ONGC Tender Cancelled: सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने जैक-अप रिग्स की भर्ती के लिए जारी टेंडर को रद्द कर दिया है। कंपनी का कहना है कि इस फैसले के पीछे मूल्य निर्धारण में गंभीर अनियमितताओं और संभावित मिलीभगत की आशंका मुख्य वजह रही। यह कदम उस समय उठाया गया जब एक मीडिया रिपोर्ट में टेंडर रद्द किए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उसकी प्राथमिकता पारदर्शी और निष्पक्ष खरीद प्रक्रिया को बनाए रखना है।
ओएनजीसी ने अपने बयान में कहा कि वह सार्वजनिक खरीद के स्थापित नियमों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करती है। कंपनी ने यह भी दोहराया कि सभी बोलीदाताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे ईमानदारी और प्रतिस्पर्धा के आधार पर कीमतें पेश करें। कंपनी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया के दौरान कीमतों में असामान्य उछाल देखने को मिला। जांच में पाया गया कि महज नौ महीनों के भीतर जैक-अप रिग्स की दैनिक दर 35,606 डॉलर से बढ़कर 56,195 डॉलर तक पहुंच गई, जो लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
ओएनजीसी का मानना है कि इतनी तेज वृद्धि सामान्य बाजार व्यवहार के अनुरूप नहीं है और इससे प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। यही वजह है कि कंपनी ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच की। इसके अलावा, बोली पैटर्न और वैश्विक बाजार स्थितियों का विश्लेषण करने पर मिलीभगत की आशंका भी सामने आई। कंपनी ने संकेत दिया कि कुछ प्रतिभागियों के बीच समन्वित बोली लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ओएनजीसी ने स्पष्ट किया कि अनुचित व्यापारिक गतिविधियों, जैसे जानबूझकर अत्यधिक कम या असामान्य रूप से अधिक कीमत लगाना या आपसी समझ के आधार पर बोली लगाना, को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि एक जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई होने के नाते उसके लिए यह आवश्यक था कि वह इन चिंताओं को गंभीरता से ले और उचित कार्रवाई करे। इसी के तहत टेंडर को रद्द करने का निर्णय लिया गया। ओएनजीसी ने यह भी जोर दिया कि यह फैसला पूरी तरह से संगठन के हितों की रक्षा, सार्वजनिक धन के सही उपयोग और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय में किसी बाहरी दबाव की भूमिका नहीं है। आगे की रणनीति पर बात करते हुए कंपनी ने कहा कि वह उद्योग जगत के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करती रहेगी। साथ ही, कार्टेलाइजेशन जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि प्रतिस्पर्धा स्वस्थ बनी रहे।
इस घटनाक्रम का असर बाजार में भी देखने को मिला। NSE पर कंपनी के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। बुधवार दोपहर करीब 1:23 बजे ओएनजीसी के शेयर 0.35 प्रतिशत बढ़कर 283.20 रुपये के स्तर पर कारोबार करते नजर आए। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का यह कदम न केवल उसकी साख को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति अधिक सजग हो रही हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
वैश्विक तनाव का असर: Share Market हुआ धड़ाम, IT Sector में सबसे बड़ी मार
Seafood Export में भारत का रिकॉर्ड धमाका: 72,000 करोड़ पार, झींगों ने मचाया ग्लोबल बाजार में धूम
Hormuz Crisis से तेल बाजार में उथल-पुथल, 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा Crude Oil
Bullion Market में बढ़ी हलचलः Akshaya Tritiya से पहले चमका Gold, Silver हुई फीकी
India-Austria रिश्तों को नई उड़ान: रक्षा, खाद्य सुरक्षा और फिल्म सहयोग में ऐतिहासिक समझौते
Akshaya Tritiya 2026: सोने की चमक चरम पर, भारतीय घरों में छिपा दुनिया का सबसे बड़ा खजाना
West Asia Crisis के बीच राहत: देश में LPG Supply सामान्य, कालाबाजारी पर सरकार का सख्त प्रहार
वैश्विक राहत का असर: America-Iran Tension घटते ही Sensex 78,500 के पार, बाजार में चौतरफा तेजी
ग्लोबल संकेतों से बाजार में दमदार उछाल: सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% चढ़े, निवेशकों की लौटी मुस्कान
ईंधन कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी: मोदी सरकार ला सकती है ‘Fuel Price Stabilization Mechanism'