RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों (Interest Rates) में किसी प्रकार का बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। उनके अनुसार दरों में स्थिरता बनाए रखने से आर्थिक गतिविधियों को संतुलन मिलेगा और विकास की रफ्तार भी मजबूत बनी रहेगी।
सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस में संबोधित करते हुए सीएस शेट्टी (CS Setty) ने कहा कि बाजार की सामान्य धारणा भी यही है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू मांग के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। ऐसे में ब्याज दरों को स्थिर रखना आर्थिक मजबूती और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) दोनों के लिए सकारात्मक कदम हो सकता है।
एसबीआई चेयरमैन ने निवेशकों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव को देखकर निर्णय लेने के बजाय भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को समझना चाहिए। उनके अनुसार देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियादी ढांचे, बैंकिंग सुधारों, वित्तीय समावेशन और डिजिटल परिवर्तन के कारण लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं। भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में बदलाव, ऊर्जा संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे स्थिर और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यह स्थिति भारत को निवेश और विकास के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाती है।

सीएस शेट्टी ने देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत की सबसे बड़ी डिजिटल उपलब्धियों में से एक है। आज हर महीने लगभग 20 अरब से अधिक डिजिटल लेनदेन यूपीआई के माध्यम से किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन ट्रांजैक्शनों में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले एसबीआई की है, जो बैंक की तकनीकी क्षमता और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि एसबीआई के डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) पर तकनीकी विफलता की दर मात्र 0.01 प्रतिशत है, जो बैंकिंग क्षेत्र में उच्च विश्वसनीयता और दक्षता का उदाहरण है। उनके अनुसार डिजिटल बैंकिंग ने ग्राहकों के लिए सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है।
वित्तीय समावेशन के विषय पर बोलते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी की ‘जेएएम ट्रिनिटी’ ने भारत में वित्तीय क्रांति ला दी है। इसके जरिए करोड़ों लोगों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाकर पारदर्शिता बढ़ाई है और भ्रष्टाचार व लीकेज को कम किया है।
भारत की भविष्य की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि देश को वर्ष 2030 तक बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। एसबीआई के आंतरिक अनुमान के अनुसार अगले कुछ वर्षों में लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में करीब 450 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा वाला विनिर्माण क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख स्तंभ बनेंगे। यदि इन क्षेत्रों में लगातार निवेश होता है तो भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर भी सीएस शेट्टी ने सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भले ही भारत के पास फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी एआई कंपनियां न हों, लेकिन एआई को अपनाने और उसके व्यापक उपयोग के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि SBI पहले से ही पर्सनल लोन (Personal Loan) और कई अन्य सेवाओं में एआई आधारित मॉडल का उपयोग कर रहा है। शेट्टी ने कहा कि बैंक ने ‘रिस्पॉन्सिबल एआई’ फ्रेमवर्क भी लागू किया है ताकि तकनीक का सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इससे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ जोखिम प्रबंधन को भी मजबूत किया जा रहा है।
SBI चेयरमैन ने कर्ज की मांग पर कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की मांग मजबूत बनी हुई है। इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत भी बड़ी संख्या में उद्यमी बैंक से संपर्क कर रहे हैं। इसके अलावा एसबीआई घरेलू और विदेशी बैंकों के साथ मिलकर विलय एवं अधिग्रहण वित्तपोषण (एमएंडए फाइनेंसिंग) में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को केवल शेयर बाजार के सूचकांकों से नहीं मापा जाना चाहिए। बैंकिंग सुधार, डिजिटल नवाचार, मजबूत बुनियादी ढांचा और तकनीकी प्रगति भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। इसलिए निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित होने के बजाय देश की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा रखना चाहिए।
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