Crude oil prices: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल का माहौल बन गया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ते हुए 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। इस उछाल के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव, शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही का ठप होना है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, और यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 0.82 प्रतिशत बढ़कर 99.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 90.71 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले के कारोबारी सत्र में भी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी, जो बाजार में बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है। हालांकि, भारतीय वायदा बाजार में इसका असर कुछ अलग दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सुबह 11:21 बजे क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 1.46 प्रतिशत गिरकर 8,314 रुपये पर कारोबार करता नजर आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू बाजार में यह गिरावट मुनाफावसूली और रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को रोक दिया है या वैकल्पिक मार्ग तलाशना शुरू कर दिया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। नौसैनिक नाकाबंदी अब भी जारी है, जिससे तनाव और गहरा गया है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसे प्रतिदिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान इस जलमार्ग को जल्द से जल्द खोलने के लिए इच्छुक है।
वैश्विक बाजारों में इस अनिश्चितता का असर साफ दिखाई दे रहा है। एशियाई शेयर बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई और बैंकॉक के बाजारों में हल्की बढ़त रही, जबकि हांगकांग और सोल के सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार भी मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।
भारतीय शेयर बाजार भी इस दबाव से अछूते नहीं रहे। सेंसेक्स 521 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 78,748 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 128 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,448 पर कारोबार करता दिखा। तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जल्द नहीं खुलता और तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार भी जा सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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