Mbile Manufacturing in India: भारत का मोबाइल फोन उद्योग पिछले एक दशक में अभूतपूर्व बदलाव का गवाह बना है। देश ने जहां कभी मोबाइल फोन का बड़े पैमाने पर आयात किया था, वहीं अब वह दुनिया के प्रमुख निर्यातकों में शामिल हो चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार, भारत का मोबाइल फोन निर्यात पिछले दस वर्षों में 127 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा मात्र 0.01 लाख करोड़ रुपये था।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति दी है। इन नीतियों का उद्देश्य भारत में एक मजबूत और संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।

सरकार के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में भारत ने मोबाइल फोन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जो देश पहले मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक था, वह अब शुद्ध निर्यातक बन चुका है। मंत्री ने बताया कि भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस सफलता के पीछे सरकार की नीतिगत पहल, उत्पादन प्रोत्साहन योजनाएं और वैश्विक कंपनियों का बढ़ता निवेश प्रमुख कारण हैं।
मोबाइल फोन के साथ-साथ देश के पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग छह गुना बढ़कर 2014-15 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी लगभग आठ गुना बढ़कर 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। मंत्री ने बताया कि शुरुआती वर्षों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण मुख्य रूप से तैयार उत्पादों की असेंबली तक सीमित था। लेकिन अब देश का ध्यान मॉड्यूल, सब-मॉड्यूल, कंपोनेंट्स और यहां तक कि कच्चे माल, उपकरण और मशीनरी के विकास पर भी केंद्रित हो रहा है।

घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें प्रमुख रूप से उत्पादन-संबंधित प्रोत्साहन योजना (PLI), इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने की योजनाएं तथा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर योजना शामिल हैं। आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के तहत तीन स्वीकृत आवेदकों ने महाराष्ट्र में विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं। खास बात यह है कि ये सभी इकाइयां लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) द्वारा संचालित हैं। इसके अलावा कई वैश्विक कंपनियों ने भी भारत में लैपटॉप, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्माण शुरू कर दिया है।
भारत के बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिकी टेक कंपनी Apple का तेजी से बढ़ता उत्पादन है। कंपनी ने वर्ष 2025 में भारत में आईफोन उत्पादन में करीब 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में भारत में लगभग 5.5 करोड़ आईफोन यूनिट्स की असेंबली की गई, जबकि 2024 में यह संख्या करीब 3.6 करोड़ यूनिट्स थी। Apple वैश्विक स्तर पर हर साल लगभग 22 से 23 करोड़ आईफोन का उत्पादन करती है। अब इनमें से करीब एक चौथाई फ्लैगशिप डिवाइस भारत में बनाए जा रहे हैं। इससे भारत कंपनी की वैश्विक सप्लाई चेन में एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनकर उभरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और वैश्विक कंपनियों की “चीन प्लस वन” रणनीति के कारण भी भारत को बड़ा फायदा मिला है। कंपनियां अब चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उत्पादन केंद्रों की तलाश कर रही हैं, और भारत इस दिशा में सबसे मजबूत विकल्प के रूप में सामने आया है। पीएलआई योजना के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों ने भारत की लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों को काफी हद तक संतुलित करने में मदद की है।

भारत में आईफोन उत्पादन मुख्य रूप से Apple के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से Foxconn, Tata Electronics और Pegatron शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए भारत में आईफोन 17 सीरीज के सभी मॉडल, जिनमें प्रो और प्रो मैक्स वेरिएंट भी शामिल हैं, का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा आईफोन 15 और आईफोन 16 जैसे पुराने मॉडल भी भारत में बनाए जा रहे हैं। इनका उपयोग घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के साथ-साथ निर्यात के लिए भी किया जाता है।
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत से निर्यात होने वाली सबसे मूल्यवान वस्तु आईफोन बन गई है। इस दौरान भारत के प्लांट्स से करीब 23 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन निर्यात किए गए, जिनमें से अधिकांश अमेरिका भेजे गए। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत ने कुल 30.13 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात किए, जिससे यह श्रेणी पहली बार देश के शीर्ष निर्यात क्षेत्रों में शामिल हो गई। खास बात यह है कि कुल स्मार्टफोन निर्यात में Apple की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही।
भारत में Apple की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में कंपनी की वार्षिक बिक्री 9 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है। इसी को देखते हुए Apple भारत में अपने रिटेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। फिलहाल देश में कंपनी के छह आधिकारिक रिटेल स्टोर संचालित हो रहे हैं और आने वाले समय में और स्टोर खोलने की योजना है। इसके अलावा कंपनी इस वर्ष के अंत तक भारत में अपनी डिजिटल भुगतान सेवा Apple Pay लॉन्च करने की तैयारी भी कर रही है।
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