी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को तगड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और देश के जाने-माने अधिवक्ता कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की पैरवी करने से न केवल साफ इनकार कर दिया, बल्कि अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पर टीएमसी को लगातार भारी नुकसान पहुंचाने का बेहद गंभीर आरोप भी मढ़ दिया है।
पूरे विवाद की जड़ें उस वक्त गहरी हुईं जब कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) में सुनवाई से ठीक पहले वकीलों के पैनल को बदल दिया गया। कल्याण बनर्जी ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ एक दिन पहले अदालत के सामने अभिषेक बनर्जी के इस मामले का उल्लेख किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर राज्य आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी (CID) के पहुंचने का मुद्दा भी पूरी आक्रामकता के साथ कोर्ट में उठाया था। अदालत ने उस समय मामले की तुरंत सुनवाई नहीं की, जिसके बाद कल्याण बनर्जी ने केस को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराया था।
असली ड्रामा बुधवार की देर रात शुरू हुआ। कल्याण बनर्जी के मुताबिक, रात को उनके बेटे के पास एक फोन आया, जिसमें बेहद ही पेशेवर तरीके से सूचित किया गया कि अब इस मामले में कल्याण बनर्जी की जगह एक जूनियर वकील अयन भट्टाचार्य अदालत में अभिषेक बनर्जी का पक्ष रखेंगे। इस वाकये से आहत और नाराज वरिष्ठ सांसद ने कहा कि वह पिछले 45 सालों से वकालत के पेशे में हैं और अदालती बारीकियों को अच्छी तरह समझते हैं। इस तरह के अपमानजनक और गैर-पेशेवर व्यवहार को वह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते। इसके बाद कल्याण बनर्जी, उनके बेटे शीर्षण्य बनर्जी और उनकी पूरी कानूनी टीम ने खुद को इस हाई-प्रोफाइल मामले से पूरी तरह अलग कर लिया।
अदालती कार्यवाही से खुद को अलग करने के बाद कल्याण बनर्जी का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने सीधे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व शैली पर तीखा हमला बोल दिया। पार्टी के भीतर की इस गुटबाजी को सार्वजनिक करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधे चुनौती दे डाली है। कल्याण बनर्जी ने मीडिया के सामने बेहद कड़े शब्दों में कहा, "अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। मैं किसी भी हाल में अभिषेक बनर्जी के साथ काम नहीं करूंगा। मैं बहुत जल्द मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलकर यह साफ कह दूंगा कि या तो वे पार्टी में अभिषेक बनर्जी को रखें और हम जैसे पुराने नेताओं को जाने दें, या फिर हमें रखकर अभिषेक को पार्टी के फैसलों से दूर करें।"
वरिष्ठ सांसद ने आगे आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के कुछ फैसलों और उनके अड़ियल रवैये के कारण पार्टी को लगातार जमीनी स्तर पर भारी क्षति उठानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राजनीतिक क्षति होने के बावजूद अभिषेक बनर्जी के व्यवहार और काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया है, जिससे पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।
एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी युद्ध छिड़ा हुआ था, वहीं दूसरी तरफ कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कौशिक चंद्र की एकल पीठ ने इस मामले पर अपना बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने अभिषेक बनर्जी को किसी भी तरह की अंतरिम कानूनी राहत देने से मना कर दिया और उन्हें राज्य सीआईडी (CID) की जांच में पूरी तरह सहयोग करने का सख्त निर्देश जारी किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी को सीआईडी द्वारा भेजे गए समन का पूरी तरह पालन करना होगा और पूछताछ के लिए जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार, अभिषेक बनर्जी गुरुवार की शाम दिल्ली से कोलकाता लौट रहे हैं और उन्हें शाम छह बजे से पहले सीआईडी के मुख्यालय भवानी भवन (Bhabani Bhawan) में हाजिर होने का आदेश दिया गया है।
हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को एक आंशिक राहत जरूर दी है। न्यायमूर्ति कौशिक चंद्र ने अपने आदेश में कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक, जो कि अगले दो सप्ताह बाद होनी है, सीआईडी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) या गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी। लेकिन, इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि जांच एजेंसी कानून के दायरे में रहकर अपनी पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया जारी रखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। अब देखना यह है कि शाम को भवानी भवन में होने वाली पूछताछ और पार्टी के भीतर मचे इस घमासान का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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