ATF कीमतों पर मोदी सरकार का बड़ा दांव: एयरलाइंस को राहत देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर
खबर सार :-
केंद्र सरकार का 10,000 करोड़ रुपये का एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण पैकेज विमानन क्षेत्र के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे एयरलाइंस को ईंधन लागत में स्थिरता, बेहतर वित्तीय योजना और परिचालन सुरक्षा मिलेगी। साथ ही पर्यटन, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम वैश्विक ईंधन मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खबर विस्तार : -
ATF Price Stabilization Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नागरिक उड्डयन क्षेत्र को राहत देने वाला एक बड़ा फैसला लिया गया। केंद्र सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती और अस्थिर कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए तेल विपणन कंपनियों (OMC) को 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त बजटीय सहायता देने को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू एयरलाइंस को ईंधन लागत में स्थिरता मिलेगी और विमानन क्षेत्र को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से उबरने में मदद मिलेगी।
ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में मिलेगी सहायता
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह राशि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य एटीएफ की ऊंची और अनिश्चित कीमतों के कारण होने वाले वित्तीय दबाव से तेल कंपनियों और एयरलाइंस दोनों को राहत प्रदान करना है। कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता योजना 36 महीनों तक प्रभावी रहेगी। हालांकि इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी और यह तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी अग्रिम राशि की वसूली और समायोजन नहीं हो जाता।
एयरलाइंस को स्थिर दरों पर मिलेगा ATF
सरकार की नई व्यवस्था के तहत तेल विपणन कंपनियां एयरलाइंस (Airlines)को अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों पर एटीएफ उपलब्ध करा सकेंगी। इससे एयरलाइंस को ईंधन लागत में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी और वे अपने परिचालन खर्चों का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी। कैबिनेट नोट के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की आयात समता मूल्य (इंपोर्ट पेरिटी प्राइस-आईपीपी) निर्धारित बेंचमार्क से ऊपर चली जाती है, तो इस सहायता कोष से तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाएगी। इससे विमानन कंपनियों को अत्यधिक मूल्य वृद्धि का सीधा असर झेलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कीमतें घटने पर सरकार को लौटाई जाएगी राशि
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सहायता स्थायी सब्सिडी नहीं होगी। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें कम होंगी, तब तेल कंपनियों से अंतर की राशि वसूल की जाएगी और उसे भारत की समेकित निधि में वापस जमा कराया जाएगा। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी सहायता राशि की रिकवरी नहीं हो जाती। इस मॉडल को सरकार ने आत्मनिर्भर और संतुलित व्यवस्था बताया है, जिससे सार्वजनिक धन पर दीर्घकालिक बोझ नहीं पड़ेगा।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों दोनों को मिलेगा लाभ
यह योजना सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के संचालन पर लागू रहेगी। योजना में भाग लेने वाली एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते में नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी पक्षकार होंगे। विशेष व्यवस्था के तहत भाग लेने वाली एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्षों तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ खरीदना होगा। हालांकि इस शर्त की भी हर वर्ष समीक्षा की जाएगी।
Tourism और Investment को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन क्षेत्र में लागत स्थिरता आने से टिकट कीमतों पर दबाव कम होगा और यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इसके अलावा पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निर्यात, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और निवेश जैसे क्षेत्रों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरकार का कहना है कि एयरलाइंस अपने वित्तीय और परिचालन निर्णय अधिक सटीकता से ले सकेंगी, जिससे पूरे विमानन पारिस्थितिकी तंत्र में स्थिरता आएगी।
दो महीनों में 2.5 गुना बढ़ी ATF की कीमत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत करीब 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यानी मात्र दो महीनों में कीमतों में लगभग 2.5 गुना वृद्धि हुई, जिससे एयरलाइंस की परिचालन लागत पर भारी दबाव पैदा हो गया। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने यह विशेष सहायता पैकेज मंजूर किया है।
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