Kanshi Ram Bharat Ratna Demand : यूपी की सियासत में 'दलित' कार्ड, नेहरू होते तो कांसीराम सीएम होते, भारत रत्न देने की मांग

खबर सार :-
लखनऊ में राहुल गांधी की मौजूदगी में बसपा संस्थापक कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित हुआ। बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इसे चुनावी राजनीति बताया है।

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand : यूपी की सियासत में 'दलित' कार्ड, नेहरू होते तो कांसीराम सीएम होते, भारत रत्न देने की मांग
खबर विस्तार : -

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand :  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच सूबे की राजनीति एक बार फिर 'दलित अस्मिता' और 'सम्मान' के इर्द-गिर्द सिमट गई है। शुक्रवार (13 मार्च) को राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम ने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। मौका था बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की जयंती के पूर्व संध्या पर आयोजित 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' का, जहां राहुल गांधी की मौजूदगी में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न देने का बड़ा प्रस्ताव पारित किया गया।

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand :  राहुल गांधी की मौजूदगी में पारित हुआ प्रस्ताव

लखनऊ के इस कार्यक्रम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। मंच से दलित राजनीति के पुरोधा कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजने की मांग उठाई गई। प्रस्ताव के दौरान यह भी घोषणा की गई कि जब भी राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे, वह कांशीराम को यह सम्मान दिलाने का काम प्राथमिकता से करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम यूपी के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कांशीराम, जिन्हें दलित समाज 'मान्यवर' कहकर संबोधित करता है, आज भी यूपी की राजनीति में एक बड़ा प्रभाव रखते हैं।

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand :  "नेहरू होते तो कांशीराम सीएम होते"- राहुल का बड़ा बयान

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक बेहद चर्चा बटोरने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि पंडित जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो मान्यवर कांशीराम कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री के पद पर होते। राहुल के इस बयान को कांशीराम के प्रति कांग्रेस के झुकाव और उनके कद को स्वीकार करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand :  बीजेपी का पलटवार, "कांशीराम के जीवित रहते कांग्रेस ने कभी नहीं दिया सम्मान"

कांग्रेस के इस नए सियासी दांव पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव को 'चुनावी ढोंग' करार देते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब तक मान्यवर कांशीराम जीवित रहे, कांग्रेस ने उन्हें कभी वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे, और आज केवल दलित वोट बैंक को लुभाने के लिए इस तरह की बातें की जा रही हैं।

बीजेपी ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए कांग्रेस को उसके पुराने रवैये की याद दिलाई। पार्टी ने तर्क दिया कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जैसे महान नायक को भी भारत रत्न तब मिला, जब केंद्र की सत्ता से कांग्रेस बेदखल हुई और जनता दल के नेतृत्व वाली सरकार बनी। बीजेपी का सीधा आरोप है कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए केवल गांधी परिवार के सदस्यों को ही सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने में रुचि दिखाई, जबकि दलित समाज के वास्तविक नायकों को हमेशा हाशिए पर रखा गया। बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस को अपने 'गिरेबान में झांकने' की नसीहत देते हुए कहा कि जो दल दशकों तक सत्ता में रहकर दलित महापुरुषों की उपेक्षा करता रहा, उसकी मंशा पर आज सहज ही सवाल उठते हैं।

 Kanshi Ram Bharat Ratna Demand : 'जूते उठाने' वाले बयान पर छिड़ा विवाद

राहुल गांधी के 'कांशीराम सीएम होते' वाले बयान पर तंज कसते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने इसे हास्यास्पद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में जिन्हें भी मुख्यमंत्री बनाया, उनसे 'गांधी परिवार के जूते-चप्पल' उठवाए गए। बीजेपी के अनुसार, यह सम्मान नहीं बल्कि दलित नेताओं का अपमान करने का कांग्रेस का पुराना तरीका है।

Kanshi Ram Bharat Ratna Demand :  यूपी चुनाव और 15 मार्च का महत्व

आगामी 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम का नाम दलित चेतना का प्रतीक माना जाता है। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का यह 'भारत रत्न' वाला दांव और बीजेपी का उस पर आक्रामक रुख यह साफ कर देता है कि आने वाले दिनों में दलित वोटों की यह लड़ाई और भी दिलचस्प होने वाली है। अब देखना यह होगा कि मायावती की अनुपस्थिति में कांशीराम की विरासत पर दावा ठोकने की यह कोशिश कांग्रेस को कितना सियासी फायदा पहुंचा पाती है।

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