झांसी, शुक्रवार को हजरत निजामुद्दीन से आने वाली ट्रेन छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति में बम की अफवाह झूठी जरूर निकली, लेकिन कहीं ना कहीं रेलवे प्रशासन पर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर गई। बम होने की सूचना के बाद भी ट्रेन लगभग 2 घंटे तक पटरियों पर दौड़ती रही लेकिन इसको कहीं भी रोक कर जांच करने की जरूरत नहीं समझी गयी। अगर यह खबर सही होती तो कोई भी एक बड़ा हादसा झांसी के पहले भी हो सकता था, इस दौरान ट्रेन धौलपुर मुरैना ग्वालियर आदि स्टेशनों से गुजरी, लेकिन इसको कहीं भी ना रोक कर जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई।
जैसा कि बताया गया है की रेलवे के कंट्रोल रूम को रात 9ः20 पर सूचना मिली थी कि छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में बम रखा है। इस सूचना से रेल प्रशासन में अफरातफरी तो मची, लेकिन शायद वह कार्यवाही नहीं दिखाई दी जो ऐसे मामलों में दिखाई जानी चाहिए थी। जिस समय यह सूचना मिली तब ट्रेन आगरा और धौलपुर स्टेशन के बीच चल रही थी। सूचना मिलने के बाद भी इसे किसी भी स्टेशन पर रोक कर जांच की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ट्रेन जब रात 11ः40 पर झांसी रेलवे स्टेशन पर आई तब सुरक्षा बल ने इसकी जांच की।
अधिकारी अब यह कह रहे हैं कि क्योंकि इस ट्रेन का स्टॉपेज झांसी के पहले नहीं था। इसलिए यह जांच नहीं हो सकी। झांसी रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा को भी लेकर रेल प्रशासन पर कुछ सवालिया निशान है। रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा के लिए तमाम इंतजाम किए गए हैं। जीआरपी एवं आर पीएफ का बड़ा फोर्स भी तैनात है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिर भी सवाल खड़े होते रहते हैं। झांसी रेलवे स्टेशन पर कहीं से भी प्रवेश किया जा सकता है। इसके अलावा पश्चिमी क्षेत्र की ओर से पुल के रास्ते भी रेलवे स्टेशन पर प्रवेश किया जा सकता है। इन दोनों गेटों पर कोई भी सुरक्षा कर्मी नहीं होता है। सिर्फ मेन गेट पर ही सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। यात्रियों का सामान चेक करने के लिए बैगेज स्कैनर मशीन भी लगाई गई है, लेकिन कभी यह काम करती है और कभी नहीं।
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