Bharat-EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट करार दिया। ईयू के 27 देशों को शामिल करने वाला यह समझौता भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा एफटीए माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डील वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, यह एफटीए भारत के किसानों, एमएसएमई सेक्टर और छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खोलेगा। कृषि उत्पादों, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट और प्रोसेस्ड फूड को नए निर्यात अवसर मिलेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
एफटीए के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। वहीं, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर और प्रोफेशनल सर्विसेज में भारत-ईयू सहयोग और गहरा होगा, जिससे भारत की सर्विस इकोनॉमी को वैश्विक बढ़त मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता निवेश को बढ़ावा देगा और इनोवेशन पार्टनरशिप को प्रोत्साहित करेगा। रिसर्च, स्टार्टअप्स और नई तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाएं शुरू होंगी। साथ ही, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में यह एफटीए अहम भूमिका निभाएगा, जिससे दोनों पक्षों को रणनीतिक लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ईयू को लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुपक्षवाद और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों में विश्वास रखने वाला साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार जरूरी है। इंडो-पैसिफिक से लेकर कैरेबियन तक त्रिपक्षीय परियोजनाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, क्लीन एनर्जी और महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा।
वर्तमान में भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 80 अरब यूरो का है और करीब 8 लाख भारतीय यूरोप में निवास करते हैं। लगभग एक दशक की बातचीत के बाद हुए इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है। इस एफटीए से दुनिया के करीब 2 अरब लोगों को सीधा लाभ मिलेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
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