RBI MPC फैसले से पहले शेयर बाजार में उत्साह, हरे निशान में सेंसेक्स-निफ्टी; गवर्नर के बयान पर निवेशकों की नजर
खबर सार :-
RBI MPC के फैसले से पहले भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, जबकि निवेशकों की निगाहें केंद्रीय बैंक की भविष्य की नीति पर टिकी हैं। रेपो रेट, महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर आने वाले संकेत न केवल बाजार की दिशा तय करेंगे बल्कि विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
खबर विस्तार : -
RBI MPC Impact: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के अहम फैसले से पहले शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ खुले। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सकारात्मक रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। बाजार में यह तेजी ऐसे समय देखने को मिली है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं का माहौल बना हुआ है।
कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला BSE Sensex अपने पिछले बंद 74,360.01 अंक के मुकाबले 269.93 अंकों की मजबूती के साथ 74,629.94 पर खुला। वहीं, NSE Nifty 50 भी 62.40 अंक चढ़कर 23,478.95 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा।
Share Market: शुरुआती कारोबार में बनी रही बढ़त
खबर लिखे जाने तक सुबह लगभग 9:38 बजे सेंसेक्स 150.64 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,510.65 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी 50 भी 32.75 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,449.30 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। बाजार की यह चाल दर्शाती है कि निवेशक आरबीआई के फैसले से पहले सतर्क तो हैं, लेकिन फिलहाल उनका रुझान खरीदारी की ओर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि एमपीसी के निर्णय से पहले बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी बड़े संकेत के बाद बाजार की दिशा तेजी से बदल सकती है।
Midcap और Smallcap शेयरों में भी दिखी मजबूती
मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि बाजार में जोखिम लेने की क्षमता फिलहाल बनी हुई है। आमतौर पर निवेशक ऐसे शेयरों में तभी निवेश बढ़ाते हैं जब उन्हें भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दिखाई देते हैं।
Media और रियल्टी सेक्टर ने दिखाई सबसे ज्यादा ताकत
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे ज्यादा मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा पीएसयू बैंक, हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखी गई। वहीं दूसरी ओर मेटल, ऑयल एंड गैस, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। वैश्विक कमोडिटी कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़े संकेतों का असर इन सेक्टरों पर दिखाई दिया।
इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
निफ्टी 50 में एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, अडानी एंटरप्राइजेज, एसबीआई लाइफ और टेक महिंद्रा के शेयरों ने सबसे अधिक बढ़त दर्ज की। इन शेयरों में निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर विप्रो, हिंडाल्को, टाटा स्टील और ट्रेंट के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और सेक्टर-विशेष दबाव के कारण इन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
RBI Governor के बयान पर टिकी बाजार की नजर
आज बाजार की सबसे बड़ी नजर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर है। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक वृद्धि और ब्याज दरों को लेकर आगे क्या रुख अपनाने वाला है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। हालांकि, केंद्रीय बैंक भविष्य की महंगाई और आर्थिक गतिविधियों को लेकर अपने अनुमान में बदलाव कर सकता है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए जीडीपी वृद्धि अनुमान में मामूली कटौती तथा महंगाई अनुमान में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
‘Hawkish hold’ रणनीति की चर्चा तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई इस बार “Hawkish hold” रणनीति अपना सकता है। इसका अर्थ है कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन भविष्य में महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए सख्त रुख बरकरार रखा जाएगा। यदि आरबीआई अप्रत्याशित रूप से 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि करता है तो बैंकिंग शेयरों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि महंगे कर्ज से मांग प्रभावित होने की आशंका रहती है।
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